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सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे, नहीं हटवा पा रहा प्रशासन
Updated Mon, 25 Jun 2018 12:32 AM IST
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जौनपुर। जिले भर में 500 करोड़ से अधिक की सरकारी भूमि पर लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है। कब्जे सरकारी भूमि पर हैं। कब्जा हटवाने में प्रशासन फेल हो चुका है। सभी प्रकरणों में जांच हो चुकी है। कार्रवाई के नाम पर कोरम ही पूरा किया गया है। शहर में वाजिदपुर से जेसीज तक करोड़ों की महंगी जमीन के मामले में प्रशासन चुप्पी साध बैठा है। और तो और नाले की जमीन पर भी लोगों ने भवन बनवा लिए हैं लेकिन प्रशासन कुछ कर नहीं पा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शपथ लेते हुए भू माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा था कि सरकारी जमीनों पर कब्जा करने वालों को भू माफिया में चिह्नित किया जाए। इसके बाद प्रशासन ने अभियान चलाया। तकरीबन 500 करोड़ की भूमि चिह्नित की गई। छोटे-छोटे गरीबों का मड़हा उजाड़कर प्रशासन ने कोरम पूरा कर दिया। सरकारी जमीन कब्जा करने वाले दबंग लोगों का न तो भू माफिया में चिह्नीकरण ही किया गया और न ही उनसे जमीन ही खाली कराई गई। जिसकी वजह से शासन का अभियान फेल हो गया। जिला प्रशासन को भी पता है कि महंगी-महंगी सरकारी जमीनों पर किन-किन लोगों ने निर्माण करा लिया है फिर भी प्रशासन चुप्पी साधे है। शहर के अकेले 10 से अधिक ऐसे मामले हैं जिस पर करोड़ की भूमि पर लोगों का कब्जा है। उदाहरण के तौर पर वाजिदपुर से जेसीज तक सड़क के दोनों तरफ 150-150 फुट की जमीन पीडब्लूडी की है। ऐसे 80 लोगों को पीडब्लूडी नोटिस दे चुका है लेकिन कोई कब्जा नहीं हटाया गया। जबकि यह भूमि 200 करोड़ से अधिक कीमत की है। ऐसे ही गोमती पुल से नीचे कचहरी की तरफ आने पर एक भूमि पर दो साल पूर्व तत्कालीन डीएम भानु चंद्र गोस्वामी ने कब्जा हटवाया था। जहां कब्जा हटा था वहां पक्का मकान बन गया है। जौनपुर-मिर्जापुर रोड पर फूलपुर ग्राम सभा में एक एसडीएम की मिलीभगत से एक भू माफिया ने करोड़ों रुपये की तालाब और ग्राम समाज की भूमि कब्जा कर रखा है। राजस्व कर्मियों का इस माफिया को संरक्षण है। इस वजह से कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है। एडीएम रमेश चंद्र मिश्र का कहना है कि सरकारी भूमि से कब्जा हटवाने का अभियान तेजी से चल रहा है। जिन लोगों ने सरकारी भूमि पर कब्जा किया है उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शपथ लेते हुए भू माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा था कि सरकारी जमीनों पर कब्जा करने वालों को भू माफिया में चिह्नित किया जाए। इसके बाद प्रशासन ने अभियान चलाया। तकरीबन 500 करोड़ की भूमि चिह्नित की गई। छोटे-छोटे गरीबों का मड़हा उजाड़कर प्रशासन ने कोरम पूरा कर दिया। सरकारी जमीन कब्जा करने वाले दबंग लोगों का न तो भू माफिया में चिह्नीकरण ही किया गया और न ही उनसे जमीन ही खाली कराई गई। जिसकी वजह से शासन का अभियान फेल हो गया। जिला प्रशासन को भी पता है कि महंगी-महंगी सरकारी जमीनों पर किन-किन लोगों ने निर्माण करा लिया है फिर भी प्रशासन चुप्पी साधे है। शहर के अकेले 10 से अधिक ऐसे मामले हैं जिस पर करोड़ की भूमि पर लोगों का कब्जा है। उदाहरण के तौर पर वाजिदपुर से जेसीज तक सड़क के दोनों तरफ 150-150 फुट की जमीन पीडब्लूडी की है। ऐसे 80 लोगों को पीडब्लूडी नोटिस दे चुका है लेकिन कोई कब्जा नहीं हटाया गया। जबकि यह भूमि 200 करोड़ से अधिक कीमत की है। ऐसे ही गोमती पुल से नीचे कचहरी की तरफ आने पर एक भूमि पर दो साल पूर्व तत्कालीन डीएम भानु चंद्र गोस्वामी ने कब्जा हटवाया था। जहां कब्जा हटा था वहां पक्का मकान बन गया है। जौनपुर-मिर्जापुर रोड पर फूलपुर ग्राम सभा में एक एसडीएम की मिलीभगत से एक भू माफिया ने करोड़ों रुपये की तालाब और ग्राम समाज की भूमि कब्जा कर रखा है। राजस्व कर्मियों का इस माफिया को संरक्षण है। इस वजह से कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है। एडीएम रमेश चंद्र मिश्र का कहना है कि सरकारी भूमि से कब्जा हटवाने का अभियान तेजी से चल रहा है। जिन लोगों ने सरकारी भूमि पर कब्जा किया है उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
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