मछलीशहर। समुद्र मंथन से उत्पन्न लक्ष्मी को कौड़ी, गोमती चक्र, चावल की खीर अर्पण करने से मां प्रसन्न होती हैं। वृष लग्न में इनकी पूजा का सर्वोत्तम मुहूर्त माना जाता है।
माता लक्ष्मी के आठ रूप हैं आदिलक्ष्मी, धनलक्ष्मी, धान्यलक्ष्मी, गजलक्ष्मी, संतानलक्ष्मी, वीरलक्ष्मी, विजयलक्ष्मी, विद्यालक्ष्मी, इन अष्टलक्ष्मी रूप में पूजित होने पर मां शीघ्र प्रसन्न होती है। कार्तिकमास की अमावस्या को धन, वैभव एवं ऐश्वर्य की देवी माता लक्ष्मी का उद्भव समुद्र मंथन के दौरान हुआ था। इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना का विशेष फल शास्त्रों में वर्णित है। दीपावली के दिन हर कोई मां की विशेष पूजा अर्चना कर मां को प्रसन्न करना चाहता है। ज्योतिष एवं तंत्र के आचार्य डॉक्टर शैलेश मोदनवाल के अनुसार मां लक्ष्मी का उद्भव समुद्र से हुआ था अर्थात मां जल से प्रकट हुई थी, जलतत्व चंद्रमा का कारक है इसलिए माता को चंद्रमा से संबंधित सफेद वस्तुएं विशेष प्रिय है। जैसे मां को अक्षत चढ़ाने से विशेष प्रसन्नता होती है, खीर का भोग अर्पण करने व खीर से ही हवन करने से मां खुश होती है। दूध से बने मिष्ठान का भोग मां को लगाना चाहिए। माता लक्ष्मी कमल पर आसीन होकर समुद्र से निकली थी इसलिए मां को कमला के नाम से भी जाना जाता हैं। कमल का फूल चढ़ाने से देवी लक्ष्मी प्रसन्न हो जाती हैं। कमलगट्टे की माला से मां के मंत्रों का जाप चमत्कारिक लाभ देता है।