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जौनपुर के रचित ने बनाया जिविन एप, प्लाज्मा चाहिए तो यहां आइए
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जौनपुर। कोरोना के उपचार के लिए अभी तक कोई दवा या वैक्सीन नहीं बनी है। सिर्फ प्लाज्मा थेरेपी को ही उपचार में कारगर है, मगर प्लाज्मा की आसानी मिल नहीं रहा है। कोरोना से स्वस्थ हुए व्यक्ति के प्लाज्मा के लिए मरीज और डॉक्टरों को भटकना पड़ रहा है। इस समस्या का समाधान जिविन एप के जरिए होगा। स्थानीय युवक द्वारा तैयार इस एप की मदद से कुछ ही देर में प्लाज्मा आसानी से सुलभ हो जाएगा।
जिले के नईगंज निवासी रचित यादव गाजियाबाद में बीटेक अंतिम वर्ष के छात्र हैं। उन्होंने अपने जूनियर बरेली निवासी दीपेश के साथ मिलकर जिविन एप को तैयार किया है। इस एप के जरिए अपने आसपास मौजूद प्लाज्मा डोनर तक पहुंचा जा सकता है। रचित के मुताबिक एप पर हर शहर में मौजूद प्लाज्मा डोनर का ब्योरा डाला जा रहा है। वे खुद से भी इस पर इस बात की जानकारी दे सकते हैं। प्लाज्मा के लिए जरूरतमंद इस एप के जरिए अपने शहर या आसपास के डोनर से संपर्क कर प्लाज्मा प्राप्त कर सकता है। यह प्रकिया सरल और सहज होने के साथ ही काफी सुविधाजनक भी है।
रचित का कहना है कि 15 लाख से अधिक कोरोना के मामलों के बावजूद अब तक ऐसा कोई प्लेटफार्म नहीं था, जिससे प्लाज्मा के जरूरतमंद और डोनर एक-दूसरे से सम्पर्क कर सकें। इस एप को यह प्लेटफार्म उपलब्ध कराने के मकसद से ही तैयार किया गया है। तीन दिन पहले लांच किए गए एप से तेजी से लोग जुड़ रहे हैं। अभी हर शहर में अपने परिचितों के माध्यम से डोनर का ब्योरा जुटाया जा रहा है। जब ज्यादा लोग इससे जुड़ने लगेंगे तो यह डाटा और समृद्ध होता जाएगा। उन्होंने बताया कि जिविन का मतलब जीवन देने वाला होता है और एप का भी यही काम है। अभी इस एप को वेबसाइट जिविन डाट इन से डाउनलोड किया जा सकता है। भारत सरकार को आवेदन भेजा जा रहा है, वहां से अनुमति के बाद यह प्ले स्टोर पर भी उपलब्ध हो जाएगा।
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जिले के नईगंज निवासी रचित यादव गाजियाबाद में बीटेक अंतिम वर्ष के छात्र हैं। उन्होंने अपने जूनियर बरेली निवासी दीपेश के साथ मिलकर जिविन एप को तैयार किया है। इस एप के जरिए अपने आसपास मौजूद प्लाज्मा डोनर तक पहुंचा जा सकता है। रचित के मुताबिक एप पर हर शहर में मौजूद प्लाज्मा डोनर का ब्योरा डाला जा रहा है। वे खुद से भी इस पर इस बात की जानकारी दे सकते हैं। प्लाज्मा के लिए जरूरतमंद इस एप के जरिए अपने शहर या आसपास के डोनर से संपर्क कर प्लाज्मा प्राप्त कर सकता है। यह प्रकिया सरल और सहज होने के साथ ही काफी सुविधाजनक भी है।
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रचित का कहना है कि 15 लाख से अधिक कोरोना के मामलों के बावजूद अब तक ऐसा कोई प्लेटफार्म नहीं था, जिससे प्लाज्मा के जरूरतमंद और डोनर एक-दूसरे से सम्पर्क कर सकें। इस एप को यह प्लेटफार्म उपलब्ध कराने के मकसद से ही तैयार किया गया है। तीन दिन पहले लांच किए गए एप से तेजी से लोग जुड़ रहे हैं। अभी हर शहर में अपने परिचितों के माध्यम से डोनर का ब्योरा जुटाया जा रहा है। जब ज्यादा लोग इससे जुड़ने लगेंगे तो यह डाटा और समृद्ध होता जाएगा। उन्होंने बताया कि जिविन का मतलब जीवन देने वाला होता है और एप का भी यही काम है। अभी इस एप को वेबसाइट जिविन डाट इन से डाउनलोड किया जा सकता है। भारत सरकार को आवेदन भेजा जा रहा है, वहां से अनुमति के बाद यह प्ले स्टोर पर भी उपलब्ध हो जाएगा।
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