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सर्द हवाओं ने बढ़ाई गलन, लोग ठिठुरे
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Tue, 13 Jan 2015 12:14 AM IST
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घनी बदली के बीच 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सरसराती सर्द हवाओं ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लगातार ऊपर-नीचे होते तापमान के ग्राफ से सोमवार को जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया।
जिले का न्यूनतम तापमान आठ डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, लेकिन शीतलहरी के कारण बढ़ी गलन से लोग दिनभर ठिठुरते रहे। कपड़े के अंदर भी हाथ-पांव में गलन होने के चलते ज्यादातर लोग घर के अंदर रजाई में ही दुबके रहे।
जिले में सर्दी का रौद्र रूप जारी है। सोमवार को पूरे दिन सूर्यदेव के दर्शन नहीं हुए। बदली रहने के कारण दिनभर अंधेरा सा छाया रहा। इस बीच शीतलहर ने लोगों की दुश्वारियां बढ़ा दीं।
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सिर से पांव तक गर्म कपड़ों से कसे रहने के बावजूद ठंड ने लोगों को शरीर सीधा करने की फुरसत नहीं दी। ठंड का असर कम करने के लिए जगह-जगह लोग अलाव से चिपके रहे। दस किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बहीं पछुआ हवाओं ने जहां पूरे दिन बदली का माहौल बनाए रखा, वहीं आर्द्रता का स्तर भी बढ़कर 67 प्रतिशत तक पहुंच गया।
इस बीच जब-तब सूर्यदेव बादलों के बीच से झांके भी तो महज चंद मिनटों के लिए। शाम पांच बजते-बजते मौसम में घटे नमी के स्तर ने सूरज ढलते ही रात का एहसास कराना शुरू कर दिया और लोग घरों में सिमटने लगे।
बेतहाशा ठंड का असर यातायात व्यवस्था पर भी पड़ा। तमाम ट्रेनें कोहरे के कारण देर से चलीं तो दो घंटे की सड़क की यात्रा ने तीन से चार घंटे तक का समय लिया।
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जिले का न्यूनतम तापमान आठ डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, लेकिन शीतलहरी के कारण बढ़ी गलन से लोग दिनभर ठिठुरते रहे। कपड़े के अंदर भी हाथ-पांव में गलन होने के चलते ज्यादातर लोग घर के अंदर रजाई में ही दुबके रहे।
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जिले में सर्दी का रौद्र रूप जारी है। सोमवार को पूरे दिन सूर्यदेव के दर्शन नहीं हुए। बदली रहने के कारण दिनभर अंधेरा सा छाया रहा। इस बीच शीतलहर ने लोगों की दुश्वारियां बढ़ा दीं।
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सिर से पांव तक गर्म कपड़ों से कसे रहने के बावजूद ठंड ने लोगों को शरीर सीधा करने की फुरसत नहीं दी। ठंड का असर कम करने के लिए जगह-जगह लोग अलाव से चिपके रहे। दस किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बहीं पछुआ हवाओं ने जहां पूरे दिन बदली का माहौल बनाए रखा, वहीं आर्द्रता का स्तर भी बढ़कर 67 प्रतिशत तक पहुंच गया।
इस बीच जब-तब सूर्यदेव बादलों के बीच से झांके भी तो महज चंद मिनटों के लिए। शाम पांच बजते-बजते मौसम में घटे नमी के स्तर ने सूरज ढलते ही रात का एहसास कराना शुरू कर दिया और लोग घरों में सिमटने लगे।
बेतहाशा ठंड का असर यातायात व्यवस्था पर भी पड़ा। तमाम ट्रेनें कोहरे के कारण देर से चलीं तो दो घंटे की सड़क की यात्रा ने तीन से चार घंटे तक का समय लिया।