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Jaunpur News: परिजनों में कोहराम, बोले-कमाने वाला बेटा चला गया, कैसे चलेगा घर

Mon, 26 Feb 2024 11:56 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 26 Feb 2024 11:56 PM IST
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Chaos among the family members, they said - the earning son has gone, how will the house run?
सिकरारा। जौनपुर-प्रयागराज राजमार्ग पर रविवार की रात हुए रोडवेज बस व ट्रैक्टर ट्राॅली की भीषण टक्कर में छह लोगों की मौत हो गई। इनमें पांच मजदूर अलीशाहपुर व एक वीरपालपुर गांव से थे। हादसे की जानकारी मिलते ही दोनों गांवों में कोहराम मच गया। शोक में दोनों गांवों में चूल्हे नहीं जले। परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। सब यही कही रहे थे कि घर का कमाने वाला बेटा
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घटना की जानकारी होते ही मृतकों के कुछ परिवार के लोग थाने पहुंच गए। कुछ ऐसे भी थे जो घर के अकेले थे। उनके पट्टीदार लोग पहुंचकर मृतकों की जानकारी ली और घर पर सूचना दी। सोमवार को हादसे की खबर मिलते ही अलीशाहपुर गांव में मातमी सन्नाटा पसरा रहा। गांव के पूर्व प्रधान फुन्नीलाल के युवा पुत्र नीरज सरोज (28) की असामयिक मौत की सूचना पर घर ही नहीं पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ पड़ी। नीरज की माता वर्तमान प्रधान सुशीला सरोज पुत्र की मौत की खबर पर गश खाकर गिर गईं। उन्हें चिकित्सीय सुविधा दिलानी पड़ी। नीरज अपने पड़ोसी रामचंद्र सरोज का ट्रैक्टर चलाता था। उसके दो भाई शरद (45) व पंकज (30) अलग-अलग व्यवसाय में लगे हैं। दिन भर शोक संवेदना जताने वाले पहुंचते रहे।
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इसी गांव के बहादुर सरोज के पुत्र राजेश सरोज (45) मां-बाप का इकलौता बेटा था। इनका एक बेटा मुन्ना है वह भी मजदूरी करके पिता का हाथ बटा रहा था। अचानक विपत्ति का पहाड़ टूट पड़ा। राजेश की तीन बेटियों हैं उनके हाथ पीले करने की चिंता उनकी पत्नी को खाए जा रही है।
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इसी गांव के संग्राम विश्कर्मा(25) मंद बुद्धि युवक था। उसे जहां भी लगा दिया जाता था काम करता रहता था। पिता राजेश खुद मेहनत मजदूरी करके परिवार चलाते हैं।
राम निरंजन मुसहर उर्फ चाई(20) मूलरूप से मोकलपुर मड़ियाहूं के निवासी था। अलीशाहपुर में एक रिश्तेदार के यहां रहकर मजदूरी करता था। बगल के गांव बथुआवर के रामचंद्र बिंद के पुत्र गोविंदा बिंद (30) भी मेहनत मजदूरी कर परिवार चलाने में पिता को सहारा देता था। उसकी मौत से परिवार सदमे में है।

बक्शा क्षेत्र के बीरपालपुर निवासी अतुल सरोज (25) दो भाइयों में बड़ा था। मेहनत मजदूरी कर पिता रमाशंकर का हाथ बंटाता था। मौत से रमाशंकर टूट गए हैं। एक पुत्र व एक पुत्री के सिर से पिता का साया उठा गया।
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