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बैठक से चले गए अध्यक्ष
जौनपुर ब्यूराे
Updated Tue, 19 Jan 2016 01:25 AM IST
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नगरपालिका परिषद के बोर्ड की बैठक में सोमवार को सभासदों ने जमकर हंगामा किया। तकरीबन एक घंटे तक हो हल्ला और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा। इसकी वजह से न तो पिछली कार्यवाही की पुष्टि हुई और न ही बैठक
की शुरूआत ही हो सकी। हंगामे की सूचना पर पुलिस भी पहुंच गई। इसी बीच नपा अध्यक्ष बैठक छोड़कर बाहर निकल गए। इससे नाराज सभासद धरने पर बैठ गए। बोर्ड की बैठक दोपहर बाद जैसे ही शुरू हुई, सभासदों ने एक
भूमि पर दूसरे का नाम नगरपालिका द्वारा चढ़ाए जाने के मामले को लेकर हो हल्ला शुरू कर दिया। उन्हें मनाने का प्रयास अध्यक्ष जितेंद्र सिंह ने किया लेकिन वह उनकी एक न सुने। हो हल्ला करने वालों में सपा के नामित सभासद
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अगली पंक्ति में खड़े थे। हंगामे के बीच पालिका अध्यक्ष बाहर निकल गए। उधर सभासदों ने उनकी अनुपस्थिति में दूसरे को अध्यक्ष बनाकर कार्यवाही शुरू करना चाहा। उनका कहना था कि नियम है कि अगर किसी बैठक में अध्यक्ष
उपस्थिति न हों तो मौजूद सभासदों में से किसी को अध्यक्ष बहुमत के आधार पर चुन लिया जाए जो बोर्ड की बैठक के सभी कर्तव्यों का पालन करेगा। इसी को लेकर सभासद किसी सक्षम अधिकारी को बैठक में बुलाने के लिए धरने
पर बैठ गए। उन्होंने फोन से प्रशासनिक अधिकारियों से बात की। जिसके बाद तहसीलदार मौके पर पहुंचकर सभासदों से बातचीत की। लेकिन बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला। देर शाम तक धरना चलता रहा।
इसके बाद रात नौ बजे तहसीलदार रमाकांत वर्मा की देखरेख में बैठक शुरू हुई। बैठक की अध्यक्षता सभासद मकसूद हसन ने की। इसमें एक लिपिक को हटाने सहित कई प्रस्तावों पर चर्चा हुई। उधर अध्यक्ष जितेंद्र सिंह का कहना है
कि कुछ सभासद बेवजह कार्य में रोड़ा बन रहे हैं। उन्होंने 45 मिनट तक हंगामा किया और बोर्ड की कार्यवाही शुरू ही नहीं होने दी। सभासद श्याम ने कहा कि वह काम रोको प्रस्ताव पेश करेंगे। जबकि 26 जनवरी को होने वाले
कार्यक्रम के निमित्त ही बैठक बुलाई गई थी। हंगामे के कारण वह निकल गए। उन्होंने कहा कि जो आरोप लगा रहे हैं अगर उन्होंने कोई गलत आर्डर किया है तो उसके खिलाफ वे कोर्ट जा सकते हैं।
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की शुरूआत ही हो सकी। हंगामे की सूचना पर पुलिस भी पहुंच गई। इसी बीच नपा अध्यक्ष बैठक छोड़कर बाहर निकल गए। इससे नाराज सभासद धरने पर बैठ गए। बोर्ड की बैठक दोपहर बाद जैसे ही शुरू हुई, सभासदों ने एक
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भूमि पर दूसरे का नाम नगरपालिका द्वारा चढ़ाए जाने के मामले को लेकर हो हल्ला शुरू कर दिया। उन्हें मनाने का प्रयास अध्यक्ष जितेंद्र सिंह ने किया लेकिन वह उनकी एक न सुने। हो हल्ला करने वालों में सपा के नामित सभासद
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अगली पंक्ति में खड़े थे। हंगामे के बीच पालिका अध्यक्ष बाहर निकल गए। उधर सभासदों ने उनकी अनुपस्थिति में दूसरे को अध्यक्ष बनाकर कार्यवाही शुरू करना चाहा। उनका कहना था कि नियम है कि अगर किसी बैठक में अध्यक्ष
उपस्थिति न हों तो मौजूद सभासदों में से किसी को अध्यक्ष बहुमत के आधार पर चुन लिया जाए जो बोर्ड की बैठक के सभी कर्तव्यों का पालन करेगा। इसी को लेकर सभासद किसी सक्षम अधिकारी को बैठक में बुलाने के लिए धरने
पर बैठ गए। उन्होंने फोन से प्रशासनिक अधिकारियों से बात की। जिसके बाद तहसीलदार मौके पर पहुंचकर सभासदों से बातचीत की। लेकिन बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला। देर शाम तक धरना चलता रहा।
इसके बाद रात नौ बजे तहसीलदार रमाकांत वर्मा की देखरेख में बैठक शुरू हुई। बैठक की अध्यक्षता सभासद मकसूद हसन ने की। इसमें एक लिपिक को हटाने सहित कई प्रस्तावों पर चर्चा हुई। उधर अध्यक्ष जितेंद्र सिंह का कहना है
कि कुछ सभासद बेवजह कार्य में रोड़ा बन रहे हैं। उन्होंने 45 मिनट तक हंगामा किया और बोर्ड की कार्यवाही शुरू ही नहीं होने दी। सभासद श्याम ने कहा कि वह काम रोको प्रस्ताव पेश करेंगे। जबकि 26 जनवरी को होने वाले
कार्यक्रम के निमित्त ही बैठक बुलाई गई थी। हंगामे के कारण वह निकल गए। उन्होंने कहा कि जो आरोप लगा रहे हैं अगर उन्होंने कोई गलत आर्डर किया है तो उसके खिलाफ वे कोर्ट जा सकते हैं।