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अस्पताल के बाहर होता है इलाज
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Fri, 15 Apr 2016 01:15 AM IST
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मुंगराबादशाहपुर पीएचसी के बाहर गुरुवार को मरीज को चढ़ाया जा रहा ग्लूकोज।
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मुंगराबादशाहपुर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर मरीजों का उत्पीड़न व शोषण थमने का नाम नही ले रहा है। कार्यरत डाक्टर व कर्मचारी मरीजों के साथ बेरहमी से पेश आते हैं, मरीज दुर्व्यवस्था का शिकार होकर आंसू का घूंट पीकर रह जाते है।
अस्पताल के अंदर बर्थ (बेड) खाली रहने के बाद भी मरीजों का इलाज बाहर खुले आसमान के नीचे लू में चबूतरा पर लेटा कर किया जाता है। एक तो मरीज बीमारी से वैसे मानसिक उलझन में रहते है।
वही तमतमाती धूप में ग्लूकोज चढ़वाना व इलाज कराने में उन्हें बेहद पीड़ा का शिकार होना पड़ता है। महिलाओं व युवतिओं को बेपर्दा में इलाज कराना व्यवस्था को शर्मसार कर दे रहा है।
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धांधली का आलम यह है कि साधारण रोग के लिए भी पर्ची बाहर बंधी-बंधाई दुकान से लेने के लिए लिख दिया जाता है। पकड़ी मोहल्ला निवासी रफीक का आरोप है कि सुबह 10:30 बजे टीटनस की सूई लगवाने गए तो उन्हें बाहर से दवा लेने की पर्ची थमा दिया गया।
अव्यवस्था का विरोध करने पर मरीजों को बाहर इलाज कराने की धमकी दे दी जाती है। कमीशन के चक्कर में साठ-गाठ वाले प्राइवेट पैथोलॉजी पर जांच के लिए मरीजों को भेजा जाता है।
मरीजों की शिकायत है कि न तो जनरेटर चलाया जाता है और कुत्ते की सूई से इलाज के नाम पर दोहन होता है। बाहर इलाज कर रहे डा. मो. शाहिद से पूछा गया तो उन्होंने कहा यह अस्पताल की व्यवस्था है इसमें हस्तक्षेप की जरूरत नही है।
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अस्पताल के अंदर बर्थ (बेड) खाली रहने के बाद भी मरीजों का इलाज बाहर खुले आसमान के नीचे लू में चबूतरा पर लेटा कर किया जाता है। एक तो मरीज बीमारी से वैसे मानसिक उलझन में रहते है।
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वही तमतमाती धूप में ग्लूकोज चढ़वाना व इलाज कराने में उन्हें बेहद पीड़ा का शिकार होना पड़ता है। महिलाओं व युवतिओं को बेपर्दा में इलाज कराना व्यवस्था को शर्मसार कर दे रहा है।
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धांधली का आलम यह है कि साधारण रोग के लिए भी पर्ची बाहर बंधी-बंधाई दुकान से लेने के लिए लिख दिया जाता है। पकड़ी मोहल्ला निवासी रफीक का आरोप है कि सुबह 10:30 बजे टीटनस की सूई लगवाने गए तो उन्हें बाहर से दवा लेने की पर्ची थमा दिया गया।
अव्यवस्था का विरोध करने पर मरीजों को बाहर इलाज कराने की धमकी दे दी जाती है। कमीशन के चक्कर में साठ-गाठ वाले प्राइवेट पैथोलॉजी पर जांच के लिए मरीजों को भेजा जाता है।
मरीजों की शिकायत है कि न तो जनरेटर चलाया जाता है और कुत्ते की सूई से इलाज के नाम पर दोहन होता है। बाहर इलाज कर रहे डा. मो. शाहिद से पूछा गया तो उन्होंने कहा यह अस्पताल की व्यवस्था है इसमें हस्तक्षेप की जरूरत नही है।