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बेकाबू ट्रेलर में फंसकर तीन सौ मीटर तक घिसटता रहा सराफा व्यापारी
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सुईथाकला में सड़क दुर्घटना में मृत सुरेश की फाईल फोटो।
- फोटो : JAUNPUR
सुईथाकला। लखनऊ-बलिया राष्ट्रीय राजमार्ग पर सराय मोहद्दीनपुर पुलिस चौकी के सामने बेकाबू ट्रेलर ने बाइक सवार सराफा व्यापारी को रौंद दिया। व्यापारी ट्रेलर में फंसकर करीब तीन सौ मीटर तक घिसटता रहा। इससे उसके कमर के ऊपर का हिस्सा क्षत-विक्षत हो गया। ग्रामीणों ने ईंट-पत्थर चलाकर ट्रेलर रुकवाया। मौके पर पहुंची पुलिस ने चालक को हिरासत में ले लिया। घटना से गुस्साए लोगों ने मुख्य मार्ग को जाम कर दिया। एसडीएम शाहगंज व सीओ ने समझा-बुझाकर करीब आधे घंटे बाद जाम समाप्त कराया। व्यापारी का आभूषण से भरा बैग भी गायब हो गया है।
सरपतहा थाना क्षेत्र के रामनगर कटघर गांव निवासी सुरेश सोनी (42) की रामनगर बाजार में सराफा की दुकान है। शनिवार की दोपहर वह खरीदारी करने शाहगंज जा रहे थे। सराय मोहद्दीनपुर चौकी के सामने सुल्तानपुर की तरफ से आ रहे तेज रफ्तार ट्रेलर ने उनकी बाइक को चपेट में ले लिया। सुरेश का शरीर ट्रेलर के पिछले पहिए में फंस गया। हादसे के बाद ट्रेलर चालक तेजी से भागने लगा। इसमें वह तीन सौ मीटर तक घिसटते रहे। सुरेश के कमर के ऊपर का हिस्सा क्षत-विक्षत हो गया। लोगों ने ट्रेलर को रोकने क लिे ईंट-पत्थर चलाना शुरू कर दिया। पथराव के चलते बेबस होकर चालक ने वाहन रोक दिया। तब तक पुलिस भी पहुंच गई और चालक को हिरासत में ले लिया। आक्रोशित ग्रामीणों ने लखनऊ-बलिया मार्ग पर जाम लगा दिया। इससे हाईवे पर दोनों तरफ वाहनों की कतार लग गई। सूचना पाकर एसडीएम राजेश वर्मा, सीओ अंकित कुमार मौके पर पहुंचे। लोगों को समझा-बुझाकर जाम समाप्त कराया। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। परिजनों के मुताबिक सुरेश के पास सोने-चांदी के आभूषणों से भरा बैग भी था, जो हादसे के बाद से गायब है। सरपतहा एसओ जयप्रकाश सिंह ने बताया कि संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर चालक को गिरफ्तार कर लिया गया है। बैग की तलाश की जा रही है।
सात माह पहले पति की मौत, अब बेटे की गई जान
सुईथाकला। सात माह पहले हुई पति की मौत के सदमे से उबरने की कोशिश कर रही अमरावती को बेटे सुरेश की मौत ने बदहवास कर दिया। हादसे की खबर पहुंचते ही सुध-बुध खोकर वह गिर पड़ीं। पड़ोस की महिलाओं और परिजनों ने उन्हें संभाला। होश में आने के बाद वह बार-बार बेटे का नाम पुकारते हुए विलाप करने लगती थी। सुरेश की पत्नी और बच्चों का भी रो-रोकर बुरा हाल था।
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सुरेश तीन बहनों के इकलौते भाई थे। सात माह पूर्व पिता रामअवतार की बीमारी से मौत हो गई। इसके बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी सुरेश के कंधों पर ही थी। सराफा की दुकान से परिवार का भरण-पोषण करने वाले सुरेश ने पिता की मौत के बाद गृहस्थी की गाड़ी को बखूबी संभाल लिया था। मां अमरावती देवी भी धीरे-धीरे पति की मौत का सदमा भूलकर बेटे के सहारे आगे का जीवन गुजारने को खुद को तैयार कर रही थीं। इस बीच परिवार पर शनि की ऐसी छाया पड़ी कि पल भर में ही सब कुछ बिखर गया। मां अमरावती बेटे की मौत की जानकारी मिलते ही बदहवास होकर गिर पड़ी। होश संभालते पर बस सुरेश-सुरेश की रट लगाते हुए वह विलाप किए जा रही थीं। कभी बहू सुशीला को निहारतीं तो कभी पोतों का चेहरा देखकर बिलखती। सुरेश की पत्नी सुशीला का भी रो-रोकर बुरा हाल था। उन्हें तीन पुत्र राजन (22), रतन (18) और सुजीत (15) हैं। मां, पत्नी और बच्चों का चेहरा देख कर किसी की आंखें नम थीं।
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सरपतहा थाना क्षेत्र के रामनगर कटघर गांव निवासी सुरेश सोनी (42) की रामनगर बाजार में सराफा की दुकान है। शनिवार की दोपहर वह खरीदारी करने शाहगंज जा रहे थे। सराय मोहद्दीनपुर चौकी के सामने सुल्तानपुर की तरफ से आ रहे तेज रफ्तार ट्रेलर ने उनकी बाइक को चपेट में ले लिया। सुरेश का शरीर ट्रेलर के पिछले पहिए में फंस गया। हादसे के बाद ट्रेलर चालक तेजी से भागने लगा। इसमें वह तीन सौ मीटर तक घिसटते रहे। सुरेश के कमर के ऊपर का हिस्सा क्षत-विक्षत हो गया। लोगों ने ट्रेलर को रोकने क लिे ईंट-पत्थर चलाना शुरू कर दिया। पथराव के चलते बेबस होकर चालक ने वाहन रोक दिया। तब तक पुलिस भी पहुंच गई और चालक को हिरासत में ले लिया। आक्रोशित ग्रामीणों ने लखनऊ-बलिया मार्ग पर जाम लगा दिया। इससे हाईवे पर दोनों तरफ वाहनों की कतार लग गई। सूचना पाकर एसडीएम राजेश वर्मा, सीओ अंकित कुमार मौके पर पहुंचे। लोगों को समझा-बुझाकर जाम समाप्त कराया। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। परिजनों के मुताबिक सुरेश के पास सोने-चांदी के आभूषणों से भरा बैग भी था, जो हादसे के बाद से गायब है। सरपतहा एसओ जयप्रकाश सिंह ने बताया कि संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर चालक को गिरफ्तार कर लिया गया है। बैग की तलाश की जा रही है।
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सात माह पहले पति की मौत, अब बेटे की गई जान
सुईथाकला। सात माह पहले हुई पति की मौत के सदमे से उबरने की कोशिश कर रही अमरावती को बेटे सुरेश की मौत ने बदहवास कर दिया। हादसे की खबर पहुंचते ही सुध-बुध खोकर वह गिर पड़ीं। पड़ोस की महिलाओं और परिजनों ने उन्हें संभाला। होश में आने के बाद वह बार-बार बेटे का नाम पुकारते हुए विलाप करने लगती थी। सुरेश की पत्नी और बच्चों का भी रो-रोकर बुरा हाल था।
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सुरेश तीन बहनों के इकलौते भाई थे। सात माह पूर्व पिता रामअवतार की बीमारी से मौत हो गई। इसके बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी सुरेश के कंधों पर ही थी। सराफा की दुकान से परिवार का भरण-पोषण करने वाले सुरेश ने पिता की मौत के बाद गृहस्थी की गाड़ी को बखूबी संभाल लिया था। मां अमरावती देवी भी धीरे-धीरे पति की मौत का सदमा भूलकर बेटे के सहारे आगे का जीवन गुजारने को खुद को तैयार कर रही थीं। इस बीच परिवार पर शनि की ऐसी छाया पड़ी कि पल भर में ही सब कुछ बिखर गया। मां अमरावती बेटे की मौत की जानकारी मिलते ही बदहवास होकर गिर पड़ी। होश संभालते पर बस सुरेश-सुरेश की रट लगाते हुए वह विलाप किए जा रही थीं। कभी बहू सुशीला को निहारतीं तो कभी पोतों का चेहरा देखकर बिलखती। सुरेश की पत्नी सुशीला का भी रो-रोकर बुरा हाल था। उन्हें तीन पुत्र राजन (22), रतन (18) और सुजीत (15) हैं। मां, पत्नी और बच्चों का चेहरा देख कर किसी की आंखें नम थीं।