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22 बूथों पर बसपा का नहीं खुला खाता, 52 बूथों पर भाजपादहाई से भी कम
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जौनपुर। मल्हनी विधानसभा में उपचुनाव के नतीजों ने भाजपा और बसपा को बड़ा झटका दिया है। बड़े जनाधार वाले दोनों ही राष्ट्रीय दलों ने सिर्फ जमानत ही नहीं गंवाई, साख भी खोई है। मल्हनी में 22 बूथ ऐसे रहे, जहां बसपा खाता भी नहीं खोल सकी। केंद्र और प्रदेश की सत्ता में आसीन भाजपा 52 बूथों पर दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू सकी। 11 बूथ ऐसे रहे, जहां उसे सिर्फ 10 वोट मिले। यह आंकड़े दोनों ही दलों के लिए सबक भी हैं कि उन्हें मल्हनी में पैर जमाने के लिए जमीनी स्तर पर अभी बहुत कुछ करने की जरुरत है।
उलझे सियासी समीकरणों वाले मल्हनी में जीत का झंडा गाड़ने के लिए दोनों ही दलों ने पूरा जोर लगा दिया था। भाजपा की सक्रियता इसलिए भी ज्यादा थी कि केंद्र और प्रदेश की सत्ता उनके हाथों में है। माहौल को अपने अनुकूल बनाने के लिए पार्टी ने पूरा जोर लगाया। सांसद, विधायक समेत कई वरिष्ठ नेताओं को घर-घर भेजा, ताकि वह जनता को अपनी बात समझा सकें। विडंबना है कि तेज तर्रार नेताओं की फौज उतारने के बाद भी उसे कई बूथों पर इतने वोट भी नहीं मिले कि वह दहाई का आंकड़ा छू सके। मतगणना में मिले वोटों पर गौर करें तो भाजपा प्रत्याशी को 52 बूथों पर दस से कम वोट मिले हैं। कन्या बेसिक प्राथमिक विद्यालय इब्राहिमपुर के बूथ संख्या 303-ए पर पार्टी को सिर्फ एक वोट मिले हैं। यहीं के बूथ संख्या 304-ए पर दो और 304 पर आठ वोट प्राप्त हुआ।
बूथ संख्या 104, 144, 221, 286-ए पर भी दो-दो वोट मिले। अन्य बूथों पर भी संख्या 3 से 9 के बीच ही रही। कुल 11 बूथ ऐसे रहे, जहां प्रत्याशी ने दहाई का आंकड़ा तो छूआ, लेकिन दस से आगे नहीं बढ़ सके। पचास से भी कम वोट वाले बूथों की संख्या भी बहुत है। इतनी कवायद के बाद भी यह हाल दर्शाता है कि भाजपा नेता जनता की नब्ज पकड़ पाने में नाकाम रहे। जनता उन्हें वोट के लिए आश्वासन का झुनझुना थमाती रही और वह उसी में लीन रहे। तीसरे से चौथे स्थान पर खिसकी बसपा की हालत और भी बुरी है। सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय का नारा देने वाली पार्टी को 22 बूथ पर एक भी वोट न मिल पाना चुनाव से पूर्व उनकी कसरतों की हकीकत बयां कर रही है।
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अपने गांव में भी पार्टी को नहीं जीता सके दिग्गज
- भाजपा का टिकट मांग रहे दोनों दावेदारों के गांव में हारी पार्टी
- जिला पंचायत अध्यक्ष के गांव में सायकिल से ज्यादा सिलेंडर पर पड़े वोट
अमर उजाला ब्यूरो
जौनपुर। मल्हनी के नतीजों ने कई दिग्गजों को जमीन दिखा दी है। वह चुनावी मंच से भले ही दूसरों से समर्थन मांगते रहे हों, लेकिन खुद के गांव में ही उनकी नहीं सुनी गई। उन्हीं के गांव में प्रत्याशी को शिकस्त खानी पड़ी है। मतगणना के बाद सामने आए आंकड़ों के बाद उनकी सक्रियता व गांव में पैठ पर चर्चा हो रही है। हालांकि कुछ ऐसे भी रहे, जिन्होंने गांव में पार्टी की लाज बचाने में कामयाब रहे।
सपा से निर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्ष राजबहादुर यादव के गांव ताहिरपुर में कुल चार बूथ थे। दो बूथों पर सपा जीती, जबकि दो बूथों पर हार गई। गांव में सपा प्रत्याशी को कुल 528 वोट मिले। वहीं निर्दल उम्मीदवार धनंजय सिंह को 575 मत प्राप्त हुए। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सुशील उपाध्याय के गांव उमरछा में भाजपा दोनों बूथ हार गई। एक पर बसपा प्रत्याशी को ज्यादा वोट मिले तो दूसरे पर निर्दलीय को। गांव में भाजपा को कुल 204 वोट मिले, जबकि निर्दल को 226 मत। उपचुनाव के लिए भाजपा से टिकट मांग रहे सतीश सिंह के गांव बसारतपुर में भाजपा चारों बूथ हार गई। प्रत्याशी को 208 वोट मिले, जबकि सपा को 185 व निर्दल को 375 वोट प्राप्त हुए। इस गांव में वोटिंग प्रतिशत भी काफी कम था। भाजपा से ही टिकट के दावेदार रहे पाणिनी सिंह के गांव खुंशापुर में पार्टी तीसरे नंबर पर रही। यहां भाजपा को 139, सपा को 179 और निर्दल को 212 वोट मिले। हाल ही में राज्यसभा भेजी गईं सीमा द्विवेदी के मायके भोइला में दो बूथों पर भाजपा को 183, सपा को 184 और निर्दल को 231 वोट मिले हैं। बक्शा ब्लाक प्रमुख सजल सिंह अपने गांव में भाजपा को जिताने में कामयाब रहे। मरगूपुर में भाजपा सर्वाधिक 194 वोट पाकर अव्वल रही। यहां निर्दलीय को 149, बसपा को 84 और सपा को महज 34 मत प्राप्त हुए। डमरुआ में भाजपा को 317 और निर्दलीय को 626 वोट मिले। यहां बसपा तीसरे और सपा चौथे स्थान पर थी। एमएलसी बृजेश सिंह प्रिंसू के गांव बैजापुर में तीन बूथों में दो पर निर्दल उम्मीदवार जीतने में कामयाब रहे, मगर एक बूथ भाजपा जीत गई। यहां निर्दल उम्मीदवार को 397 वोट मिले, जबकि भजपा को 345 मत। 191 वोटों के साथ सपा तीसरे स्थान पर रही। बसपा को 40 वोट मिले।
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उलझे सियासी समीकरणों वाले मल्हनी में जीत का झंडा गाड़ने के लिए दोनों ही दलों ने पूरा जोर लगा दिया था। भाजपा की सक्रियता इसलिए भी ज्यादा थी कि केंद्र और प्रदेश की सत्ता उनके हाथों में है। माहौल को अपने अनुकूल बनाने के लिए पार्टी ने पूरा जोर लगाया। सांसद, विधायक समेत कई वरिष्ठ नेताओं को घर-घर भेजा, ताकि वह जनता को अपनी बात समझा सकें। विडंबना है कि तेज तर्रार नेताओं की फौज उतारने के बाद भी उसे कई बूथों पर इतने वोट भी नहीं मिले कि वह दहाई का आंकड़ा छू सके। मतगणना में मिले वोटों पर गौर करें तो भाजपा प्रत्याशी को 52 बूथों पर दस से कम वोट मिले हैं। कन्या बेसिक प्राथमिक विद्यालय इब्राहिमपुर के बूथ संख्या 303-ए पर पार्टी को सिर्फ एक वोट मिले हैं। यहीं के बूथ संख्या 304-ए पर दो और 304 पर आठ वोट प्राप्त हुआ।
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बूथ संख्या 104, 144, 221, 286-ए पर भी दो-दो वोट मिले। अन्य बूथों पर भी संख्या 3 से 9 के बीच ही रही। कुल 11 बूथ ऐसे रहे, जहां प्रत्याशी ने दहाई का आंकड़ा तो छूआ, लेकिन दस से आगे नहीं बढ़ सके। पचास से भी कम वोट वाले बूथों की संख्या भी बहुत है। इतनी कवायद के बाद भी यह हाल दर्शाता है कि भाजपा नेता जनता की नब्ज पकड़ पाने में नाकाम रहे। जनता उन्हें वोट के लिए आश्वासन का झुनझुना थमाती रही और वह उसी में लीन रहे। तीसरे से चौथे स्थान पर खिसकी बसपा की हालत और भी बुरी है। सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय का नारा देने वाली पार्टी को 22 बूथ पर एक भी वोट न मिल पाना चुनाव से पूर्व उनकी कसरतों की हकीकत बयां कर रही है।
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अपने गांव में भी पार्टी को नहीं जीता सके दिग्गज
- भाजपा का टिकट मांग रहे दोनों दावेदारों के गांव में हारी पार्टी
- जिला पंचायत अध्यक्ष के गांव में सायकिल से ज्यादा सिलेंडर पर पड़े वोट
अमर उजाला ब्यूरो
जौनपुर। मल्हनी के नतीजों ने कई दिग्गजों को जमीन दिखा दी है। वह चुनावी मंच से भले ही दूसरों से समर्थन मांगते रहे हों, लेकिन खुद के गांव में ही उनकी नहीं सुनी गई। उन्हीं के गांव में प्रत्याशी को शिकस्त खानी पड़ी है। मतगणना के बाद सामने आए आंकड़ों के बाद उनकी सक्रियता व गांव में पैठ पर चर्चा हो रही है। हालांकि कुछ ऐसे भी रहे, जिन्होंने गांव में पार्टी की लाज बचाने में कामयाब रहे।
सपा से निर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्ष राजबहादुर यादव के गांव ताहिरपुर में कुल चार बूथ थे। दो बूथों पर सपा जीती, जबकि दो बूथों पर हार गई। गांव में सपा प्रत्याशी को कुल 528 वोट मिले। वहीं निर्दल उम्मीदवार धनंजय सिंह को 575 मत प्राप्त हुए। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सुशील उपाध्याय के गांव उमरछा में भाजपा दोनों बूथ हार गई। एक पर बसपा प्रत्याशी को ज्यादा वोट मिले तो दूसरे पर निर्दलीय को। गांव में भाजपा को कुल 204 वोट मिले, जबकि निर्दल को 226 मत। उपचुनाव के लिए भाजपा से टिकट मांग रहे सतीश सिंह के गांव बसारतपुर में भाजपा चारों बूथ हार गई। प्रत्याशी को 208 वोट मिले, जबकि सपा को 185 व निर्दल को 375 वोट प्राप्त हुए। इस गांव में वोटिंग प्रतिशत भी काफी कम था। भाजपा से ही टिकट के दावेदार रहे पाणिनी सिंह के गांव खुंशापुर में पार्टी तीसरे नंबर पर रही। यहां भाजपा को 139, सपा को 179 और निर्दल को 212 वोट मिले। हाल ही में राज्यसभा भेजी गईं सीमा द्विवेदी के मायके भोइला में दो बूथों पर भाजपा को 183, सपा को 184 और निर्दल को 231 वोट मिले हैं। बक्शा ब्लाक प्रमुख सजल सिंह अपने गांव में भाजपा को जिताने में कामयाब रहे। मरगूपुर में भाजपा सर्वाधिक 194 वोट पाकर अव्वल रही। यहां निर्दलीय को 149, बसपा को 84 और सपा को महज 34 मत प्राप्त हुए। डमरुआ में भाजपा को 317 और निर्दलीय को 626 वोट मिले। यहां बसपा तीसरे और सपा चौथे स्थान पर थी। एमएलसी बृजेश सिंह प्रिंसू के गांव बैजापुर में तीन बूथों में दो पर निर्दल उम्मीदवार जीतने में कामयाब रहे, मगर एक बूथ भाजपा जीत गई। यहां निर्दल उम्मीदवार को 397 वोट मिले, जबकि भजपा को 345 मत। 191 वोटों के साथ सपा तीसरे स्थान पर रही। बसपा को 40 वोट मिले।
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