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गुजरात से पैदल जौनपुर पहुंचे बिहार के मजदूर
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गुजरात से पैदल जौनपुर पहुंचे बिहार के मजदूर
मछलीशहर। लॉकडाउन के चलते रोजी रोटी की समस्या निरंतर गंभीर होती गई तो गुजरात के वापी शहर से बिहार के कई मजदूर पैदल चलकर बुधवार को जौनपुर पहुंचे। पैदल चल रहे इन मजदूरों के पास खाने-पीने की सामग्री भी नहीं है। रास्ते में इनकी बेबसी को देखते हुए लोग कहीं खाना खिला रहे तो कहीं पानी पिला रहे।
पैदल चलते हुए मछलीशहर पहुंचे बिहार के बक्सर जिले के हरिश्चंद्र, उस्मान अली, मनोहर, बलराम, राधेश्याम आदि बताया कि लॉकडाउन के चलते काम धंधा बंद हो गया। आमदनी ठप हो गई। पास में जो पैसे थे वह भी अब खत्म हो रहे थे। आने वाले संकट को देखते हुए पैदल ही घर के लिए निकल लिए। एमपी में कुछ दूर तक ट्रक ने सहारा दिया तो कुछ दूर पिकअप से रास्ता कट गया। इधर इलाहाबाद से पैदल आ रहे हैं। अभी इसी चाल से चलते रहेंगे तो घर पहुंचने में तीन से चार दिन लग सकता है। इन श्रमिकों ने कहा कि लॉकडाउन की घोषणा हुई तो यह उम्मीद थी कि सरकार कुछ न कुछ खाने पीने का इंतजाम करेगी। लेकिन 15 दिनों तक इंतजार करते रहे। जेब में मौजूद पैसा भी खत्म हो रहा था इसलिए वहां से पैदल ही चल दिए। रास्ते में तमाम दुश्वारियों का का सामना करना पड़ा लेकिन उनके पास इसके सिवाय और कोई दूसरा रास्ता नहीं दिख रहा है।
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गुजरात से पैदल जौनपुर पहुंचे बिहार के मजदूर
मछलीशहर। लॉकडाउन के चलते रोजी रोटी की समस्या निरंतर गंभीर होती गई तो गुजरात के वापी शहर से बिहार के कई मजदूर पैदल चलकर बुधवार को जौनपुर पहुंचे। पैदल चल रहे इन मजदूरों के पास खाने-पीने की सामग्री भी नहीं है। रास्ते में इनकी बेबसी को देखते हुए लोग कहीं खाना खिला रहे तो कहीं पानी पिला रहे।
पैदल चलते हुए मछलीशहर पहुंचे बिहार के बक्सर जिले के हरिश्चंद्र, उस्मान अली, मनोहर, बलराम, राधेश्याम आदि बताया कि लॉकडाउन के चलते काम धंधा बंद हो गया। आमदनी ठप हो गई। पास में जो पैसे थे वह भी अब खत्म हो रहे थे। आने वाले संकट को देखते हुए पैदल ही घर के लिए निकल लिए। एमपी में कुछ दूर तक ट्रक ने सहारा दिया तो कुछ दूर पिकअप से रास्ता कट गया। इधर इलाहाबाद से पैदल आ रहे हैं। अभी इसी चाल से चलते रहेंगे तो घर पहुंचने में तीन से चार दिन लग सकता है। इन श्रमिकों ने कहा कि लॉकडाउन की घोषणा हुई तो यह उम्मीद थी कि सरकार कुछ न कुछ खाने पीने का इंतजाम करेगी। लेकिन 15 दिनों तक इंतजार करते रहे। जेब में मौजूद पैसा भी खत्म हो रहा था इसलिए वहां से पैदल ही चल दिए। रास्ते में तमाम दुश्वारियों का का सामना करना पड़ा लेकिन उनके पास इसके सिवाय और कोई दूसरा रास्ता नहीं दिख रहा है।
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