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त्योहारों पर रहें सचेत, लगेगी मिलावटखोरी की चोट
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जौनपुर। दीपावली का त्योहार नजदीक आ रहा है। बाजार में रंग बिरंगी मिठाइयों की दुकानें सजने लगी है। ऐसे में मिलावटखोरी की शिकायतों का भी दौर तेज हो गया है। इस बात अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले तीन दिन में खाद्य विभाग ने तीस नमूनों को संग्रह करके जांच के लिए भेजा है। जबकि 80 हजार रुपये के खाद्य सामग्रियों को सीज किया है।
त्योहार के कारण बाजारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य सामग्री के मांग बढ़ गई है। इस समय खोवा की मांग बढ़ने पर गाजीपुर से बड़े पैमाने पर आपूर्ति की जा रही है। इस समय चटक रंग वाली मिठाइयों की भरमार है। कई स्थानों पर सिंथेटिक मावे का इस्तेमाल किया जाता है। काजू कतली सरीखी महंगी मिठाई में भी मिलावट की जाती है। कुछ स्थानों पर काजू की जगह मूंगफली का चूरा मिलाया जाता है। त्योहार पर महंगाई को देखते हुए कारोबारियों ने पहले से खोवा खरीदकर डंप कर लिया था। केमिकल लगाकर रखे गए इस खोवे से तैयार मिठाई को त्योहार पर बेचने की तैयारी की जा रही है। इतना ही नहीं, केमिकल के घोल से नकली दूध में चिकनाई और फैट लाने के लिए रिफाइंड आयल मिलाया जाता है। झाग के लिए केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे तैयार दूध की कीमत सिर्फ 20 रुपये लीटर आती है। जबकि बाजार में इसे उपभोक्ताओं के हाथ 40-45 रुपये लीटर बेचा जाता है।
इसी तरह से खोवा में मैदा, आलू और केमिकल मिलाकर मिलावट की जाती है। इससे सेहत पर विपरीत असर पड़ना तय है। इसी तरह से बेसन में भी मैदा व खेसारी मिलाकर कारोबारी जेब भरने में लगे हैं। हालांकि इस तरह की शिकायतें न आने का खाद्य विभाग द्वारा दावा किया जाता है। वहीं, त्योहार नजदीक आने पर विभाग के अधिकारी कोरमपूर्ति के अभियान चलाता हैं। इनमें ज्यादातर छोटी दुकानें पर ही कार्रवाई की जाती है। क्योंकि विभाग की नजर में इन्हीं दुकानों पर मानकों को पूरा नहीं किया जाता है। वहीं, देखा जाए तो अधिकांश दुकानों पर मिठाई की बिना एक्सपायरी लिखे ही बेचते हैं।
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बात अगर वित्तीय वर्ष 2019-20 से लेकर अब तक के आंकड़ों पर नजर करें तो 403 नमूने मानक के विपरीत मिले हैं। इनमें जिनमें से 93, वित्तीय वर्ष 2020-21 में 87 और चालू वित्तीय वर्ष में 129 नमूने मानक के विपरीत मिले थे। जबकि पिछले तीन दिनों में 30 और नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजे गए हैं। इतना ही नहीं 26 अक्तूबर से लेकर 28 अक्तूबर तक 80 हजार से ज्यादा खाद्य पदार्थ सीज करके संबंधित दुकानदार को ही सुपुर्द किए गए हैं, जिनमें मिठाई, सीरका, पनीर, दूध, खोवा आदि शामिल है।
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पिछले साल वसूला गया था 6 लाख जुर्माना
मिलावटखोरी रोकने के लिए सरकार ने खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2006 बनाया है। इसके तहत खाद्य वस्तुओं का नमूना फेल होने पर अधिकतम उम्र कैद व दस लाख रुपये तक के सजा का प्रावधान है। हैरानी की बात ये है कि विभाग नमूना भरकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेज देता है। पर, रिपोर्ट आने में साल-साल भर का समय लग जाता है। इसके चलते अक्सर आरोपी बच निकलते हैं। जबकि नियमानुसार 90 दिन के भीतर रिपोर्ट आ जानी चाहिए, जो अधिकांश मामलों में नहीं हो पाता है। हालांकि पिछले वर्ष जुर्माने के तौर पर 6 लाख 37 हजार रुपये की वसूली की गई थी।
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न खरीदें चटख रंग वाली मिठाइयां
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी अनिल कुमार राय का कहना है कि जागरूकता से यह मिलावटी सामान खरीदने से बचा जा सकता है। लोग चटक रंग वाली मिठाइयों को खरीदने से बचे। ऐसे खाद्य पदार्थ जिसमें रंग ज्यादा दिखे उसे न खरीदें। मिठाइयां खरीदते समय सूंघकर और चखकर ही लें। खोवा, पनीर और छेना में कुछ बूंद टिंचर आयोडीन मिलाएं। इसका रंग नीला या काला पड़ जाए तो समझ लीजिए, वो मिलावटी है। इसी तरह अगर अंगुलियों से मसलने पर दाने नजर आते हैं तो भी खोवा मिलावटी है। सिंथेटिक दूध की पहचान के लिए उसे हथेली पर रखकर रगड़ने पर झाग निकले तो समझ लें वो गड़बड़ है। वहीं, चांदी का वर्क जलाने पर गेंद जैसी बन जाती है, लेकिन अगर वह स्लेटी रंग का बन जाए तो समझ लीजिए नकली है। इतना ही नहीं, पनीर का टुकड़ा हाथ में मसल कर देखें, अगर वह टूटकर बिखर तो समझ लीजिए मिलावटी है।
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त्योहार के कारण बाजारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य सामग्री के मांग बढ़ गई है। इस समय खोवा की मांग बढ़ने पर गाजीपुर से बड़े पैमाने पर आपूर्ति की जा रही है। इस समय चटक रंग वाली मिठाइयों की भरमार है। कई स्थानों पर सिंथेटिक मावे का इस्तेमाल किया जाता है। काजू कतली सरीखी महंगी मिठाई में भी मिलावट की जाती है। कुछ स्थानों पर काजू की जगह मूंगफली का चूरा मिलाया जाता है। त्योहार पर महंगाई को देखते हुए कारोबारियों ने पहले से खोवा खरीदकर डंप कर लिया था। केमिकल लगाकर रखे गए इस खोवे से तैयार मिठाई को त्योहार पर बेचने की तैयारी की जा रही है। इतना ही नहीं, केमिकल के घोल से नकली दूध में चिकनाई और फैट लाने के लिए रिफाइंड आयल मिलाया जाता है। झाग के लिए केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे तैयार दूध की कीमत सिर्फ 20 रुपये लीटर आती है। जबकि बाजार में इसे उपभोक्ताओं के हाथ 40-45 रुपये लीटर बेचा जाता है।
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इसी तरह से खोवा में मैदा, आलू और केमिकल मिलाकर मिलावट की जाती है। इससे सेहत पर विपरीत असर पड़ना तय है। इसी तरह से बेसन में भी मैदा व खेसारी मिलाकर कारोबारी जेब भरने में लगे हैं। हालांकि इस तरह की शिकायतें न आने का खाद्य विभाग द्वारा दावा किया जाता है। वहीं, त्योहार नजदीक आने पर विभाग के अधिकारी कोरमपूर्ति के अभियान चलाता हैं। इनमें ज्यादातर छोटी दुकानें पर ही कार्रवाई की जाती है। क्योंकि विभाग की नजर में इन्हीं दुकानों पर मानकों को पूरा नहीं किया जाता है। वहीं, देखा जाए तो अधिकांश दुकानों पर मिठाई की बिना एक्सपायरी लिखे ही बेचते हैं।
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बात अगर वित्तीय वर्ष 2019-20 से लेकर अब तक के आंकड़ों पर नजर करें तो 403 नमूने मानक के विपरीत मिले हैं। इनमें जिनमें से 93, वित्तीय वर्ष 2020-21 में 87 और चालू वित्तीय वर्ष में 129 नमूने मानक के विपरीत मिले थे। जबकि पिछले तीन दिनों में 30 और नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजे गए हैं। इतना ही नहीं 26 अक्तूबर से लेकर 28 अक्तूबर तक 80 हजार से ज्यादा खाद्य पदार्थ सीज करके संबंधित दुकानदार को ही सुपुर्द किए गए हैं, जिनमें मिठाई, सीरका, पनीर, दूध, खोवा आदि शामिल है।
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पिछले साल वसूला गया था 6 लाख जुर्माना
मिलावटखोरी रोकने के लिए सरकार ने खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2006 बनाया है। इसके तहत खाद्य वस्तुओं का नमूना फेल होने पर अधिकतम उम्र कैद व दस लाख रुपये तक के सजा का प्रावधान है। हैरानी की बात ये है कि विभाग नमूना भरकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेज देता है। पर, रिपोर्ट आने में साल-साल भर का समय लग जाता है। इसके चलते अक्सर आरोपी बच निकलते हैं। जबकि नियमानुसार 90 दिन के भीतर रिपोर्ट आ जानी चाहिए, जो अधिकांश मामलों में नहीं हो पाता है। हालांकि पिछले वर्ष जुर्माने के तौर पर 6 लाख 37 हजार रुपये की वसूली की गई थी।
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न खरीदें चटख रंग वाली मिठाइयां
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी अनिल कुमार राय का कहना है कि जागरूकता से यह मिलावटी सामान खरीदने से बचा जा सकता है। लोग चटक रंग वाली मिठाइयों को खरीदने से बचे। ऐसे खाद्य पदार्थ जिसमें रंग ज्यादा दिखे उसे न खरीदें। मिठाइयां खरीदते समय सूंघकर और चखकर ही लें। खोवा, पनीर और छेना में कुछ बूंद टिंचर आयोडीन मिलाएं। इसका रंग नीला या काला पड़ जाए तो समझ लीजिए, वो मिलावटी है। इसी तरह अगर अंगुलियों से मसलने पर दाने नजर आते हैं तो भी खोवा मिलावटी है। सिंथेटिक दूध की पहचान के लिए उसे हथेली पर रखकर रगड़ने पर झाग निकले तो समझ लें वो गड़बड़ है। वहीं, चांदी का वर्क जलाने पर गेंद जैसी बन जाती है, लेकिन अगर वह स्लेटी रंग का बन जाए तो समझ लीजिए नकली है। इतना ही नहीं, पनीर का टुकड़ा हाथ में मसल कर देखें, अगर वह टूटकर बिखर तो समझ लीजिए मिलावटी है।