{"_id":"67b4e21236887cb7ea0caef9","slug":"atala-case-update-next-hearing-of-the-case-on-april-15-2025-02-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"अटाला प्रकरण अपडेट : मामले की अगली सुनवाई 15 अप्रैल को, जिला जज की अदालत में 20 नवंबर को निगरानी दाखिल थी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अटाला प्रकरण अपडेट : मामले की अगली सुनवाई 15 अप्रैल को, जिला जज की अदालत में 20 नवंबर को निगरानी दाखिल थी
Wed, 19 Feb 2025 01:10 AM IST
नितीश कुमार पांडेय
अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर
अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर
Published by: नितीश कुमार पांडेय
Updated Wed, 19 Feb 2025 01:10 AM IST
सार
अटाला मस्जिस मामले में क्षेत्राधिकार के संबंध में सिविल कोर्ट के जज के आदेश के खिलाफ जिला जज की अदालत में 20 नवंबर को निगरानी दाखिल की गई थी। कोर्ट ने इसे स्वीकृत कर लिया और अब सुनवाई की अगली तारीख 15 अप्रैल तय की गई है।
विज्ञापन
अटाला मस्जिद
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अटाला मस्जिद मामले में वक्फ अटाला मस्जिद ने वाद के क्षेत्राधिकार के संबंध में सिविल कोर्ट के जज के आदेश के खिलाफ जिला जज की अदालत में 20 नवंबर को निगरानी दाखिल की। कोर्ट ने इसे स्वीकृत कर लिया। शनिवार को स्वराज वाहिनी की तरफ से निगरानी याचिका में अधिवक्ता ने आपत्ति दाखिल की। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 15 अप्रैल की तिथि तय की।
विज्ञापन
पूर्व में वक्फ अटाला मस्जिद ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की अदालत में प्रार्थना पत्र दिया था कि वादी स्वराज वाहिनी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष का दावा क्षेत्राधिकार के अभाव में पोषणनीय नहीं है। कोर्ट ने अटाला मस्जिद का प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया था और जवाबदेही, अमीन रिपोर्ट आदि की सुनवाई के लिए तिथि तय की। इसी आदेश के खिलाफ वक्फ अटाला मस्जिद के सचिव ने जिला जज की अदालत में निगरानी दाखिल की थी।
विज्ञापन
स्वराज वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष संतोष कुमार मिश्रा ने पीस कमेटी जामा मस्जिद (अटाला मस्जिद) मोहल्ला सिपाह के खिलाफ वाद दायर किया। कहा कि 13 वीं शताब्दी में राजा विजय चंद्र जी ने अटला देवी की मूर्ति स्थापित कर मंदिर बनवाया था। इसमें लोग पूजा कीर्तन करते थे। 13 वीं शताब्दी में फिरोज शाह तुगलक ने जौनपुर पर आक्रमण किया। जौनपुर पर अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया।
विज्ञापन
उसने अटला देवी मंदिर में तोड़फोड़ की। उसकी भव्यता नष्ट कर दी। हिंदू धर्मावलंबी के प्रबल विरोध के कारण वह उसे पूरी तरह तोड़ नहीं पाया और मंदिर के खंभों पर ही मस्जिद का दे आकार दिया। इसे ही वर्तमान में अटाला मस्जिद का दावा किया जाता है। सनातन धर्म के व्यक्तियों का वहां प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया।
अटाला मस्जिद अटला देवी का मंदिर है, यह तथ्य इतिहासकार अबुल फजल की रचना आईने अकबरी एवं अन्य रचनाओं में पूर्णतया स्पष्ट है। मंदिर के खंभों इत्यादि पर आज भी हिंदू स्थापत्य एवं वास्तुकला तथा हिंदू रीति-रिवाज के चिह्न एवं अवशेष मौजूद हैं।