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ट्यूबलाइट और सीएफएल से मानव स्वास्थ्य को खतरा: डॉ.संजय
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33- पूविवि में आयोजित अल्ट्रासोनिक सम्मेलन के दूसरे दिन डॉ संजय जे ढोबले को स्मृति चिन्ह देते कुलप?
- फोटो : JAUNPUR
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में चल रहे आधुनिक तकनीक के लिए अल्ट्रासोनिक एवं पदार्थ विज्ञान विषयक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन वक्ताओं ने भविष्य की तकनीकी के कई पहलुओं पर चर्चा की। ऊर्जा के प्राकृतिक स्रोतों के संरक्षण और पर्यावरण के लिए बेहतरउपकरण बनानेे पर जोर दिया। रविवार को सम्मेलन के छह सत्रों में 20 विशेष व्याख्यान, तीन प्लेनेरी टाक और 40 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।
रज्जू भइया भौतिकीय विज्ञान अध्ययन एवं शोध संस्थान और राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला, अल्ट्रासोनिक सोसाइटी ऑफ इंडिया के संयोजन में चल रहे सम्मेलन में आरटीएम नागपुर विश्वविद्यालय के डॉ संजय जे ढोबले ने ऊर्जा संकट पर चर्चा करते हुए कहा कि लगातार दोहन के चलते कोयला, तेल और गैस की कमी हो जाएगी। अब पर्यावरण के अनुरूप ऊर्जा स्रोतों के तलाशने की जरूरत है। ट्यूबलाइट और सीएफएल में पारा का इस्तेमाल होता है। ये खराब होने के बाद रिसाइकल नहीं होते हैं। इससे भूमि, जल और मानव स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। एलईडी सुरक्षित है। इसके उपयोग के प्रति जागरुक होना होगा।
आईआईटी कानपुर के प्रो अंजन कुमार गुप्ता ने ग्रैफीन की तकनीक पर चर्चा करते हुए कहा कि इस तकनीक के इस्तेमाल से कंप्यूटर का आकार-प्रकार पूरी तरह बदल जाएगा। इस तकनीक के मेमोरी डिवाइस बेहतर और छोटी होगी। आर्यभट्ट सभागार में आईआईटी दिल्ली के प्रो. नीरज खरे ने कहा कि नैनो कंपोजिट की मदद से हरित ऊर्जा उत्पन्न की जा सकती है। कुलपति प्रो राजाराम यादव ने अतिथियों स्वागत किया। सम्मेलन के चेयरमैन प्रो बीबी तिवारी ने गतिविधियों का समन्वय किया। सम्मेलन में छह सत्रों में महाराष्ट्र के डॉ.एनआर पवार, एमिटी विश्वविद्यालय नोएडा के आशीष माथुर, प्रो.वंदना राय, सीआईपीडी लखनऊ केएन पांडेय, डॉ.केपी थापा, राष्ट्रीय भौतिकी प्रयोगशाला के डॉ.युधिष्ठिर कुमार यादव, महावीर सिंह आदि ने व्याख्यान दिया। इस दौरान प्रो.विक्रम कुमार, प्रो.विलास तभाने, डॉ.अर्चना, कुलसचिव सुजीत कुमार जायसवाल, डॉ प्रमोद यादव, संयोजक डॉ गिरिधर मिश्र, डॉ पुनीत धवन, डॉ देवराज सिंह, डॉ मनोज मिश्र, डॉ दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ सुनील कुमार, राकेश यादव, डॉ अनिल यादव, डॉ मनीष गुप्ता, डॉ श्याम कन्हैया आदि मौजूद रहे।
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पोस्टर के माध्यम से दी प्रस्तुति
जौनपुर। अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन 32 प्रतिभागियों ने पोस्टर के माध्यम से अपना शोध प्रदर्शित किया। विशेषज्ञों से विभिन्न सवाल भी पूछे। प्रदर्शनी में बीएचयू की मोनिका ने ऑप्टिकल गुण पर अपने शोध को प्रस्तुत किया। प्रयागराज विवि के एके वर्मा ने अपशिष्ट पदार्थों से ऊर्जा के निर्माण की विधि समझाई। बुंदेलखंड विवि के विवेक कुमार खरे ने रेल पटरी के टूटने के गहन अध्ययन पर पोस्टर लगाया। कानपुर विवि के चारू कांडपाल ने पेय पदार्थों के संरक्षित करने का तरीका बताया।
कैंसर रोग का भी निदान अब संभव
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के रज्जू भैया भौतिक विज्ञान अध्ययन एवं शोध संस्थान में चल रहे तकनीकी सत्र के दूसरे दिन आईटी मुंबई से आए शोधार्थी दुष्यंत कुमार सिंह ने कैंसर रोग के निदान पर आधारित अपना शोध पत्र पढ़ा। उन्होंने बताया कि कैंसर रोगी के जिस पार्ट में इंफेक्शन है। उस पार्ट तक हम हार्ड फेरोमैग्नेटिक मैटेरियल को आवश्यक दवा के साथ मिलाकर वहां तक पहुंचाते हैं। ये मैग्नेटिक फोर्स दवा के साथ उस सेल को हिट करके खत्म कर देता है । इससे कैंसर रोग का निदान बिना दर्द के आसानी से हो रहा है। दूसरा इसका महत्वपूर्ण उपयोग ऑटोमोबाइल क्षेत्र में है। किसी भी कार या मोटरसाइकिल की स्पीड का पता आसानी से लगाया जा सकता है। इसके पहिए में मैग्नेट के माध्यम से किसी भी गाड़ी की स्पीड का पता आसानी से लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष में चंद्रयान से जुड़े सूचनाओं का भी इसके माध्यम से पता लगाया जा सकता है। उनका मानना है कि पूर्वांचल विश्वविद्यालय जैसे ग्रामीण क्षेत्र में इतने महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सेमिनार से पूर्वांचल के लोगों को अपने शोध का गहराई से अध्ययन करने और इसे अपडेट करने में काफी सहायता मिलेगी।
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रज्जू भइया भौतिकीय विज्ञान अध्ययन एवं शोध संस्थान और राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला, अल्ट्रासोनिक सोसाइटी ऑफ इंडिया के संयोजन में चल रहे सम्मेलन में आरटीएम नागपुर विश्वविद्यालय के डॉ संजय जे ढोबले ने ऊर्जा संकट पर चर्चा करते हुए कहा कि लगातार दोहन के चलते कोयला, तेल और गैस की कमी हो जाएगी। अब पर्यावरण के अनुरूप ऊर्जा स्रोतों के तलाशने की जरूरत है। ट्यूबलाइट और सीएफएल में पारा का इस्तेमाल होता है। ये खराब होने के बाद रिसाइकल नहीं होते हैं। इससे भूमि, जल और मानव स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। एलईडी सुरक्षित है। इसके उपयोग के प्रति जागरुक होना होगा।
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आईआईटी कानपुर के प्रो अंजन कुमार गुप्ता ने ग्रैफीन की तकनीक पर चर्चा करते हुए कहा कि इस तकनीक के इस्तेमाल से कंप्यूटर का आकार-प्रकार पूरी तरह बदल जाएगा। इस तकनीक के मेमोरी डिवाइस बेहतर और छोटी होगी। आर्यभट्ट सभागार में आईआईटी दिल्ली के प्रो. नीरज खरे ने कहा कि नैनो कंपोजिट की मदद से हरित ऊर्जा उत्पन्न की जा सकती है। कुलपति प्रो राजाराम यादव ने अतिथियों स्वागत किया। सम्मेलन के चेयरमैन प्रो बीबी तिवारी ने गतिविधियों का समन्वय किया। सम्मेलन में छह सत्रों में महाराष्ट्र के डॉ.एनआर पवार, एमिटी विश्वविद्यालय नोएडा के आशीष माथुर, प्रो.वंदना राय, सीआईपीडी लखनऊ केएन पांडेय, डॉ.केपी थापा, राष्ट्रीय भौतिकी प्रयोगशाला के डॉ.युधिष्ठिर कुमार यादव, महावीर सिंह आदि ने व्याख्यान दिया। इस दौरान प्रो.विक्रम कुमार, प्रो.विलास तभाने, डॉ.अर्चना, कुलसचिव सुजीत कुमार जायसवाल, डॉ प्रमोद यादव, संयोजक डॉ गिरिधर मिश्र, डॉ पुनीत धवन, डॉ देवराज सिंह, डॉ मनोज मिश्र, डॉ दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ सुनील कुमार, राकेश यादव, डॉ अनिल यादव, डॉ मनीष गुप्ता, डॉ श्याम कन्हैया आदि मौजूद रहे।
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पोस्टर के माध्यम से दी प्रस्तुति
जौनपुर। अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन 32 प्रतिभागियों ने पोस्टर के माध्यम से अपना शोध प्रदर्शित किया। विशेषज्ञों से विभिन्न सवाल भी पूछे। प्रदर्शनी में बीएचयू की मोनिका ने ऑप्टिकल गुण पर अपने शोध को प्रस्तुत किया। प्रयागराज विवि के एके वर्मा ने अपशिष्ट पदार्थों से ऊर्जा के निर्माण की विधि समझाई। बुंदेलखंड विवि के विवेक कुमार खरे ने रेल पटरी के टूटने के गहन अध्ययन पर पोस्टर लगाया। कानपुर विवि के चारू कांडपाल ने पेय पदार्थों के संरक्षित करने का तरीका बताया।
कैंसर रोग का भी निदान अब संभव
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के रज्जू भैया भौतिक विज्ञान अध्ययन एवं शोध संस्थान में चल रहे तकनीकी सत्र के दूसरे दिन आईटी मुंबई से आए शोधार्थी दुष्यंत कुमार सिंह ने कैंसर रोग के निदान पर आधारित अपना शोध पत्र पढ़ा। उन्होंने बताया कि कैंसर रोगी के जिस पार्ट में इंफेक्शन है। उस पार्ट तक हम हार्ड फेरोमैग्नेटिक मैटेरियल को आवश्यक दवा के साथ मिलाकर वहां तक पहुंचाते हैं। ये मैग्नेटिक फोर्स दवा के साथ उस सेल को हिट करके खत्म कर देता है । इससे कैंसर रोग का निदान बिना दर्द के आसानी से हो रहा है। दूसरा इसका महत्वपूर्ण उपयोग ऑटोमोबाइल क्षेत्र में है। किसी भी कार या मोटरसाइकिल की स्पीड का पता आसानी से लगाया जा सकता है। इसके पहिए में मैग्नेट के माध्यम से किसी भी गाड़ी की स्पीड का पता आसानी से लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष में चंद्रयान से जुड़े सूचनाओं का भी इसके माध्यम से पता लगाया जा सकता है। उनका मानना है कि पूर्वांचल विश्वविद्यालय जैसे ग्रामीण क्षेत्र में इतने महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सेमिनार से पूर्वांचल के लोगों को अपने शोध का गहराई से अध्ययन करने और इसे अपडेट करने में काफी सहायता मिलेगी।