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Jaunpur News: छात्रवृत्ति घोटाले में गाजीपुर के डिग्री कॉलेज की संबद्धता समाप्त

Wed, 25 Feb 2026 12:12 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 25 Feb 2026 12:12 AM IST
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Affiliation of Ghazipur Degree College terminated in scholarship scam
करंजाकला (जौनपुर)। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की बैठक में मंगलवार की शाम अहम निर्णय लेते हुए गाजीपुर जनपद के जखनिया स्थित माता कुसमा देवी गर्ल्स डिग्री कॉलेज की संबद्धता समाप्त कर दी गई। कॉलेज प्रबंधन पर छात्रवृत्ति घोटाले का मामला सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई। वहीं, दूसरी ओर जौनपुर और गाजीपुर के 72 महाविद्यालयों को संबद्धता विस्तार दिया गया। कुलपति सभागार में कुलपति प्रो. वंदना सिंह की अध्यक्षता में आयोजित कार्य परिषद की बैठक में डेढ़ दर्जन से अधिक मामलों पर विचार-विमर्श कर निर्णय लिए गए। बैठक में संकायाध्यक्षों की उच्च स्तरीय जांच समिति की आख्या प्रस्तुत की गई, जिसमें छात्रवृत्ति घोटाले के मामले में माता कुसमा देवी गर्ल्स डिग्री कॉलेज की संबद्धता समाप्त करने की संस्तुति की गई थी। समिति की रिपोर्ट पर सहमति जताते हुए कार्य परिषद ने कॉलेज की संबद्धता समाप्त करने का अंतिम निर्णय लिया। बैठक में जौनपुर और गाजीपुर जनपद के कुल 72 महाविद्यालयों के संबद्धता विस्तार का प्रस्ताव भी रखा गया, जिसे अनुमोदित कर दिया गया। इनमें से जौनपुर के तीन तथा गाजीपुर के 22 महाविद्यालयों को अर्थदंड जमा करने की शर्त पर सशर्त संबद्धता विस्तार देने का निर्णय लिया गया। संबंधित महाविद्यालयों को नियमानुसार निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय परिसर में कार्यरत तीन शिक्षकों को पदोन्नति प्रदान करने पर मुहर लगाई गई। मृतक कर्मचारी शशांक के स्थान पर उनकी पत्नी स्वेच्छा सिंह की नियुक्ति को सहमति प्रदान की गई। 109 कर्मचारियों को एसीपी (एश्योर्ड कॅरिअर प्रोग्रेशन) देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। विश्वविद्यालय में रोस्टर आरक्षण जारी करने का निर्णय भी बैठक में लिया गया। बैठक में सल्तनत बहादुर पीजी कॉलेज के नाम में ‘स्नातकोत्तर’ शब्द जोड़ने के प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई। वहीं कर्मचारी रामसागर, विमला देवी और विनोद कुशवाहा को वेतन भुगतान मुख्य खाते से किए जाने का निर्णय लिया गया। संचालन कुलसचिव केशलाल ने किया। इस अवसर पर परीक्षा नियंत्रक डॉ. विनोद कुमार सिंह, प्रो. रामनारायण, प्रो. राजेश शर्मा, प्रो. प्रमोद यादव, उपकुलसचिव अजीत प्रताप सिंह, बबीता सिंह और सरला देवी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय प्रशासन के इस फैसले को शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और अनुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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