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Jaunpur News: मंझे से प्रधानाचार्य की माैत मामले में परिजनों के साथ आए अधिवक्ता
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जौनपुर। चीनी मांझे से गला कटने से प्रधानाचार्य की मौत मामले में पीड़ित के परिवार के पक्ष में वकील सामने आए। अधिवक्ता विकास तिवारी के नेतृत्व में मांझे पर पूर्ण प्रतिबंध के बाद भी नियमों का उल्लंघन एवं हालिया मौतों के संबंध में शनिवार को डीएम डॉ.दिनेश चंद्र और एसपी डॉ.कौस्तुभ को ज्ञापन सौंपा।
उन्होंने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के 11 जुलाई 2017 के निर्णय का हवाला दिया गया, जिसमें चीनी मंझे, नायलॉन, प्लास्टिक धागे पर पूर्ण प्रतिबंध लगा था। वकीलों ने जिला प्रशासन की कथित लापरवाही पर गंभीर चिंता व्यक्त की, जिसके परिणाम स्वरूप इस वर्ष कई दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें अब तक चार मौतें व दर्जनों घायल होने की घटनाएं शामिल हैं।
विशेष रूप से, दिनांक 11 दिसंबर को शास्त्री ब्रिज पर 40 वर्षीय प्रधानाचार्य संदीप तिवारी की चीनी मांझे से गला कटने से मौत हो गई। दुर्घटना में असामयिक मौत का उल्लेख किया गया। मृतक प्रधानाचार्य संदीप तिवारी के परिवार को प्रशासन की लापरवाही के परिणाम स्वरूप हुई मृत्यु के कारण 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की।
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मांझे का उपयोग एवं बिक्री करने वालों के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज कर जांच तेज की जाए। जन जागरूकता के लिए सार्वजनिक घोषणाएं, पोस्टर एवं मीडिया कैंपेन चलाए जाएं। पूर्व ज्ञापन पर की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट 7 दिनों में उपलब्ध कराई जाए व भविष्य की योजना साझा की जाए। अधिवक्ताओं ने कहा कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उच्च न्यायालय या एनजीटी में याचिका दायर करने को बाध्य होंगे। इस मौके पर अतुल सिंह, आशीष, सुधीर, अंकित यादव, शिवराज यादव आदि उपस्थित रहे।
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उन्होंने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के 11 जुलाई 2017 के निर्णय का हवाला दिया गया, जिसमें चीनी मंझे, नायलॉन, प्लास्टिक धागे पर पूर्ण प्रतिबंध लगा था। वकीलों ने जिला प्रशासन की कथित लापरवाही पर गंभीर चिंता व्यक्त की, जिसके परिणाम स्वरूप इस वर्ष कई दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें अब तक चार मौतें व दर्जनों घायल होने की घटनाएं शामिल हैं।
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विशेष रूप से, दिनांक 11 दिसंबर को शास्त्री ब्रिज पर 40 वर्षीय प्रधानाचार्य संदीप तिवारी की चीनी मांझे से गला कटने से मौत हो गई। दुर्घटना में असामयिक मौत का उल्लेख किया गया। मृतक प्रधानाचार्य संदीप तिवारी के परिवार को प्रशासन की लापरवाही के परिणाम स्वरूप हुई मृत्यु के कारण 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की।
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मांझे का उपयोग एवं बिक्री करने वालों के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज कर जांच तेज की जाए। जन जागरूकता के लिए सार्वजनिक घोषणाएं, पोस्टर एवं मीडिया कैंपेन चलाए जाएं। पूर्व ज्ञापन पर की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट 7 दिनों में उपलब्ध कराई जाए व भविष्य की योजना साझा की जाए। अधिवक्ताओं ने कहा कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उच्च न्यायालय या एनजीटी में याचिका दायर करने को बाध्य होंगे। इस मौके पर अतुल सिंह, आशीष, सुधीर, अंकित यादव, शिवराज यादव आदि उपस्थित रहे।