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आमिर पर परिवाद दर्ज
जौनपुर ब्यूराे
Updated Fri, 27 Nov 2015 12:27 AM IST
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सीजेएम द्वितीय की अदालत ने फिल्म अभिनेता आमिर खान और उनकी पत्नी किरण के खिलाफ राजद्रोह का परिवाद दर्ज करते हुए सुनवाई के लिए सात दिसंबर की तिथि नियत की है।
कोर्ट ने यह कार्रवाई दीवानी न्यायालय के अधिवक्ता हिमांशु श्रीवास्तव के प्रार्थना पत्र पर की है। अधिवक्ता हिमांशु श्रीवास्तव की ओर से कोर्ट को दिए गए प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि 23 नवंबर 2015 को दिल्ली में आयोजित रामनाथ
गोयनका पत्रकारिता पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान फिल्म अभिनेता आमिर खान ने मीडिया के समक्ष वक्तव्य दिया था कि भारत में पिछले छह -सात महीने से असुरक्षा, भय और असहिष्णुता का माहौल है। मेरी पत्नी ने कहा कि बच्चे की
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सुरक्षा को लेकर चिंतित और डरे हैं। अब अन्य देश में बसने का विचार कर रहे हैं। उन्होंने प्रार्थनापत्र में कहा है कि 24 नवंबर 2015 को अन्य अधिवक्ता मित्रों के साथ अपने आवास पर टीवी चैनलों में व अगले दिन समाचार पत्रों में आमिर
खान के इस वक्तव्य को देखा, सुना और पढ़ा। जिससे परिवादी के राष्ट्र प्रेम व धार्मिक भावना को आघात पहुंचा। उनके बयान से देश की एकता, अखंडता क्षीण हुई।
उन्होंने अपने इस वक्तव्य से सरकार के प्रति घृणा पैदा करने का प्रयास किया जो राजद्रोह की श्रेणी में आता है। आमिर खान यह भलीभांति जानते हैं कि वह नामचीन अभिनेता हैं।
उनके बयान को पूरा देश गंभीरता से लेता है। बावजूद इसके भी वे आज भी अपने वक्तव्य पर अडिग हैं। उन्होंने प्रार्थना पत्र में यह भी कहा है कि इसके पूर्व अभिनेता आमिर खान ने पीके फिल्म में भी भगवान शिव को बाथरूम में बंद कर व अन्य दृश्य फिल्माकर परिवादी व देश वासियों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का काम किया था।
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कोर्ट ने यह कार्रवाई दीवानी न्यायालय के अधिवक्ता हिमांशु श्रीवास्तव के प्रार्थना पत्र पर की है। अधिवक्ता हिमांशु श्रीवास्तव की ओर से कोर्ट को दिए गए प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि 23 नवंबर 2015 को दिल्ली में आयोजित रामनाथ
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गोयनका पत्रकारिता पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान फिल्म अभिनेता आमिर खान ने मीडिया के समक्ष वक्तव्य दिया था कि भारत में पिछले छह -सात महीने से असुरक्षा, भय और असहिष्णुता का माहौल है। मेरी पत्नी ने कहा कि बच्चे की
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सुरक्षा को लेकर चिंतित और डरे हैं। अब अन्य देश में बसने का विचार कर रहे हैं। उन्होंने प्रार्थनापत्र में कहा है कि 24 नवंबर 2015 को अन्य अधिवक्ता मित्रों के साथ अपने आवास पर टीवी चैनलों में व अगले दिन समाचार पत्रों में आमिर
खान के इस वक्तव्य को देखा, सुना और पढ़ा। जिससे परिवादी के राष्ट्र प्रेम व धार्मिक भावना को आघात पहुंचा। उनके बयान से देश की एकता, अखंडता क्षीण हुई।
उन्होंने अपने इस वक्तव्य से सरकार के प्रति घृणा पैदा करने का प्रयास किया जो राजद्रोह की श्रेणी में आता है। आमिर खान यह भलीभांति जानते हैं कि वह नामचीन अभिनेता हैं।
उनके बयान को पूरा देश गंभीरता से लेता है। बावजूद इसके भी वे आज भी अपने वक्तव्य पर अडिग हैं। उन्होंने प्रार्थना पत्र में यह भी कहा है कि इसके पूर्व अभिनेता आमिर खान ने पीके फिल्म में भी भगवान शिव को बाथरूम में बंद कर व अन्य दृश्य फिल्माकर परिवादी व देश वासियों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का काम किया था।