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चंद्रघंटा और कूष्मांडा देवी की हुई आराधना
Jaunpur
Updated Fri, 19 Oct 2012 12:00 PM IST
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जौनपुर। शारदीय नवरात्र की हर ओर धूम है। देवी मंदिरोें और पंडालों में मां की आराधना करने वालों का तांता लगा रहता है। घरों और मंदिरों में दुर्गा चालीसा और सप्तशती का पाठ किया जा रहा है। क्वार मास प्रतिपदा शुक्ल पक्ष तिथि से घरोें में कलश स्थापना कर श्रद्धालु मां अंबे की आराधना कर रहे हैं।
बता दें कि इस बार नवरात्र आठ दिन का होने के कारण तृृतीय और चतुर्थ एक ही दिन पड़ा। इसलिए गुुरुवार को देवी मंदिरों, पंडालों में माता चंद्रघंटा और कूष्मांडा का पूजन किया गया। आदि शक्ति मां दुर्गा का तीसरा स्वरूप चंद्रघंटा नाम से प्रसिद्ध है। देव असुर संग्राम में माता ने घंटे के नाद से असुरों का दमन किया था। चंद्रमा शांति का और दमन नाद का प्रतिक है। माता का यह स्वरूप भक्तों को शांति के साथ नाद का संदेश देता है। घंटे की नाद से भक्तों की असुर शक्तियाें से रक्षा करने वाली माता चंद्रघंटा भगवान शिव की ही शक्ति हैं। चतुर्थ कूष्मांडा ईशत हास्य से ब्रह्मांड की रचना करने वाली देवी भगवती का चतुर्थ स्वरूप है। भक्तों को भूख से व्याकुल देख मां ने शाकुंभरी नाम से धरती पर शांक पल्वित किया। यह उदर की देवी हैं और प्रकृति व पर्यावरण की अधिष्ठात्री हैं। मां कुष्मांडा ही तृप्ति व तृष्टि हैं।
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बता दें कि इस बार नवरात्र आठ दिन का होने के कारण तृृतीय और चतुर्थ एक ही दिन पड़ा। इसलिए गुुरुवार को देवी मंदिरों, पंडालों में माता चंद्रघंटा और कूष्मांडा का पूजन किया गया। आदि शक्ति मां दुर्गा का तीसरा स्वरूप चंद्रघंटा नाम से प्रसिद्ध है। देव असुर संग्राम में माता ने घंटे के नाद से असुरों का दमन किया था। चंद्रमा शांति का और दमन नाद का प्रतिक है। माता का यह स्वरूप भक्तों को शांति के साथ नाद का संदेश देता है। घंटे की नाद से भक्तों की असुर शक्तियाें से रक्षा करने वाली माता चंद्रघंटा भगवान शिव की ही शक्ति हैं। चतुर्थ कूष्मांडा ईशत हास्य से ब्रह्मांड की रचना करने वाली देवी भगवती का चतुर्थ स्वरूप है। भक्तों को भूख से व्याकुल देख मां ने शाकुंभरी नाम से धरती पर शांक पल्वित किया। यह उदर की देवी हैं और प्रकृति व पर्यावरण की अधिष्ठात्री हैं। मां कुष्मांडा ही तृप्ति व तृष्टि हैं।
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