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25 लाख की लालच में सवा छह लाख डूबे
Jaunpur
Updated Wed, 09 May 2012 12:00 PM IST
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मल्हनीबाजार। सरायख्वाजा थाने के भदेठी गांव के अब्दुल्लाह का परिवार ठगी का शिकार हो गया। अब्दुल्लाह के मोबाइल फोन पर सात लाख जमा करने पर 25 लाख की लालच दी गई। झांसे में आई अब्दुल्लाह की पत्नी फिरदौस ने इस लालच में पूरे परिवार को शामिल कर लिया। सास, बहू और ननद के जेवर बेच दिए गए। पैसा कम पड़ गया तो अनाज और आलू बिक गया। फिर भी सात लाख का इंतजाम नहीं हो पाया तो पड़ोसियों से कर्ज ले लि या लेकिन 25 लाख नहीं मिला। अब पूरा परिवार एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहा है। यहां तक कि रिश्ते में भी दरार पड़ गई। मामला बहू के तलाक तक पहुंच चुका है।
फर्जी काल के झांसे में आई फिरदौस ने यह जानकारी अपनी सास सितारा, ननद मोहिसना तथा पति अब्दुल्लाह को दी। सभी 25 लाख के सपने देखने लगे। ठग ने पिछले महीने 13 अप्रैल को फोन किया कि सरी निवास के आईसीआईसीआई बैंक खाते में 30 हजार जमा करना है। फिरदौस ने 14 अप्रैल को 30 हजार जमा कर दिया। इसी तरह 17 अप्रैल को एसबीआई के संगीता विश्वास के खाते में 20 हजार, 18 अप्रैल को नवाज के खाते में 30 हजार, 19 को भी नवाज के ही खाते में 30 हजार, 20 अप्रैल को अब्दुल रसीद के खाते में 49 हजार और रंजीत बाबू के खाते में 46 हजार रुपया आईसीआईसीआई बैंक खाते में जमा किया गया। 21 अप्रैल को एसबीआई मेन ब्रांच में आरएम डीबी, तिहरान, सबीहा और कोमल आवेदी के खाते में 25-25 हजार रुपये जमा किए गए। एक ही दिन में इस परिवार ने एक लाख रुपये चार खातों में जमा कराए। 23 अप्रैल को आईसीआईसीआई बैंक में अग्दुल रसीद और मो. फैसल के नाम पर 49-49 हजार रुपये जमा कराए। इशी शाखा में 24 अप्रैल को सरे निवासी और रंजीत बाबू के खाते में फिर 49-49 हजार रुपये जमा कराए। 25 अप्रैल को तीन बार उमर एम और नवाज के खाते में 49 हजार तथा रसेल लखानी के खाते में छह हजार जमा कराए। इतने रुपये जमा करने पूरा परिवार कंगाल हो गया। सास, बहू और ननद ने जेवर बेच दिए। यहां तक कि गेहूं भी बेचा गया। फिर भी रकम का इंतजाम नहीं हो पाया तो आलू भी औने पौने दाम में बेच दिया गया। पैसे तय सीमा तक नहीं पहुंचे तो पड़ोसियों से कर्ज ले लिया। पड़ोसियों को बताया गया कि उन्हें ब्याज के साथ वापस किया जाएगा। चूंकि इस परिवार को उम्मीद थी कि 25 लाख मिल जाएंगे तो सभी संकट कट जाएंगे। कर्ज भी वापस हो जाएगा और जेवरात भी नए बन जाएंगे। अनाज और दूसरे खाद्य पदार्थ बाजार से फिर खरीद लिए जाएंगे। फिरदौस के मुताबिक अब तक 6.30 लाख रुपये जमा हो चुके हैं। उसके नंबर पर अभी भी फोन आ रहा है। एक लाख जमा करके 25 लाख रुपये प्राप्त करें। फोन करने वाला व्यक्ति किसी और से नहीं बल्कि महिलाओं से ही बात करना चाहता है। अब इस परिवार को समझ में आया कि वह तो ठगी का शिकार हो गया। जमा रसीदों के साथ बैंकों के चक्कर लगा रहा है। बैंक भी किसी तरह की मदद को तैयार नहीं है। बैंक अफसरों का कहना है कि वह केवल खाता डिटेल ही दे सकते हैं। खाताधारक की जांच करना पुलिस का काम है।
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फर्जी काल के झांसे में आई फिरदौस ने यह जानकारी अपनी सास सितारा, ननद मोहिसना तथा पति अब्दुल्लाह को दी। सभी 25 लाख के सपने देखने लगे। ठग ने पिछले महीने 13 अप्रैल को फोन किया कि सरी निवास के आईसीआईसीआई बैंक खाते में 30 हजार जमा करना है। फिरदौस ने 14 अप्रैल को 30 हजार जमा कर दिया। इसी तरह 17 अप्रैल को एसबीआई के संगीता विश्वास के खाते में 20 हजार, 18 अप्रैल को नवाज के खाते में 30 हजार, 19 को भी नवाज के ही खाते में 30 हजार, 20 अप्रैल को अब्दुल रसीद के खाते में 49 हजार और रंजीत बाबू के खाते में 46 हजार रुपया आईसीआईसीआई बैंक खाते में जमा किया गया। 21 अप्रैल को एसबीआई मेन ब्रांच में आरएम डीबी, तिहरान, सबीहा और कोमल आवेदी के खाते में 25-25 हजार रुपये जमा किए गए। एक ही दिन में इस परिवार ने एक लाख रुपये चार खातों में जमा कराए। 23 अप्रैल को आईसीआईसीआई बैंक में अग्दुल रसीद और मो. फैसल के नाम पर 49-49 हजार रुपये जमा कराए। इशी शाखा में 24 अप्रैल को सरे निवासी और रंजीत बाबू के खाते में फिर 49-49 हजार रुपये जमा कराए। 25 अप्रैल को तीन बार उमर एम और नवाज के खाते में 49 हजार तथा रसेल लखानी के खाते में छह हजार जमा कराए। इतने रुपये जमा करने पूरा परिवार कंगाल हो गया। सास, बहू और ननद ने जेवर बेच दिए। यहां तक कि गेहूं भी बेचा गया। फिर भी रकम का इंतजाम नहीं हो पाया तो आलू भी औने पौने दाम में बेच दिया गया। पैसे तय सीमा तक नहीं पहुंचे तो पड़ोसियों से कर्ज ले लिया। पड़ोसियों को बताया गया कि उन्हें ब्याज के साथ वापस किया जाएगा। चूंकि इस परिवार को उम्मीद थी कि 25 लाख मिल जाएंगे तो सभी संकट कट जाएंगे। कर्ज भी वापस हो जाएगा और जेवरात भी नए बन जाएंगे। अनाज और दूसरे खाद्य पदार्थ बाजार से फिर खरीद लिए जाएंगे। फिरदौस के मुताबिक अब तक 6.30 लाख रुपये जमा हो चुके हैं। उसके नंबर पर अभी भी फोन आ रहा है। एक लाख जमा करके 25 लाख रुपये प्राप्त करें। फोन करने वाला व्यक्ति किसी और से नहीं बल्कि महिलाओं से ही बात करना चाहता है। अब इस परिवार को समझ में आया कि वह तो ठगी का शिकार हो गया। जमा रसीदों के साथ बैंकों के चक्कर लगा रहा है। बैंक भी किसी तरह की मदद को तैयार नहीं है। बैंक अफसरों का कहना है कि वह केवल खाता डिटेल ही दे सकते हैं। खाताधारक की जांच करना पुलिस का काम है।
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