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पुलिस और सेवाकेंद्र के बीच झूल रहे पासपोर्ट आवेदक
Jaunpur
Updated Mon, 09 Jun 2014 05:31 AM IST
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जौनपुर। पासपोर्ट सेवा केंद्रों के माध्यम से महीने भर के भीतर पासपोर्ट उपलब्ध कराने का दावा खोखला साबित हो रहा है। महीने भर की बात तो दूर आवेदन के 10 महीने बाद पासपोर्ट नहीं मिला। जिले में एक दो नहीं ऐसे कई उदाहरण हैं, जो आवेदन के बाद महीनों से पासपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।
पासपोर्ट बनाने की नई प्रक्रिया के तहत स्थापित पासपोर्ट सेवा केंद्रों के माध्यम से पूरी प्रक्रिया को आसान बनाने का दावा किया गया था। नई व्यवस्था के तहत तीन से सात दिन के भीतर ही पासपोर्ट उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इसके तहत तत्काल पासपोर्ट जो अमूमन सात से तीस दिन में मिलता था, उसे एक दिन में ही देने का दावा किया गया था, लेकिन, सरकार के ये सभी दावे खोखले साबित हो रहे हैं। बरसठी थाना क्षेत्र के हरीपुर गांव निवासी जयप्रकाश पटेल ने सात सितंबर 2013 को आवेदन किया था। नवंबर 2013 में उनके आवेदन पर सभी रिपोर्ट भी लग गई, लेकिन उनकी फाइल मौजूदा समय में कहां है इसका पता ही नहीं चल रहा है। जयप्रकाश ने एसपी को प्रार्थना पत्र देकर यह बताए जाने की मांग की है कि उनके पासपोर्ट के आवेदन की रिपोर्ट उनके कार्यालय में कब आई और कब यहां से आगे बढ़ाई गई। बक्शा थाना क्षेत्र के बाबूपुर निवासी सरोज कुमार ने 25 फरवरी को आवेदन किया था। 14 मार्च को क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय से रिपोर्ट एसपी जौनपुर कार्यालय भेजी गई। यहां एसपी आफिस से पता चला कि अभी रिपोर्ट ही नहीं आई है। पिछले दो महीने से वह क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय और एसपी कार्यालय में आठ बार चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन फाइल कहां है पता नहीं चल रहा है। पासपोर्ट के लिए परेशान आवेदकों के ये चंद उदाहरण भर हैं। ऐसे लोगों की संख्या सैकड़ों में है जो आवेदन के बाद महीनों से पासपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।
इनसेट
आनलाइन आवेदन के डेढ़ माह बाद मिलती है डेट
जौनपुर। पासपोर्ट सेवा केंद्र की प्रक्रिया कितनी जटिल हो गई है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आनलाइन आवेदन के बाद पंजीकरण के लिए कम से कम डेढ़ माह का इंतजार करना होता है। वजह यह कि वाराणसी पासपोर्ट सेवा केंद्र के पास प्रतिदिन सिर्फ 450 पंजीकरण का कोटा है। वाराणसी सेवा केंद्र से चंदौली, मिर्जापुर, जौनपुर, गाजीपुर, सोनभद्र, आजमगढ़, वाराणसी, भदोही, मऊ, और बलिया जनपद को संबद्ध किया गया है। ऐसे में 450 के सापेक्ष प्रतिदिन इन जिलों से करीब छह से सात हजार लोग आनलाइन आवेदन करते हैं।
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पासपोर्ट बनाने की नई प्रक्रिया के तहत स्थापित पासपोर्ट सेवा केंद्रों के माध्यम से पूरी प्रक्रिया को आसान बनाने का दावा किया गया था। नई व्यवस्था के तहत तीन से सात दिन के भीतर ही पासपोर्ट उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इसके तहत तत्काल पासपोर्ट जो अमूमन सात से तीस दिन में मिलता था, उसे एक दिन में ही देने का दावा किया गया था, लेकिन, सरकार के ये सभी दावे खोखले साबित हो रहे हैं। बरसठी थाना क्षेत्र के हरीपुर गांव निवासी जयप्रकाश पटेल ने सात सितंबर 2013 को आवेदन किया था। नवंबर 2013 में उनके आवेदन पर सभी रिपोर्ट भी लग गई, लेकिन उनकी फाइल मौजूदा समय में कहां है इसका पता ही नहीं चल रहा है। जयप्रकाश ने एसपी को प्रार्थना पत्र देकर यह बताए जाने की मांग की है कि उनके पासपोर्ट के आवेदन की रिपोर्ट उनके कार्यालय में कब आई और कब यहां से आगे बढ़ाई गई। बक्शा थाना क्षेत्र के बाबूपुर निवासी सरोज कुमार ने 25 फरवरी को आवेदन किया था। 14 मार्च को क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय से रिपोर्ट एसपी जौनपुर कार्यालय भेजी गई। यहां एसपी आफिस से पता चला कि अभी रिपोर्ट ही नहीं आई है। पिछले दो महीने से वह क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय और एसपी कार्यालय में आठ बार चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन फाइल कहां है पता नहीं चल रहा है। पासपोर्ट के लिए परेशान आवेदकों के ये चंद उदाहरण भर हैं। ऐसे लोगों की संख्या सैकड़ों में है जो आवेदन के बाद महीनों से पासपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।
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आनलाइन आवेदन के डेढ़ माह बाद मिलती है डेट
जौनपुर। पासपोर्ट सेवा केंद्र की प्रक्रिया कितनी जटिल हो गई है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आनलाइन आवेदन के बाद पंजीकरण के लिए कम से कम डेढ़ माह का इंतजार करना होता है। वजह यह कि वाराणसी पासपोर्ट सेवा केंद्र के पास प्रतिदिन सिर्फ 450 पंजीकरण का कोटा है। वाराणसी सेवा केंद्र से चंदौली, मिर्जापुर, जौनपुर, गाजीपुर, सोनभद्र, आजमगढ़, वाराणसी, भदोही, मऊ, और बलिया जनपद को संबद्ध किया गया है। ऐसे में 450 के सापेक्ष प्रतिदिन इन जिलों से करीब छह से सात हजार लोग आनलाइन आवेदन करते हैं।
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