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चिंतन से केंद्रित होता है ज्ञान
Jaunpur
Updated Sun, 23 Mar 2014 05:31 AM IST
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जौनपुर। काशी हिंदू विश्वविद्यालय सूचना विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. वाईपी दुबे ने कहा कि चिंतन करने से ज्ञान केंद्रित होता है। किताबों से जुड़ने और पढ़ने से नई जानकारियां मिलती हैं। वह शुक्रवार को वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद केंद्रीय पुस्तकालय में आयोजित दो दिवसीय पुस्तक प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि इंटरनेट के माध्यम से किताबों की उपलब्धता आसान हो गई है। पढ़ने वालों के लिए सामग्री की कोई कमी नहीं है। वर्तमान परिवेश में ऐसी शिक्षा व्यवस्था बनाने की जरूरत है, जो समाज की आवश्यकता की पूर्ति करे और युवाओं को नई दिशा दे। कुलपति प्रो. पीयूष रंजन अग्रवाल ने कहा कि नई पीढ़ी में बेशक ज्ञान की वृद्धि हुई है, लेकिन, इसके साथ ही नुकसान भी हुआ है। नई पीढ़ी में विवेक और संस्कार खत्म होता जा रहा है। पढ़ाई के दबाव में सामाजिक सरोकार से युवा पीढ़ी दूर होती जा रही है। विषय के अतिरिक्त अध्ययन व्यक्तित्व विकास के लिए जरूरी है। पुस्तकालयाध्यक्ष प्रो. डीडी दुबे ने प्रदर्शनी के विभिन्न आयामों पर विस्तार ने प्रकाश डाला। इससे पहले कुलपति ने मुख्य अतिथि के साथ पुस्तक प्रदर्शनी में लगाए गए स्टालों का निरीक्षण किया। विज्ञान संकाय के अध्यक्ष डा. वीके सिंह ने अतिथियों का परिचय कराया। प्रो. रामजी लाल ने आभार जताया। संचालन डा. एचसी पुरोहित ने किया। इस मौके पर वित्त अधिकारी अमरचंद, डा. अजय द्विवेदी, डा. विद्युत मल, डा. इंद्रेश कुमार, अवेधश प्रसाद ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया। कार्यक्रम में प्रो. बीबी तिवारी, डा. एके श्रीवास्तव, डा. एसके सिन्हा, डा. मानस पांडेय, डा. रामनारायण, डा. संदीप सिंह, डा. राजेश कुमार, डा. अवध बिहारी सिंह, डा. दिग्विजय सिंह राठौर आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि इंटरनेट के माध्यम से किताबों की उपलब्धता आसान हो गई है। पढ़ने वालों के लिए सामग्री की कोई कमी नहीं है। वर्तमान परिवेश में ऐसी शिक्षा व्यवस्था बनाने की जरूरत है, जो समाज की आवश्यकता की पूर्ति करे और युवाओं को नई दिशा दे। कुलपति प्रो. पीयूष रंजन अग्रवाल ने कहा कि नई पीढ़ी में बेशक ज्ञान की वृद्धि हुई है, लेकिन, इसके साथ ही नुकसान भी हुआ है। नई पीढ़ी में विवेक और संस्कार खत्म होता जा रहा है। पढ़ाई के दबाव में सामाजिक सरोकार से युवा पीढ़ी दूर होती जा रही है। विषय के अतिरिक्त अध्ययन व्यक्तित्व विकास के लिए जरूरी है। पुस्तकालयाध्यक्ष प्रो. डीडी दुबे ने प्रदर्शनी के विभिन्न आयामों पर विस्तार ने प्रकाश डाला। इससे पहले कुलपति ने मुख्य अतिथि के साथ पुस्तक प्रदर्शनी में लगाए गए स्टालों का निरीक्षण किया। विज्ञान संकाय के अध्यक्ष डा. वीके सिंह ने अतिथियों का परिचय कराया। प्रो. रामजी लाल ने आभार जताया। संचालन डा. एचसी पुरोहित ने किया। इस मौके पर वित्त अधिकारी अमरचंद, डा. अजय द्विवेदी, डा. विद्युत मल, डा. इंद्रेश कुमार, अवेधश प्रसाद ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया। कार्यक्रम में प्रो. बीबी तिवारी, डा. एके श्रीवास्तव, डा. एसके सिन्हा, डा. मानस पांडेय, डा. रामनारायण, डा. संदीप सिंह, डा. राजेश कुमार, डा. अवध बिहारी सिंह, डा. दिग्विजय सिंह राठौर आदि मौजूद रहे।
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