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फिजा में गूंजी या हुसैन की सदा
Jaunpur
Updated Sat, 16 Nov 2013 05:41 AM IST
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जौनपुर। इमाम हुसैन और उनके 71 साथियों की शहादत पर चारो ओर या हुसैन की सदा गूंज उठी। नौवीं मुहर्रम और चांद रात को घरों और इमाम चौक पर रखे गए ताजियों को शहर के लोगों ने सदर इमामबाड़ा स्थित करबला में दफन किया। सुबह से शुरू हुआ ताजिया दफन करने का सिलसिला शाम तक चलता रहा। मातमी अंजुमनों, ताजियादारों ने नौहा मातम करके शहीदों को पुरसा दिया। ताजियादारों और अंजुमनों ने खंजर से मातम किया।
शाम को सदर इमामबाड़ा स्थित करबला में शामे गरीबा की मजलिस हुई। मजलिस में सोजखानी मोहम्मद जाफर तथा उनके साथियों ने पढ़ी। मजलिस में मौलाना कैसर नवाब ने कहा कि इमाम हुसैन ने करबला पहुंचने से पहले यजीदी लश्कर के साथ-साथ उनके जानवरों को भी पानी पिलाया था। वही इमाम हुसैन और उनके 71 साथियों को यजीदी फौज द्वारा प्यासा कत्ल कर दिया गया। अगर इमाम हुसैन करबला पहुंचने से पहले यजीदी फौज को पानी न पिलाते तो शायद इमाम के बच्चे प्यासे न रहते। इमाम हुसैन ने यजीदी लश्कर को पानी पिलाकर ये बता दिया कि हम इंसानियत को बचाने आए हैं। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन और उनके कुनबे पर सात मुहर्रम से पानी बंद कर दिया गया। अब इमाम हुसैन और उनके कुनबे को दरियाए फोरात से पानी लेने की इजाजत नहीं है। खैमों में सिर्फ चंद मश्क में ही पानी बचा था। खैमों में जब पानी पूरी तरह से खत्म हो गया तो इमाम के बच्चे प्यासे निढ़ाल हो गए। खैमों से हाय-प्यास हाय -प्यास की सदा गूंजने लगी। मौलाना द्वारा पढ़े गए मसाएब को सुनते ही वहां मौजूद लोग सर सीने पर हाथ मार कर रोने लगे। इसके पहले पुरानी बाजार स्थित दालान के इमामबाड़े से अलम ताजिया का जुलूस निकला। जुलूस में छतरीघाट इमामबाड़े की ताजिया और मीरु सैयद का ताजिया एक साथ होकर सदर इमामबाड़ा जाकर दफन किया गया। छतरीघाट का जुलूस मिसिरपुर, पांचों शिवाला होता हुआ पहुंचा। सदरचुंगी स्थित शेख बकरीदू की मस्जिद से अलम, जुलजनाह और ताजिए का जुलूस निकला। जुलूस अंजुमन के साथ जुलूस कोतवाली चौराहा पहुंचा। यहां पर एक तकरीर हुई। तकरीर को डा. कमर अब्बास ने खेताब किया। जुलूस अपने कदीमी रास्तों नवाब यूसुफ रोड, बड़ी मस्जिद, पुरानी बाजार, होता हुआ सदर इमामबाड़े में जाकर खत्म हुआ। मखदूम शाह अढ़न स्थित पुरानी मेंहदी के इमामबाड़े से अलम और सैकड़ों ताजिए का जुलूस निकला। जुलूस में अंजुमन जाफरी मखदूमशाह अढ़न ने नौहा मातम किया। जुलूस कल्लू खां के इमामबाड़े, हमाम दरवाजा, नासिरया, बारादुअरिया होता हुआ सदर इमामबाड़े जाकर खत्म हुआ। अंजुमन कौसरिया का जुलूस शहर के रिजवी खां मोहल्ले से उठा। जुलूस में शामिल लोग सीनाजनी करते हुए सदर इमामबाड़ा पहुंचे। यहां करबला में ताजिया दफन किया गया। मातमी जुलूस में इरशाद हैदर, कैसर, फिरोज, अली अब्बा, इकबाल हुसैन, तबरेज हसन, रिजवान हैदर, तहजीबुल हसन, शहंशाह हुसैन, अब्दुल हसन, सरताज हुसैन, सिब्ते हुसैन, अली इमाम आदि शामिल हुए। बदलापुर में ताजिया चंदन शहीद मार्ग स्थित करबला में दफन किया गया।
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शाम को सदर इमामबाड़ा स्थित करबला में शामे गरीबा की मजलिस हुई। मजलिस में सोजखानी मोहम्मद जाफर तथा उनके साथियों ने पढ़ी। मजलिस में मौलाना कैसर नवाब ने कहा कि इमाम हुसैन ने करबला पहुंचने से पहले यजीदी लश्कर के साथ-साथ उनके जानवरों को भी पानी पिलाया था। वही इमाम हुसैन और उनके 71 साथियों को यजीदी फौज द्वारा प्यासा कत्ल कर दिया गया। अगर इमाम हुसैन करबला पहुंचने से पहले यजीदी फौज को पानी न पिलाते तो शायद इमाम के बच्चे प्यासे न रहते। इमाम हुसैन ने यजीदी लश्कर को पानी पिलाकर ये बता दिया कि हम इंसानियत को बचाने आए हैं। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन और उनके कुनबे पर सात मुहर्रम से पानी बंद कर दिया गया। अब इमाम हुसैन और उनके कुनबे को दरियाए फोरात से पानी लेने की इजाजत नहीं है। खैमों में सिर्फ चंद मश्क में ही पानी बचा था। खैमों में जब पानी पूरी तरह से खत्म हो गया तो इमाम के बच्चे प्यासे निढ़ाल हो गए। खैमों से हाय-प्यास हाय -प्यास की सदा गूंजने लगी। मौलाना द्वारा पढ़े गए मसाएब को सुनते ही वहां मौजूद लोग सर सीने पर हाथ मार कर रोने लगे। इसके पहले पुरानी बाजार स्थित दालान के इमामबाड़े से अलम ताजिया का जुलूस निकला। जुलूस में छतरीघाट इमामबाड़े की ताजिया और मीरु सैयद का ताजिया एक साथ होकर सदर इमामबाड़ा जाकर दफन किया गया। छतरीघाट का जुलूस मिसिरपुर, पांचों शिवाला होता हुआ पहुंचा। सदरचुंगी स्थित शेख बकरीदू की मस्जिद से अलम, जुलजनाह और ताजिए का जुलूस निकला। जुलूस अंजुमन के साथ जुलूस कोतवाली चौराहा पहुंचा। यहां पर एक तकरीर हुई। तकरीर को डा. कमर अब्बास ने खेताब किया। जुलूस अपने कदीमी रास्तों नवाब यूसुफ रोड, बड़ी मस्जिद, पुरानी बाजार, होता हुआ सदर इमामबाड़े में जाकर खत्म हुआ। मखदूम शाह अढ़न स्थित पुरानी मेंहदी के इमामबाड़े से अलम और सैकड़ों ताजिए का जुलूस निकला। जुलूस में अंजुमन जाफरी मखदूमशाह अढ़न ने नौहा मातम किया। जुलूस कल्लू खां के इमामबाड़े, हमाम दरवाजा, नासिरया, बारादुअरिया होता हुआ सदर इमामबाड़े जाकर खत्म हुआ। अंजुमन कौसरिया का जुलूस शहर के रिजवी खां मोहल्ले से उठा। जुलूस में शामिल लोग सीनाजनी करते हुए सदर इमामबाड़ा पहुंचे। यहां करबला में ताजिया दफन किया गया। मातमी जुलूस में इरशाद हैदर, कैसर, फिरोज, अली अब्बा, इकबाल हुसैन, तबरेज हसन, रिजवान हैदर, तहजीबुल हसन, शहंशाह हुसैन, अब्दुल हसन, सरताज हुसैन, सिब्ते हुसैन, अली इमाम आदि शामिल हुए। बदलापुर में ताजिया चंदन शहीद मार्ग स्थित करबला में दफन किया गया।
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