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रिश्वत दो तो काम बने टूटा कुल्हड़ जाम बने...
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जौनपुर। गणतंत्र दिवस पर कृष्णकांत एकलव्य की स्मृति में ब्यूरो किड्स स्कूल रुहट्टा के प्रांगण में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। अकिल जौनपुरी ने रिश्वत दो तो काम बने टूटा कुल्हड़ जाम बने सुनाकर खूब वाहवाही लूटी।
शुभारंभ अध्यक्ष सभाजीत द्विवेदी प्रखर एंव मुख्य अतिथि डा. पीसी विश्वकर्मा व विशिष्ट अतिथि जनार्दन प्रसाद अस्थाना ने सरस्वती पूजन व माल्यार्पण कर किया। अनिल उपाध्याय एकलव्य की याद में कविता सुनाई। रामजीत मिश्रा ने सियासत ने किया है गर्क बेेड़ा देखिए साहब, नहीं बाकी कोई जिसको छेड़ा देखिए साहब सुनाकर राजनीति पर तंज कसा। असिम मछलीशहरी ने अब मै तुम्हारे हुश्न की किससे मिशाल दूं एक चांद था जो शर्म से बादल में छुप गया, मन के अंदर बैठ के कोई जैसे मुझको लूट रहा है। कुछ मुट्ठी से छूट रहा है सुनाया। गिरिश कुमार गिरिश ने आन लिख दो एक स्वर हैएक लक्ष्य व एक हिंदुस्तान लिख दो सुनाया। डा.प्रेमचंद्र विश्वकर्मा ने कत्ल गह जाग उठे और जनार्दन प्रसाद अष्ठाना की रचना को खूब सराहा गया। इसी क्रम में कंबत जौनपुरी, विभा तिवारी, प्रमोद वाचस्पति,फूलचंद भारती,आशुतोष पाल, रुपेश कुमार आदि ने अपनी -अपनी रखनाएं सुनाकर लोगों को झुमने पर विवश कर दिया। कार्यक्रम कर संचालन प्रोफेसर डा.आरएन सिंह ने किया। समशेर बहादुर, केके दूबे, इंद्रजीत मौर्य, रामचंदर, सुरेश सोनकर, नीलकंठ सिंह आदि उपस्थित रहे।
शुभारंभ अध्यक्ष सभाजीत द्विवेदी प्रखर एंव मुख्य अतिथि डा. पीसी विश्वकर्मा व विशिष्ट अतिथि जनार्दन प्रसाद अस्थाना ने सरस्वती पूजन व माल्यार्पण कर किया। अनिल उपाध्याय एकलव्य की याद में कविता सुनाई। रामजीत मिश्रा ने सियासत ने किया है गर्क बेेड़ा देखिए साहब, नहीं बाकी कोई जिसको छेड़ा देखिए साहब सुनाकर राजनीति पर तंज कसा। असिम मछलीशहरी ने अब मै तुम्हारे हुश्न की किससे मिशाल दूं एक चांद था जो शर्म से बादल में छुप गया, मन के अंदर बैठ के कोई जैसे मुझको लूट रहा है। कुछ मुट्ठी से छूट रहा है सुनाया। गिरिश कुमार गिरिश ने आन लिख दो एक स्वर हैएक लक्ष्य व एक हिंदुस्तान लिख दो सुनाया। डा.प्रेमचंद्र विश्वकर्मा ने कत्ल गह जाग उठे और जनार्दन प्रसाद अष्ठाना की रचना को खूब सराहा गया। इसी क्रम में कंबत जौनपुरी, विभा तिवारी, प्रमोद वाचस्पति,फूलचंद भारती,आशुतोष पाल, रुपेश कुमार आदि ने अपनी -अपनी रखनाएं सुनाकर लोगों को झुमने पर विवश कर दिया। कार्यक्रम कर संचालन प्रोफेसर डा.आरएन सिंह ने किया। समशेर बहादुर, केके दूबे, इंद्रजीत मौर्य, रामचंदर, सुरेश सोनकर, नीलकंठ सिंह आदि उपस्थित रहे।
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