जौनपुर। नौपेड़वा क्षेत्र के चुरावनपुर गांव में श्री द्वारिकाधीश लोक संस्कृति एवं वानस्पतिकी विकास संस्थान की ओर से लोक संगीत समारोह का आयोजन किया गया। देर रात तक चले इस फागुनी धमाल में श्रोता चैता, चहका और चौताल गीतों पर झूमते रहे। फागुनी गीतों के विविध गायन में पंडित श्रीपति उपाध्याय, लोक गायक प्रज्ञा चक्षु बजरंगी सिंह, सत्यनाथ पांडेय, झीनू दूबे, रामआसरे तिवारी, गुलाम अली, भुट्टे अली, कैलाश शुक्ल, नजरू उस्ताद, लक्ष्मी उपाध्याय, कृष्णानंद उपाध्याय सहित साथियों ने ‘विंध्याचल सांकर खोरी रे भगवती’, ‘घरवन में गौरैया चहचहानी हो रामा पिया नही आए’, ‘सखियां सहेलियां भइली लरिकैया पिया नहीं आये झुप झुपवन बहे बयार’, ‘रात सेजिया पे मोर झुलनी हेरानी बलमुआ’, ‘ना देबे कजरवा तोहके तू मरबे केहू के जान रे’ और ‘झुलनी करि कोर कटार जुलुम करि डारे’ जैसे फागुनी गीतों को सुना कर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। संस्थान के अध्यक्ष डॉ. मनोज मिश्र ने कहा कि आज होली के नाम पर परंपरागत लोक गीतों के स्थान पर अश्लील गीतों का प्रदर्शन हो रहा है। संस्थान का प्रयास है कि यह परंपरा विलुप्त न होने पाए। लोक गायकों को रविशंकर मिश्र एवं डा. सुभाष चंद्र शुक्ल द्वारा अंगवस्त्रम प्रदान कर सम्मानित किया गया। समारोह का संचालन पंडित श्रीपति उपाध्याय एवं धन्यवाद ज्ञापन ओंकार मिश्र ने किया।