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राज्य सूचना कार्यालय में लंबित हैं 48 हजार मामले
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जन सूचना अधिकार अधिनियम जानकारी के अभाव में परवान नहीं चढ़ पा रही है। इस अधिनियम की पूरी जानकारी न तो कई आवेदन करने वालों को होती है और न ही कई जन सूचना अधिकारी को ही होती है। जिससे सूचना मांगने वाले लोगों को समय से रिपोर्ट नहीं मिल पाती है । जिसके कारण राज्य जन सूचना कार्यालय में अभी भी 48 हजार आवेदन लंबित है। उक्त बातें राज्य सूचना आयुक्त सुभाषचंद्र सिंह ने मंगलवार को विकास भवन सभागार में पत्रकारों से कहीं।
उन्होंने कहा कि जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत सूचना मांगने वाले व्यक्ति को 30 दिन के भीतर सूचना देने का नियम है। जन सूचना अधिकारी को इसका पालन करना जरूरी है। ऐसा नहीं करने वाले जन सूचना अधिकारी को दंडित करने का प्राविधान है। जन सूचना अधिकारी व प्रथम अपीलीय अधिकारी को किसी भी आवेदन को बेवजह लंबित नहीं रखना चाहिए। उसका नियत समय से निस्तारित करना चाहिए। सूचना तय समय पर नहीं मिलने पर संबंधित व्यक्ति प्रथम अपीलीय अधिकारी को फिर आवेदन करे। वहां से अगर 45 दिन के भीतर सूचना नहीं मिले तो उसे द्वितीय अपीलीय अधिकारी को प्रार्थना पत्र देना चाहिए, जिसके बाद समस्या का निस्तारण कराते हुए संबंधित जन सूचना अधिकारी को दंडित भी किया जाता है। उन्होंने कहा कि जो जन सूचना अधिकारी अगर नियत समय पर सूचना नहीं देता है तो उसके दो कारण हो सकते हैं। पहला उसे आरटीआई के नियमों की जानकारी नहीं है और दूसरा मांगी गई सूचना में भ्रष्टाचार आदि हुआ हो। गलत सूचना देने पर संबंधित जन सूचना अधिकारी की शिकायत प्रथम अपीलीय अधिकारी से करनी होगी, जिसके बाद कोई कार्रवाई नहीं होने पर जन सूचना आयोग में शपथ पत्र के साथ शिकायत करना चाहिए, जिस पर संबंधित जन सूचना अधिकारियों को नोटिस देकर तलब किया जाएगा। गलत सूचना देने का उचित कारण नहीं बताने पर संबंधित जन सूचना अधिकारी के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराया जा सकता है।
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उन्होंने कहा कि जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत सूचना मांगने वाले व्यक्ति को 30 दिन के भीतर सूचना देने का नियम है। जन सूचना अधिकारी को इसका पालन करना जरूरी है। ऐसा नहीं करने वाले जन सूचना अधिकारी को दंडित करने का प्राविधान है। जन सूचना अधिकारी व प्रथम अपीलीय अधिकारी को किसी भी आवेदन को बेवजह लंबित नहीं रखना चाहिए। उसका नियत समय से निस्तारित करना चाहिए। सूचना तय समय पर नहीं मिलने पर संबंधित व्यक्ति प्रथम अपीलीय अधिकारी को फिर आवेदन करे। वहां से अगर 45 दिन के भीतर सूचना नहीं मिले तो उसे द्वितीय अपीलीय अधिकारी को प्रार्थना पत्र देना चाहिए, जिसके बाद समस्या का निस्तारण कराते हुए संबंधित जन सूचना अधिकारी को दंडित भी किया जाता है। उन्होंने कहा कि जो जन सूचना अधिकारी अगर नियत समय पर सूचना नहीं देता है तो उसके दो कारण हो सकते हैं। पहला उसे आरटीआई के नियमों की जानकारी नहीं है और दूसरा मांगी गई सूचना में भ्रष्टाचार आदि हुआ हो। गलत सूचना देने पर संबंधित जन सूचना अधिकारी की शिकायत प्रथम अपीलीय अधिकारी से करनी होगी, जिसके बाद कोई कार्रवाई नहीं होने पर जन सूचना आयोग में शपथ पत्र के साथ शिकायत करना चाहिए, जिस पर संबंधित जन सूचना अधिकारियों को नोटिस देकर तलब किया जाएगा। गलत सूचना देने का उचित कारण नहीं बताने पर संबंधित जन सूचना अधिकारी के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराया जा सकता है।
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