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लोक लुभावन होगा आम बजट, लोगों को हैं उम्मीदें
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जौनपुर। चुनावी साल होने के कारण इस बार एक फरवरी को पेश होने वाला केंद्रीय बजट राहत देने वाला होगा। ऐसी उम्मीद सहकारी कालोनी स्थित अमर उजाला कार्यालय पर संवाद में नगर के प्रमुख लोगों ने जताई। उनका कहना है कि आयकर में छूट की सीमा बढ़नेे, जीएसटी की दरें घटने की उम्मीद है। नौकरी पेशा, किसानों, महिलाओं, उद्यमियों और कारोबारियों बजट में अबकी काफी राहत मिलेगी।
समाजशास्त्री डा. हरिओम त्रिपाठी ने कहा कि उदारीकरण से हर वर्ग को लाभ नहीं मिला। अबकी सरकार हाशिए पर खड़े लोगों को राहत देने की जरूर सोचेगी। टीडी कालेज अर्थशास्त्र विभाग के प्रो आरएन ओझा का कहना है कि नौकरी पेशा लोगों को बजट से काफी उम्मीदें है। किसान भी राहत चाहते हैं। मगर बजट विकास पर आधारित होगा। समाजशास्त्री डा. मनोज वत्स का कहना है कि सरकार को आयकर दाताओं का दायरा बढ़ाना चाहिए। उनकी संख्या बढ़ने पर आम आदमी को कर से राहत मिलेगी। किसानों को सहकारिता से जोडकर उन्हें लाभ दिया जाना चाहिए। डा.देवमणि दुबे, व्यापारी नेता विक्रम गुप्त, शिक्षक अमित यादव का कहना है कि सरकार को कर दायरे में और राहत देना चाहिए। जीएसटी घटाने के साथ कर दायरे में राहत मिलने से नौकरी पेशा और व्यापारी दोनों को राहत मिलेगी।
आम बजट में कारोबारियों को बहुत उम्मीदें है। खास कर जीएसटी से संबंधित सभी नवीनतम संशोधनों का प्रचार प्रसार जनपद स्तर पर भी हिंदी भाषा में की जानी चाहिएं। ताकि सरल ढंग से कोई भी ग्रामीण अंचल का कारोबारी स्वयं ऑनलाइन जीएसटी रजिस्ट्रेशन और आयकर पंजीकरण करा सकें। ऑनलाइन की व्यवस्था हिंदी में की जाए। जीएसटी निगरानी एवं परामर्श समिति का गठन किया जाए ताकि आम जन और व्यापारी का उत्पीड़न रोका जा सके।
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अमित गुप्ता
कारोबारी
कोट:
नौकरी पेशा लोगों के लिए आयकर का दायरा बढ़ाना चाहिए। इससे नौकरी करने वाले लोगों को राहत मिलेगी। सरकार को चाहिए कि कर में राहत देते हुए कर का और बढ़ाकर कर के बोझ को कम करना चाहिए। छोटे उद्योगों को और बढ़ावा देने की जरूरत है।
डा. विजय कुमार सिंह
-अर्थशास्त्री
कोट:
सरकार को जीएसटी कम करना चाहिए। जीएसटी से छोटे उद्योग प्रभावित हुए हैं। छोटे उद्योगों से रोजगार को बढ़ावा मिलता है। इन्हें आयकर के दायरे में छूट देना चाहिए। आयुष्मान योजना और शिक्षा के क्षेत्र में राहत देने की जरूरत है।
डा.लाल साहब यादवअर्थशास्त्री
कोट:
नौकरी पेशा लोगों को आयकर को लेकर दबाव अधिक हैं। वह कहीं से एक पैसे दबा नहीं सकता है। अधिवक्ता और चिकित्सकों को भी कर के दायरे में लाना चाहिए। बड़े व्यापारी आज भी सामानों की बिक्री पर्ची पर कर रहे हैं। जबकि उन्हें जीएसटी के दायरे में रखा गया है। खासकर महिलाओं को कर में राहस्त्रत्त्त मिलनी चाहिए।
-डा. सरोज सिंह
विभागाध्यक्ष
हिंदी विभाग टीडी कालेज
कोट:
कर का दायरा और बढ़ना चाहिए। अंत्योदय योजना में अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को ध्यान में रखा जाए। बजट ही सरकार के विकास का रोड मैप होता है। आधारभूत ढाचा का होना जरूरी होता है। शिक्षा, सड़क, संचार, ऊर्जा क्षेत्र पर विशेष नजर होनी चाहिए। छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने से रोजगाक के अवसर बढ़ेगें। बाजार को बेहतर तरीके से चलाने के लिए खेती किसानी को प्राथमिकता देनी होगी।
अरुण कुमार सिंह
कारोबारी
कोट -
टैक्स से देश का आर्थिक ढांचा मजबूत होता है। कानून बनाकर टैक्स वसूल करना चाहिए। आयकर के दायरे में थोडी राहत देने की जरूरत है। आम जनता के लिए कर दायरे में विशेष राहत देने की जरूरत है। खेती किसानी को उद्योग का दर्जा देने के साथ बैंकों से ऋण की आसानी से उपलब्धता जरूरी है।
संतोष सिंह
जिलाध्यक्ष
माध्यमिक शिक्षक संघ
समाजशास्त्री डा. हरिओम त्रिपाठी ने कहा कि उदारीकरण से हर वर्ग को लाभ नहीं मिला। अबकी सरकार हाशिए पर खड़े लोगों को राहत देने की जरूर सोचेगी। टीडी कालेज अर्थशास्त्र विभाग के प्रो आरएन ओझा का कहना है कि नौकरी पेशा लोगों को बजट से काफी उम्मीदें है। किसान भी राहत चाहते हैं। मगर बजट विकास पर आधारित होगा। समाजशास्त्री डा. मनोज वत्स का कहना है कि सरकार को आयकर दाताओं का दायरा बढ़ाना चाहिए। उनकी संख्या बढ़ने पर आम आदमी को कर से राहत मिलेगी। किसानों को सहकारिता से जोडकर उन्हें लाभ दिया जाना चाहिए। डा.देवमणि दुबे, व्यापारी नेता विक्रम गुप्त, शिक्षक अमित यादव का कहना है कि सरकार को कर दायरे में और राहत देना चाहिए। जीएसटी घटाने के साथ कर दायरे में राहत मिलने से नौकरी पेशा और व्यापारी दोनों को राहत मिलेगी।
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आम बजट में कारोबारियों को बहुत उम्मीदें है। खास कर जीएसटी से संबंधित सभी नवीनतम संशोधनों का प्रचार प्रसार जनपद स्तर पर भी हिंदी भाषा में की जानी चाहिएं। ताकि सरल ढंग से कोई भी ग्रामीण अंचल का कारोबारी स्वयं ऑनलाइन जीएसटी रजिस्ट्रेशन और आयकर पंजीकरण करा सकें। ऑनलाइन की व्यवस्था हिंदी में की जाए। जीएसटी निगरानी एवं परामर्श समिति का गठन किया जाए ताकि आम जन और व्यापारी का उत्पीड़न रोका जा सके।
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अमित गुप्ता
कारोबारी
कोट:
नौकरी पेशा लोगों के लिए आयकर का दायरा बढ़ाना चाहिए। इससे नौकरी करने वाले लोगों को राहत मिलेगी। सरकार को चाहिए कि कर में राहत देते हुए कर का और बढ़ाकर कर के बोझ को कम करना चाहिए। छोटे उद्योगों को और बढ़ावा देने की जरूरत है।
डा. विजय कुमार सिंह
-अर्थशास्त्री
कोट:
सरकार को जीएसटी कम करना चाहिए। जीएसटी से छोटे उद्योग प्रभावित हुए हैं। छोटे उद्योगों से रोजगार को बढ़ावा मिलता है। इन्हें आयकर के दायरे में छूट देना चाहिए। आयुष्मान योजना और शिक्षा के क्षेत्र में राहत देने की जरूरत है।
डा.लाल साहब यादवअर्थशास्त्री
कोट:
नौकरी पेशा लोगों को आयकर को लेकर दबाव अधिक हैं। वह कहीं से एक पैसे दबा नहीं सकता है। अधिवक्ता और चिकित्सकों को भी कर के दायरे में लाना चाहिए। बड़े व्यापारी आज भी सामानों की बिक्री पर्ची पर कर रहे हैं। जबकि उन्हें जीएसटी के दायरे में रखा गया है। खासकर महिलाओं को कर में राहस्त्रत्त्त मिलनी चाहिए।
-डा. सरोज सिंह
विभागाध्यक्ष
हिंदी विभाग टीडी कालेज
कोट:
कर का दायरा और बढ़ना चाहिए। अंत्योदय योजना में अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को ध्यान में रखा जाए। बजट ही सरकार के विकास का रोड मैप होता है। आधारभूत ढाचा का होना जरूरी होता है। शिक्षा, सड़क, संचार, ऊर्जा क्षेत्र पर विशेष नजर होनी चाहिए। छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने से रोजगाक के अवसर बढ़ेगें। बाजार को बेहतर तरीके से चलाने के लिए खेती किसानी को प्राथमिकता देनी होगी।
अरुण कुमार सिंह
कारोबारी
कोट -
टैक्स से देश का आर्थिक ढांचा मजबूत होता है। कानून बनाकर टैक्स वसूल करना चाहिए। आयकर के दायरे में थोडी राहत देने की जरूरत है। आम जनता के लिए कर दायरे में विशेष राहत देने की जरूरत है। खेती किसानी को उद्योग का दर्जा देने के साथ बैंकों से ऋण की आसानी से उपलब्धता जरूरी है।
संतोष सिंह
जिलाध्यक्ष
माध्यमिक शिक्षक संघ