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सांसद ऐसा हो जो सरकार की योजनाओं को मूर्त रूप दे सके
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जौनपुर। जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है लोकसभा चुनाव की सरगर्मियां बढ़ती जा रही हैं। जनप्रतिनिधियों के वादों और कामों की चर्चा भी होने लगी है। अभी इक्का-दुक्का प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की गई है। ज्यादातर राजनीतिक दलों ने प्रत्याशियों के नामों की घोषणा नहीं की है लेकिन संभावित प्रत्याशियों के नामों पर चर्चाएं होेने लगी हैं। तमाम मतभेदों के बावजूद प्रत्येक मतदाता ईमानदार और क्षेत्र का विकास करने वाला सांसद चुनने की पैरोकारी करता दिख रहा है।
पूर्वांचल विश्वविद्यालय एचआरडी के विभागाध्यक्ष प्रो. अविनाश पाथर्डीकर का कहना है कि हमारा सांसद ऐसा होना चाहिए जो सरकारी योजनाओं को मूर्त दे सके। खासकर शहर को एक स्वच्छ एवं सुंदर बनाने की कार्य योजना को सफल बना सके। देश की दूरगामी नीतियों जिनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, विदेश नीति एवं आधारभूत संरचनाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए दूरदर्शी होना चाहिए।
बीआरसी के समन्वय जितेंद्र पांडेय का कहना है कि हमारा सांसद पढ़ा-लिखा होना चाहिए। उसे संविधान की जानकारी होनी चाहिए। वह जनता के प्रति समर्पित होना चाहिए। निरंतर जनता के संपर्क में रहे। सभी के विकास का भाव रखे। जनभावनाओं को समझे। लोकसभा क्षेत्र में निश्चित अंतराल पर भ्रमण करे। क्षेत्र के विकास का विजन बनाए। जनता के प्रति जवाबदेही को समझे।
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स्वामी विवेकानंद केंद्रीय पुस्तकालय के डा. विद्युतमल का कहना है कि चुनाव के पर्व में हम अपने सांसद को इसलिए चुनते हैं की वह हमारी बुनियादी सुविधाओं को क्षेत्र की जनता के बीच पहुंचा सके। क्षेत्र के विकास को प्रमुखता दे सके। क्षेत्र में तमाम बुराइयों को खत्म करने के साथ शिक्षा और स्वास्थ्य की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में सहयोग करे। स्वच्छ जल एवं क्षेत्र के युवाओं में राजनीति के प्रति जागरूकता एवं चौमुखी विकास के लिए हम अपना सांसद चुनते हैं। युवाओं के लिए रोजगार और महिलाओं की सुरक्षा के लिए बेहतर पहल होनी चाहिए।
इंजीनियरिंग संस्थान के डा. जेपी लाल का कहना है कि क्षेत्र का सांसद ज्ञानवान, सामर्थ्य एवं सकारात्मक सोच रखने वाला होना चाहिए। जिससे कि क्षेत्र का विकास समाज का देश का विकास संभव है। आज के समय में सांसदों की जो भूमिका है वह नीति निर्धारक के रूप में होने के साथ देश को विकासशील बनाने में भी उनकी भूमिका अहम है। सांसद वह व्यक्ति होना चाहिए जो संपूर्ण रूप से परिपक्व हो, जिसे अपनी जिम्मेदारी का पूरा एहसास हो।
पूर्वांचल विश्वविद्यालय एचआरडी के विभागाध्यक्ष प्रो. अविनाश पाथर्डीकर का कहना है कि हमारा सांसद ऐसा होना चाहिए जो सरकारी योजनाओं को मूर्त दे सके। खासकर शहर को एक स्वच्छ एवं सुंदर बनाने की कार्य योजना को सफल बना सके। देश की दूरगामी नीतियों जिनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, विदेश नीति एवं आधारभूत संरचनाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए दूरदर्शी होना चाहिए।
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बीआरसी के समन्वय जितेंद्र पांडेय का कहना है कि हमारा सांसद पढ़ा-लिखा होना चाहिए। उसे संविधान की जानकारी होनी चाहिए। वह जनता के प्रति समर्पित होना चाहिए। निरंतर जनता के संपर्क में रहे। सभी के विकास का भाव रखे। जनभावनाओं को समझे। लोकसभा क्षेत्र में निश्चित अंतराल पर भ्रमण करे। क्षेत्र के विकास का विजन बनाए। जनता के प्रति जवाबदेही को समझे।
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स्वामी विवेकानंद केंद्रीय पुस्तकालय के डा. विद्युतमल का कहना है कि चुनाव के पर्व में हम अपने सांसद को इसलिए चुनते हैं की वह हमारी बुनियादी सुविधाओं को क्षेत्र की जनता के बीच पहुंचा सके। क्षेत्र के विकास को प्रमुखता दे सके। क्षेत्र में तमाम बुराइयों को खत्म करने के साथ शिक्षा और स्वास्थ्य की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में सहयोग करे। स्वच्छ जल एवं क्षेत्र के युवाओं में राजनीति के प्रति जागरूकता एवं चौमुखी विकास के लिए हम अपना सांसद चुनते हैं। युवाओं के लिए रोजगार और महिलाओं की सुरक्षा के लिए बेहतर पहल होनी चाहिए।
इंजीनियरिंग संस्थान के डा. जेपी लाल का कहना है कि क्षेत्र का सांसद ज्ञानवान, सामर्थ्य एवं सकारात्मक सोच रखने वाला होना चाहिए। जिससे कि क्षेत्र का विकास समाज का देश का विकास संभव है। आज के समय में सांसदों की जो भूमिका है वह नीति निर्धारक के रूप में होने के साथ देश को विकासशील बनाने में भी उनकी भूमिका अहम है। सांसद वह व्यक्ति होना चाहिए जो संपूर्ण रूप से परिपक्व हो, जिसे अपनी जिम्मेदारी का पूरा एहसास हो।