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फर्जी डिमांड ड्राफ्ट दाखिल करने के आरोपी को वारंट, जमानतदारों को नोटिस
Updated Fri, 07 Dec 2018 11:57 PM IST
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जौनपुर। नेवढ़िया थाना क्षेत्र के धोखाधड़ी व जालसाजी के मुकदमे में हाईकोर्ट के सशर्त जमानत के आदेश के बाद वादी के पक्ष में एक लाख रुपये का फर्जी ड्राफ्ट सीजेएम कोर्ट में जमा करने के आरोपी की जमानत निरस्त कर गिरफ्तारी का वारंट कोर्ट ने जारी किया। जमानतदारों को नोटिस भी जारी हुई है। वादी को आदेश दिया गया कि तत्काल विधिनुसार कार्रवाई करें। आदेश की कॉपी सूचनार्थ हाईकोर्ट भेजी गई।
नेवढ़िया थाना क्षेत्र के धोखाधड़ी व कूट रचना के मुकदमे में आरोपी विकास दूबे को हाईकोर्ट ने छह सितंबर 2018 को दो माह की जमानत दी। शर्त अधिरोपित किया कि आरोपी विकास वादी संजय सिंह के पक्ष में एक लाख का डिमांड ड्राफ्ट सीजेएम के समक्ष प्रस्तुत करें जिसे सीजीएम वादी को सुपुर्द करें। डिमांड ड्राफ्ट न देने पर जमानत निरस्त समझी जाए और अभियुक्त को अभिरक्षा में लिया जाएगा। 28 नवंबर 2018 को विकास ने डिमांड ड्राफ्ट सीजेएम के समक्ष प्रस्तुत किया जिसे कोर्ट द्वारा वादी संजय को प्राप्त करा दिया गया। इसके बाद स्टेट बैंक के मैनेजर ने कोर्ट में आख्या भेजी कि डिमांड ड्राफ्ट कूटरचित व फर्जी है। जिससे वादी को एक लाख रुपये प्राप्त नहीं हो सका और न ही हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन हो सका। सीजेएम ने आदेश दिया कि आरोपी की जमानत निरस्त समझी जाएगी उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए जमानतदारों को नोटिस जारी किया।
जौनपुर। दुर्घटना में बीमित वाहन लगाकर बीमा कंपनी को चूना लगाने व क्षतिपूर्ति लेने के फर्जीवाड़े को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट द्वारा एसआईटी गठित की गई है एवं हर जिले में न्यायिक अधिकारियों की जांच समिति भी बनाई गई है। लाइन बाजार थाना क्षेत्र में दुर्घटना के इसी प्रकार के मामले में कोर्ट ने याचिका निरस्त कर विवेचक अरविंद कुमार एवं विनोद कुमार राय की भूमिका की जांच का जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक को आदेश दिया। 30 दिन में की गई कार्यवाही से अवगत कराने को कहा।
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लाइन बाजार थाना क्षेत्र के कुद्दूपुर तिराहे पर 11 अगस्त 2016 को कादीपुर, जलालपुर निवासी राम नरेश की ट्रैक्टर नंबर यूपी 62 डी 1781 से दुर्घटना में मृत्यु की प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। रामनरेश की पत्नी व परिजनों ने 15 लाख रुपये क्षतिपूर्ति का दावा जिला जज की कोर्ट में दाखिल किया था जो स्थानांतरित होकर अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी द्वितीय की कोर्ट में विचाराधीन था। दुर्घटना में पुलिस ने चार्जशीट ट्रैक्टर नंबर यूपी 62 एन 1733 के खिलाफ दाखिल की। बीमा कंपनी के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि पहले ट्रैक्टर का बीमा नहीं था। क्षतिपूर्ति प्राप्त करने के उद्देश्य से एवं असली वाहन स्वामी को बचाने के लिए दूसरा बीमित ट्रैक्टर संलिप्त कराया गया। यहां तक कि पुलिस ने पहला ट्रैक्टर बिना कोर्ट के आदेश के अवमुक्त भी कर दिया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद क्षतिपूर्ति की याचिका निरस्त कर दिया। साथ ही 30 दिन में मुकदमे के विवेचक अरविंद कुमार एवं विनोद कुमार राय की भूमिका की जांच का आदेश डीएम व एसपी को दिया।
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नेवढ़िया थाना क्षेत्र के धोखाधड़ी व कूट रचना के मुकदमे में आरोपी विकास दूबे को हाईकोर्ट ने छह सितंबर 2018 को दो माह की जमानत दी। शर्त अधिरोपित किया कि आरोपी विकास वादी संजय सिंह के पक्ष में एक लाख का डिमांड ड्राफ्ट सीजेएम के समक्ष प्रस्तुत करें जिसे सीजीएम वादी को सुपुर्द करें। डिमांड ड्राफ्ट न देने पर जमानत निरस्त समझी जाए और अभियुक्त को अभिरक्षा में लिया जाएगा। 28 नवंबर 2018 को विकास ने डिमांड ड्राफ्ट सीजेएम के समक्ष प्रस्तुत किया जिसे कोर्ट द्वारा वादी संजय को प्राप्त करा दिया गया। इसके बाद स्टेट बैंक के मैनेजर ने कोर्ट में आख्या भेजी कि डिमांड ड्राफ्ट कूटरचित व फर्जी है। जिससे वादी को एक लाख रुपये प्राप्त नहीं हो सका और न ही हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन हो सका। सीजेएम ने आदेश दिया कि आरोपी की जमानत निरस्त समझी जाएगी उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए जमानतदारों को नोटिस जारी किया।
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जौनपुर। दुर्घटना में बीमित वाहन लगाकर बीमा कंपनी को चूना लगाने व क्षतिपूर्ति लेने के फर्जीवाड़े को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट द्वारा एसआईटी गठित की गई है एवं हर जिले में न्यायिक अधिकारियों की जांच समिति भी बनाई गई है। लाइन बाजार थाना क्षेत्र में दुर्घटना के इसी प्रकार के मामले में कोर्ट ने याचिका निरस्त कर विवेचक अरविंद कुमार एवं विनोद कुमार राय की भूमिका की जांच का जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक को आदेश दिया। 30 दिन में की गई कार्यवाही से अवगत कराने को कहा।
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लाइन बाजार थाना क्षेत्र के कुद्दूपुर तिराहे पर 11 अगस्त 2016 को कादीपुर, जलालपुर निवासी राम नरेश की ट्रैक्टर नंबर यूपी 62 डी 1781 से दुर्घटना में मृत्यु की प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। रामनरेश की पत्नी व परिजनों ने 15 लाख रुपये क्षतिपूर्ति का दावा जिला जज की कोर्ट में दाखिल किया था जो स्थानांतरित होकर अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी द्वितीय की कोर्ट में विचाराधीन था। दुर्घटना में पुलिस ने चार्जशीट ट्रैक्टर नंबर यूपी 62 एन 1733 के खिलाफ दाखिल की। बीमा कंपनी के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि पहले ट्रैक्टर का बीमा नहीं था। क्षतिपूर्ति प्राप्त करने के उद्देश्य से एवं असली वाहन स्वामी को बचाने के लिए दूसरा बीमित ट्रैक्टर संलिप्त कराया गया। यहां तक कि पुलिस ने पहला ट्रैक्टर बिना कोर्ट के आदेश के अवमुक्त भी कर दिया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद क्षतिपूर्ति की याचिका निरस्त कर दिया। साथ ही 30 दिन में मुकदमे के विवेचक अरविंद कुमार एवं विनोद कुमार राय की भूमिका की जांच का आदेश डीएम व एसपी को दिया।