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हवन पूजन से सकारात्मक ऊर्जा का होता है प्रवेश
Updated Wed, 21 Nov 2018 11:49 PM IST
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बरईपार। क्षेत्र के सैदपुर गांव में दस नवंबर से चल रहे 11 दिवसीय सहस्रचंडी महायज्ञ में अंतिम दिन यज्ञ देव की परिक्रमा करके पुण्य अर्जन करने के लिए लोगों की भीड़ रही। यज्ञाचार्य मुरारी श्याम पांडेय व्यास ने बताया कि इस प्रकार के महायज्ञ से नकारात्मक ऊर्जा विसर्जन तथा सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है। सभी प्रकार की बाधा और विकारों से मुक्ति मिलती है। यज्ञ के धुएं से पर्यावरण पवित्र हो जाता है। वहीं खतरनाक विषाणु नष्ट हो जाते हैं। मानव जीवन अध्यात्म के समावेश के साथ धर्म चिंतन को भी बढ़ावा मिलता है। खुशहाली के साथ आपदा से राहत मिलती है। इसलिए इस प्रकार के महायज्ञ से धरा पर हरा-भरा वातावरण सृजित होता है।
वैदिक परंपरा के अनुसार आकर्षक तरीके का भव्य यज्ञशाला और मंडप तैयार किया गया था जिसमें चारों दिशा में ब्रह्मा, विष्णु, महेश एवं इंद्र देव की स्थापना के साथ सर्वतो भद्र मंडल के साथ देवी-देवताओं की स्थापना की गई थी। सुबह से कर्ण प्रिय मंत्रों के साथ पूजा-पाठ शुरू हुआ। पूर्णाहुति के दिन क्षेत्र के पुरुष और महिलाओं ने मंडप की परिक्रमा कर पुण्य प्राप्त किया। महायज्ञ यज्ञाचार्य पंडित मुरारी श्याम पांडेय की अगुवाई में काशी प्रयाग, सोनभद्र और जिले के 30 विद्वान पुरोहितों ने 11 दिन तक जाप-पाठ किया। अंतिम दिन यज्ञ में आहुति देने सहित प्रसाद ग्रहण करने वालों की भीड़ रही। महायज्ञ का आयोजन ओंकारनाथ दुबे द्वारा किया गया था। इस दौरान पुरोहितों के मंत्रोच्चारण से क्षेत्र का वातावरण भक्तिमय हो गया।
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वैदिक परंपरा के अनुसार आकर्षक तरीके का भव्य यज्ञशाला और मंडप तैयार किया गया था जिसमें चारों दिशा में ब्रह्मा, विष्णु, महेश एवं इंद्र देव की स्थापना के साथ सर्वतो भद्र मंडल के साथ देवी-देवताओं की स्थापना की गई थी। सुबह से कर्ण प्रिय मंत्रों के साथ पूजा-पाठ शुरू हुआ। पूर्णाहुति के दिन क्षेत्र के पुरुष और महिलाओं ने मंडप की परिक्रमा कर पुण्य प्राप्त किया। महायज्ञ यज्ञाचार्य पंडित मुरारी श्याम पांडेय की अगुवाई में काशी प्रयाग, सोनभद्र और जिले के 30 विद्वान पुरोहितों ने 11 दिन तक जाप-पाठ किया। अंतिम दिन यज्ञ में आहुति देने सहित प्रसाद ग्रहण करने वालों की भीड़ रही। महायज्ञ का आयोजन ओंकारनाथ दुबे द्वारा किया गया था। इस दौरान पुरोहितों के मंत्रोच्चारण से क्षेत्र का वातावरण भक्तिमय हो गया।
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