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कूड़ा निस्तारण के लिए बन रहा प्लांट खुद कूड़ा बन गया
Updated Wed, 21 Nov 2018 12:23 AM IST
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जौनपुर। शहर का कचरा निस्तारित करने के लिए बना प्लांट खुद कूड़े में बदल गया है। वर्ष 2008 में 12 करोड़ की लागत से बनने वाला सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का दस साल में सिर्फ पिलर खड़ा हो पाया है। जहां इसका निर्माण हो रहा है उसे कचरे से पाट दिया गया है। इससे सरिया व अन्य निर्माण सामग्री भी नष्ट हो रही है। निर्माण एजेंसी का कहना है कि धन की कमी से काम रुक गया है। पहली किस्त में बजट का 50 फीसदी हिस्सा मिला था। अब दूसरी किस्त का इंतजार है।
नगरपालिका परिषद जौनपुर के पास कूड़ा निस्तारण के लिए कोई समुचित स्थान नहीं है। सड़क किनारे कूंड़ा डंप किया जा रहा है। अफसर भी मानते हैं कि सड़कों के किनारे कूड़ा डंप करना उनकी मजबूरी है। प्रतिदिन 82 मिट्रिक टन कचरा उत्सर्जित करने वाले इस शहर में सड़कों के किनारे कूड़ा डंप कर दिया जाता है। जिससे लोगों को परेशानी होती है। शहर से निकलने वाला कचरा निस्तारण के लिए वर्ष 2008 में सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की बुनियाद शहर से करीब आठ किलोमीटर दूर कुल्हनामऊ गांव में रखी गई थी। 12 करोड़ की लागत से बनने वाले इस प्लांट के लिए बजट की पहली किश्त भी जारी हो चुकी है। शुरुआती दौर मगं जमीन को लेकर विवाद था जिससे निर्माण शुरू होने में देरी हुई। बाद में निर्माण की लागत भी बढ़ गई। जिस समय सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के निर्माण की बुनियाद रखी गई थी तबसे अब तक दस साल से अधिक का समय बीत चुका है। ऐसे में ईंट, सीमेंट, गिट्टी, सरिया आदि निर्माण सामग्री के दाम भी बढ़ गए। कार्यदायी संस्था सीएनडीएस की ओर से पुनरीक्षित स्टीमेट सरकार को भेजा गया है लेकिन निर्माण के लिए दूसरी किस्त अभी तक जारी नहीं हो सकी। शुरुआत के दो से तीन साल तक यह परियोजना जमीन विवाद में फंसी रही। बाद में किसी तरह विवाद निबटा तो निर्माण कराने वाली गुडगांव की फर्म ए-टू-जेड ने पुरानी दर पर काम करने से हाथ खड़े कर दिए। अब जाकर कार्यदायी संस्था सीएनडीएस ने दावा किया है कि बजट को लेकर फर्म से विवाद खत्म हो गया है। लेकिन बजट की दूसरी किस्त का इंतजार है।
शहर से प्रतिदिन निकलता है 82 एमटी कचरा
करीब तीन लाख से अधिक आबादी वाले शहर से प्रतिदिन 82 मीट्रिकटन कचरा निकलता है। जिसे निस्तारित करने की कोई समुचित व्यवस्था न होने के चलते नगर पालिका के कर्मचारी जहां तहां सड़क के किनारे कूड़ा डंप कर देते हैं। नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी कृष्णचंद्र की माने तो 82 मीट्रिक टन कचरा पुराने 31 वार्डों से निकलता है। जबकि इस बार आठ नए वार्ड शहर में शामिल हो गए हैं। जहां अभी सफाई की व्यवस्था नहीं हो सकी है। 62 वर्ग किलोमीटर में फैले इस पूरे शहर में सफाई शुरू होने पर कूड़े की मात्रा बढ़ जाएगी। ऐसे में समस्या और भी गंभीर हो सकती है।
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प्रतिदिन 100 एमटी कचरा निस्तारण की होगी क्षमता
जौनपुर। सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट चालू होने पर प्रतिदिन 100 मीट्रिक टन से अधिक कचरे का निस्तारण हो सकता है। इस प्लांट में कचरों से निकलने वाले प्लास्टिक का भी निस्तारण हो जाएगा। इस प्लांट में प्लास्टिक की री साइकिलिंग की भी व्यवस्था होगी। सभी प्रकार के प्लास्टिक को गलाकर उसे किसी न किसी रूप में फिर से इस्तेमाल के लिए तैयार कर दिया जाएगा। इसके अलावा, गीले कचरे से उर्वरक तैयार होगी। इसका इस्तेमाल कृषि कार्य के लिए किया जाएगा।
सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का निर्माण के लिए बजट का 50 फीसदी धन की पहली किस्त मिली है। दूसरी किस्त के लिए डिमांड की गई है। सरकार जिस दिन दूसरी किस्त का बजट जारी कर देगी उसके छह महीने बाद निर्माण कार्य पूरा करा दिया जाएगा।
आलोक श्रीवास्तव
प्रोजेक्ट मैनेजर, सीएनडीएस
कुल्हनामऊ में बन रहा सालिड मैनेजमेंट प्लांट के तैयार होने पर कूड़ा निस्तारण की समस्या से निजात मिल जाएगी। अभी शहर में कूड़ा निस्तारित करने के लिए कोई स्थान नहीं है। सड़कों के किनारे कूड़ा निस्तारित करना पालिका प्रशासन की मजबूरी है।
कृष्ण चंद्र, अधिशासी अधिकारी नगरपालिका परिषद जौनपुर
नगरपालिका परिषद जौनपुर के पास कूड़ा निस्तारण के लिए कोई समुचित स्थान नहीं है। सड़क किनारे कूंड़ा डंप किया जा रहा है। अफसर भी मानते हैं कि सड़कों के किनारे कूड़ा डंप करना उनकी मजबूरी है। प्रतिदिन 82 मिट्रिक टन कचरा उत्सर्जित करने वाले इस शहर में सड़कों के किनारे कूड़ा डंप कर दिया जाता है। जिससे लोगों को परेशानी होती है। शहर से निकलने वाला कचरा निस्तारण के लिए वर्ष 2008 में सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की बुनियाद शहर से करीब आठ किलोमीटर दूर कुल्हनामऊ गांव में रखी गई थी। 12 करोड़ की लागत से बनने वाले इस प्लांट के लिए बजट की पहली किश्त भी जारी हो चुकी है। शुरुआती दौर मगं जमीन को लेकर विवाद था जिससे निर्माण शुरू होने में देरी हुई। बाद में निर्माण की लागत भी बढ़ गई। जिस समय सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के निर्माण की बुनियाद रखी गई थी तबसे अब तक दस साल से अधिक का समय बीत चुका है। ऐसे में ईंट, सीमेंट, गिट्टी, सरिया आदि निर्माण सामग्री के दाम भी बढ़ गए। कार्यदायी संस्था सीएनडीएस की ओर से पुनरीक्षित स्टीमेट सरकार को भेजा गया है लेकिन निर्माण के लिए दूसरी किस्त अभी तक जारी नहीं हो सकी। शुरुआत के दो से तीन साल तक यह परियोजना जमीन विवाद में फंसी रही। बाद में किसी तरह विवाद निबटा तो निर्माण कराने वाली गुडगांव की फर्म ए-टू-जेड ने पुरानी दर पर काम करने से हाथ खड़े कर दिए। अब जाकर कार्यदायी संस्था सीएनडीएस ने दावा किया है कि बजट को लेकर फर्म से विवाद खत्म हो गया है। लेकिन बजट की दूसरी किस्त का इंतजार है।
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शहर से प्रतिदिन निकलता है 82 एमटी कचरा
करीब तीन लाख से अधिक आबादी वाले शहर से प्रतिदिन 82 मीट्रिकटन कचरा निकलता है। जिसे निस्तारित करने की कोई समुचित व्यवस्था न होने के चलते नगर पालिका के कर्मचारी जहां तहां सड़क के किनारे कूड़ा डंप कर देते हैं। नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी कृष्णचंद्र की माने तो 82 मीट्रिक टन कचरा पुराने 31 वार्डों से निकलता है। जबकि इस बार आठ नए वार्ड शहर में शामिल हो गए हैं। जहां अभी सफाई की व्यवस्था नहीं हो सकी है। 62 वर्ग किलोमीटर में फैले इस पूरे शहर में सफाई शुरू होने पर कूड़े की मात्रा बढ़ जाएगी। ऐसे में समस्या और भी गंभीर हो सकती है।
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प्रतिदिन 100 एमटी कचरा निस्तारण की होगी क्षमता
जौनपुर। सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट चालू होने पर प्रतिदिन 100 मीट्रिक टन से अधिक कचरे का निस्तारण हो सकता है। इस प्लांट में कचरों से निकलने वाले प्लास्टिक का भी निस्तारण हो जाएगा। इस प्लांट में प्लास्टिक की री साइकिलिंग की भी व्यवस्था होगी। सभी प्रकार के प्लास्टिक को गलाकर उसे किसी न किसी रूप में फिर से इस्तेमाल के लिए तैयार कर दिया जाएगा। इसके अलावा, गीले कचरे से उर्वरक तैयार होगी। इसका इस्तेमाल कृषि कार्य के लिए किया जाएगा।
सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का निर्माण के लिए बजट का 50 फीसदी धन की पहली किस्त मिली है। दूसरी किस्त के लिए डिमांड की गई है। सरकार जिस दिन दूसरी किस्त का बजट जारी कर देगी उसके छह महीने बाद निर्माण कार्य पूरा करा दिया जाएगा।
आलोक श्रीवास्तव
प्रोजेक्ट मैनेजर, सीएनडीएस
कुल्हनामऊ में बन रहा सालिड मैनेजमेंट प्लांट के तैयार होने पर कूड़ा निस्तारण की समस्या से निजात मिल जाएगी। अभी शहर में कूड़ा निस्तारित करने के लिए कोई स्थान नहीं है। सड़कों के किनारे कूड़ा निस्तारित करना पालिका प्रशासन की मजबूरी है।
कृष्ण चंद्र, अधिशासी अधिकारी नगरपालिका परिषद जौनपुर