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पति व ससुर को आजीवन कारावास एवं अर्थ दंड
Updated Fri, 16 Nov 2018 01:11 AM IST
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जौनपुर। खुटहन थाना क्षेत्र के काजीशाहपुर में दहेज की मांग को लेकर विवाहिता की हत्या करने के आरोपी पति और ससुर को अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम महेंद्र सिंह ने गुरुवार को खुले न्यायालय में दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास एवं 10-10 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई।
संतोष यादव निवासी मजडीहा, शाहगंज ने घटना की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। अभियोजन कथानक के अनुसार, संतोष ने अपनी बहन अर्चना की शादी 2007 में इंद्रजीत यादव निवासी काजीशाहपुर के साथ की थी। विवाह के बाद पति इंद्रजीत, ससुर नंदलाल आदि दहेज में एक लाख रुपए व बाइक की मांग को लेकर अर्चना को प्रताड़ित करते थे। 11 जनवरी 2015 को दोपहर एक बजे ससुरालवालों ने उस पर मिट्टी का तेल छिड़ककर जला दिया। 12 जनवरी को जिला चिकित्सालय में इलाज के दौरान अर्चना की मृत्यु हो गई। मृत्यु के पूर्व अर्चना ने मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दिया था। पुलिस ने मामले की विवेचना पुरी करके आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल किया। कोर्ट में वादी और मृतका के मायके पक्ष के अन्य गवाह पक्षद्रोही हो गए और घटना का समर्थन नहीं किया। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की बहस एवं तर्कों को सुनने तथा सभी साक्ष्यों को देखा। मृत्यु पूर्व विवाहिता के बयान के आधार पर पति व ससुर को हत्या के जुर्म में दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
संतोष यादव निवासी मजडीहा, शाहगंज ने घटना की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। अभियोजन कथानक के अनुसार, संतोष ने अपनी बहन अर्चना की शादी 2007 में इंद्रजीत यादव निवासी काजीशाहपुर के साथ की थी। विवाह के बाद पति इंद्रजीत, ससुर नंदलाल आदि दहेज में एक लाख रुपए व बाइक की मांग को लेकर अर्चना को प्रताड़ित करते थे। 11 जनवरी 2015 को दोपहर एक बजे ससुरालवालों ने उस पर मिट्टी का तेल छिड़ककर जला दिया। 12 जनवरी को जिला चिकित्सालय में इलाज के दौरान अर्चना की मृत्यु हो गई। मृत्यु के पूर्व अर्चना ने मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दिया था। पुलिस ने मामले की विवेचना पुरी करके आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल किया। कोर्ट में वादी और मृतका के मायके पक्ष के अन्य गवाह पक्षद्रोही हो गए और घटना का समर्थन नहीं किया। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की बहस एवं तर्कों को सुनने तथा सभी साक्ष्यों को देखा। मृत्यु पूर्व विवाहिता के बयान के आधार पर पति व ससुर को हत्या के जुर्म में दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
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