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जिला अस्पताल में उपलब्ध नहीं है पचास फीसदी भी ब्लक
Updated Sat, 10 Nov 2018 11:54 PM IST
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जौनपुर। थैलेसीमिया और कैंसर जैसी तमाम बीमारियों में रक्त की जरूरत होती है। इसके अलावा हादसे के शिकार लोगों को भी तत्काल रक्त की जरूरत होती है। मगर जिले के तीन ब्लड बैंकों में मांग के एक चौथाई रक्त भी उपलब्ध नहीं हो पाता है। डेंगू रोगियों के लिए प्लेटलेट की मांग बढ़ी हुई है लेकिन सेपरेशन यूनिट भी नहीं है। शहीद उमानाथ सिंह जिला चिकित्सालय तो अपने मरीजों के ब्लड की जरूरत को भी पूरा नहीं कर पाता है।
जिला अस्पताल समेत दो निजी अस्पतालों में 2550 यूनिट ब्लड रखने की व्यवस्था है जबकि जरूरत हर साल 10 हजार यूनिट की पड़ती है। जहां से मरीजों को जरूरत पड़ने पर ब्लड मिलने की उम्मीद रहती है लेकिन वहां से जरूरत भर का रक्त नहीं मिल पाता है। ऐसे में खून की कालाबाजारी करने वाले भी सक्रिय हैं। पिछले दिनों एक व्यक्ति को इस सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। जिला चिकित्सालय में 1500 यूनिट ब्लड रखने की व्यवस्था है। इसके बावजूद यहां रक्त का टोटा रहता है। ब्लड नहीं मिलने की स्थिति में उन्हें भाग दौड़ करनी पड़ती है। वर्ष 2017 में 5200 यूनिट ब्लड का कलेक्शन हुआ था, जबकि मरीजों को 5208 यूनिट ब्लड दिया गया था। इसी प्रकार वर्ष 2018 में अब तक 4907 यूनिट ब्लड का कलेक्शन हुआ है। जककि 5086 यूनिट की जरूरत मरीजों को पड़ी। इस समय ब्लड बैंक में महज 26 यूनिट ही हैं जबकि डेंगू के चलते प्लेटलेट की मांग बढ़ी हुई है। पैथालाजिस्ट डा. शायन दास की माने तो जिले के सभी सीएसची और पीएचसी के मरीजों को मिलाकर करीब दस हजार यूनिट ब्लड की जरूरत होती है। शहर के ईशा अस्पताल में 900 यूनिट ब्लड रखने की व्यवस्था है। प्रभारी डा. स्मिता श्रीवास्तव ने बताया कि ब्लड बैंक में इस समय 206 यूनिट ब्लड उपलब्ध हैं। इसके अलावा प्लेटलेट्स दो यूनिट, प्लाज्मा 146 यूनिट, क्रायो 66 यूनिट उपलब्ध है। मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर ब्लड उपलब्ध करा दिया जाए। कृष्णा हार्ट केयर सेंटर में 150 यूनिट ब्लड रखने की व्यवस्था है। इस समय तीस यूनिट ब्लड बैंक में उपलब्ध है। यदि कोई ब्लड देता है उसे अस्पताल की तरफ से कार्ड दिया जाता है। जरूरत पड़ने पर डोनर को ब्लड उपलब्ध करा दिया जाता है।
कोट---
ब्लड डोनेट करने के बाद डोनर को सावधानी बरतनी चाहिए। ब्लड देने के बाद तुरंत उठकर कहीं जाना नहीं चाहिए। कुछ देर तक बैठकर आराम कर लेना चाहिए। साथ ही तरल पदार्थ जैसे, जूस अथवा ग्लूकोज आदि ले लेना चाहिए। कभी-कभी चक्कर आने की संभावना रहती है। ब्लड देने से शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है।
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ड़ा. रामजी पांडेय सीएमओ जौनपुर
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जिला अस्पताल समेत दो निजी अस्पतालों में 2550 यूनिट ब्लड रखने की व्यवस्था है जबकि जरूरत हर साल 10 हजार यूनिट की पड़ती है। जहां से मरीजों को जरूरत पड़ने पर ब्लड मिलने की उम्मीद रहती है लेकिन वहां से जरूरत भर का रक्त नहीं मिल पाता है। ऐसे में खून की कालाबाजारी करने वाले भी सक्रिय हैं। पिछले दिनों एक व्यक्ति को इस सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। जिला चिकित्सालय में 1500 यूनिट ब्लड रखने की व्यवस्था है। इसके बावजूद यहां रक्त का टोटा रहता है। ब्लड नहीं मिलने की स्थिति में उन्हें भाग दौड़ करनी पड़ती है। वर्ष 2017 में 5200 यूनिट ब्लड का कलेक्शन हुआ था, जबकि मरीजों को 5208 यूनिट ब्लड दिया गया था। इसी प्रकार वर्ष 2018 में अब तक 4907 यूनिट ब्लड का कलेक्शन हुआ है। जककि 5086 यूनिट की जरूरत मरीजों को पड़ी। इस समय ब्लड बैंक में महज 26 यूनिट ही हैं जबकि डेंगू के चलते प्लेटलेट की मांग बढ़ी हुई है। पैथालाजिस्ट डा. शायन दास की माने तो जिले के सभी सीएसची और पीएचसी के मरीजों को मिलाकर करीब दस हजार यूनिट ब्लड की जरूरत होती है। शहर के ईशा अस्पताल में 900 यूनिट ब्लड रखने की व्यवस्था है। प्रभारी डा. स्मिता श्रीवास्तव ने बताया कि ब्लड बैंक में इस समय 206 यूनिट ब्लड उपलब्ध हैं। इसके अलावा प्लेटलेट्स दो यूनिट, प्लाज्मा 146 यूनिट, क्रायो 66 यूनिट उपलब्ध है। मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर ब्लड उपलब्ध करा दिया जाए। कृष्णा हार्ट केयर सेंटर में 150 यूनिट ब्लड रखने की व्यवस्था है। इस समय तीस यूनिट ब्लड बैंक में उपलब्ध है। यदि कोई ब्लड देता है उसे अस्पताल की तरफ से कार्ड दिया जाता है। जरूरत पड़ने पर डोनर को ब्लड उपलब्ध करा दिया जाता है।
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कोट---
ब्लड डोनेट करने के बाद डोनर को सावधानी बरतनी चाहिए। ब्लड देने के बाद तुरंत उठकर कहीं जाना नहीं चाहिए। कुछ देर तक बैठकर आराम कर लेना चाहिए। साथ ही तरल पदार्थ जैसे, जूस अथवा ग्लूकोज आदि ले लेना चाहिए। कभी-कभी चक्कर आने की संभावना रहती है। ब्लड देने से शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है।
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ड़ा. रामजी पांडेय सीएमओ जौनपुर