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दीपावली के दीपों से जगमगाया घर आंगन का कोना-कोना
Updated Wed, 07 Nov 2018 07:49 PM IST
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जौनपुर। सारा शहर रोशनी से नहा उठा और चारों तरफ खुशियां, उमंग छा गईं। रंग बिरंगी झालरों दफ्तर, मकान, दुकान सब जगमग हो उठे। लोगों ने घरों और प्रतिष्ठानों पर विधि विधान से भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की पूजा अर्चना करने के बाद घरों में पूजा किया। पूजा के बाद आतिशाबाजी का सिलसिला शुरू हुआ। रंग बिरंगी प्रकाश से आसमान घिर गया। आतिशबाजी के लिए बच्चों में होड़ लगी रही। उधर लोगों ने एक दूसरे को मिठाई का उपहार देकर बधाई दी।
दीपावली पर लोगों में उल्साह और हर्ष देखने को मिला। दुकानदारों ने बुधवार को पहले मां लक्ष्मी व गणेश की पूजा की। भक्तों ने पूजा अर्चना कर सुख संमृद्दि की कामना की। देर रात पटाखों की आवाज से शहर से लेकर गांव तक का इलाका गूंजता रहा। घर, खेत-खलिहानों में दीप जलाकर लोगों ने अमावस की काली रात को रोशन कर दिया। घरों के साथ ही बाजारों में व्यापारिक प्रतिष्ठान भी रातभर बिजली की रंग बिरंगी झालरों से झिलमिलाते रहे। घरों को आकर्षक दीपों से सजाने के बाद आतिशबाजी का दौर शुरू हुआ। चौराहों और कस्बो में देर रात तक चहल-पहल रही। प्रदोष काल से पहले ही पूजा की सारी तैयारी पूरी कर ली गई थी। शुभ मुहूर्त आते ही लोगों ने गणेश-लक्ष्मी और कुबेर की पूजा-अर्चना की। गणपति से लोगों ने विघ्नबाधा दूर करने और लक्ष्मी से धन ऐश्वर्य का आशीर्वाद मांगा।
दीपावली के दिन बच्चों ने पूजन से पहले ही आतिशबाजी करनी शुरू कर दी थी। त्योहार पर देर रात तक शहर में जोरदार आतिशबाजी होती रही। रंग- बिरंगी रोशनी वाले अनार चलाता नजर आ रहा था, तो कोई तेज आवाज वाले बम फोड़ रहा था। एक सप्ताह पहले से ही लोगों ने दीपावली के लिए घरों की सफाई कर सजाने का काम शुरू कर दिया था। दिन में लोगों ने पूजा के सामान, मिठाइयां और पटाखों के साथ लक्ष्मी-गणेश की मिट्टी की प्रतिमाएं खरीदी। खरीददारी के लिए सुबह से लेकर देर शाम तक बाजारें गुलजार रहीं। उधर, शाम होते ही लोगों ने दीप और मोमबत्तियों की रोशनी से घर, आंगन जगमग कर दिया। खेत, खलिहान, व्यापारिक प्रतिष्ठानों को भी बिजली की रंगीन लाइटों से जगमग किया। शाम शुभ मूर्हुत पर घर और दुकानों में गणेश लक्ष्मी की विधि विधान से पूजा की गई। मड़ियाहूं, बदलापुर, मछलीशहर, शाहगंज, केराकत, रामपुर, बरसठी, जलालपुर, नेवढियां, बक्शा, केराकत आदि क्षेत्रों में लोगों ने फुलझड़ियां जलाने के साथ पटाखे छुड़ाए। शाम होते ही पटाखों के छुड़ाने का सिलसिला शुरू हुआ तो देर रात तक चलता रहा। युवकों ने तेज आवाज वाले पटाखे फोड़कर दीपोत्सव की खुशियां मनाई। दीपों की रोशनी से घर का कोना-कोना रोशन हो उठा। ग्रामीण इलाकों में तो कुछ लोगों ने घरों पर सरसों के तेल के दिए जलाए। परंपरा के अनुसार मां लक्ष्मी और गणेश की पूजा करने के बाद देव स्थानों, खेतों, और कृषि यंत्रों की भी पूजा की गई।
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मिठाई के दुकानदारों की रही बल्ले-बल्ले
जौनपुर। दीपावली पर जिले भर में मिठाई का कारोबार जमकर हुआ। जिसके कारण कारोबारियों की चांदी रही। जिले की सभी छोटी बड़ी बाजारों में सुबह 7 बजे से ही मिठाई की दुकानें सज गई थी। इन दुकानों पर सुबह 10 बजते-बजते खरीददारों दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ लग गई। दिनभर लोगों ने जमकर मिठाई की खरीददारी की। उधर, दीपावली का फायदा उठाते हुए दुकानदारों ने भी मिठाई की कीमतों में इजाफा कर दिया था। पिछले साल की अपेक्षा इस साल मिठाईयों की कीमतें बढ़ गई थी। बेनीराम की इमरती पिछले साल जहां 360 रूपसे किलो बिकी थी। इस साल उसकी कीमत 400 रूपये किलो हो गई। इस बार कारोबारियों ने लोगों की सुलभता के लिए मिठाई के आर्कषक गिफ्ट पैक भी तैयार किए थे। खोआ, छेना और ड्राईफ्रूट से बनी मिठाईयों का एक किलोग्राम का गिफ्ट पैक 700 से लेकर 800 रुपये के थे।
लक्ष्मी के स्वागत के लिए घरों में सजाई गई आकर्षक रंगोली
जौनपुर। दीपावली पर्व पर लक्ष्मी के स्वागत के लिए घरों के बाहर आकर्षक रंगोली सजाई गई। घरों के प्रवेश द्वार पर सायंकाल रंगोली सजाई। महिलाओं व युवतियों ने बुरादा और आंटा में रंग मिलाकर कई तरह की आकर्षक आकृतियों को उकेरा। पुराणों में रंगोली बनाकर देवी देवताओं को प्रसन्न करने के महत्व को बताया गया है। मान्यता है कि दीपावली के दिन लक्ष्मी जी उसी के घर में वास करती है जिनका घर पूरी तरह से स्वच्छ होते है। ऐसे में लोगों ने पहले से घरों की साफ सफाई कर लिया था। दीपावली के दिन भी सुबह से साफ सफाई का सिलसिला शुरू हो गया। काफी ताकि मां लक्ष्मी का प्रवेश उनके घर में हो सके। महिलाएं पूरे दिन श्रद्धा भाव से रंगोली बनाने में जुटी रहीं। बच्चों ने घरों के सामने आकर्षक रंगोली बनाकर लक्ष्मी पूजा के लिए घर को तैयार किया।
दीपावली पर बढ़ी माला और फूल की मांग
जौनपुर। दीपावली के दिन शहर से लेकर ग्रामीम इलाकों तक माला और की मांग बढ़ गई। त्यौहार के चलते बाजार में गेंदा और गुलाब की माला के दाम भी बढ़ गए थे। सामान्य दिनों में बीस रूपये में बिकने वाला गेंदा की माला दीपावली के दिन तीस लेकर चालीस रूपये तक बिकी। कुछ लोगों ने तो माला के लिए एक दिन पहले आर्डर दे दिया था। दिपावली के चलते लोग अपनी दुकानों और घरों को सजाने के लिए फूलों की खरीददारी किए। पूजा के लिए भी बाजार में फूलों की काफी मांग रही। दुकानों को सजाने के लिए माला की जमकर खरीददारी की गई। 50 से 200 रुपए की बीच बाजार में फूल बिका। फूल बिक्रेता पप्पू माली की मानें तो इस बार पिछले सालों की अपेक्षा फूलों की मांग अधिक रही। जिसके चलते फूल महंगा रहा। कुछ लोगों ने तो अपने घरों और दुकानों को सजाने के लिए आर्टीफिशल फूलों का सहारा लिया। शहर से लेकर ग्रमीण इलाकों तक बाजारों में माला फूल की दुकानें सज गई थी। सुबह ही दुकानदार अपनी दुकानें सजाकर बैठ गए थे।
दीपावली पर बढ़ी सूरन की कीमत
जौनपुर। दीपावली आते ही सूरन की मांग बढ़ गयी है। त्योहार के मौके पर विभिन्न व्यंजनों के साथ ही परंपरागत सूरन की सब्जी व अन्य पकवान दीपावली पर कमोवेश हर घर में बनाए जाते हैं।
दीपावली के चलते बाजार में सब्जियों की जहां आसमान छू रहे थे वहीं सूरन की कीमत भी बढ़ गई थी। आम दिनों में 30 से 35 रूपये किलो बिकने वाले सूरन की कीमत बढ़कर 60 रूपये हो गई थी। जबकि देशी सूरन की 70 से 80 रूपये रहा। मंडी में तो एक दिन पहले ही सूरन की जमकर खरीददारी हुई। सूरन की सब्जी सूखी व रसेदार दोनों तरह की बनाई जाती है। सब्जी बनाने से पहले सूरन का कसैलापन दूर करने के लिए इमली की पत्ती, नीबू के रस अथवा खटाई के साथ उबाला जाता है। तत्पश्चात छिलका उतारकर टुकड़े काटकर सूखी या रसेदार सब्जी बनायी जाती है। कुछ लोग इसका चोखा भी बनाते हैं। शहरी इलाकों में तो ठेले पर लादकर दुकानदार सूरन बेचते देखे गए। दीपावली के दिन सूरन की सब्जी खाने की परंपरा पहले चली आ रही है। इस दिन हर घर में सूरन की सब्जी बनाई जाती है। बाजार में दो किस्म के सूरन बिके। दिपावली पर देशी सूरन की सब्जी को विशेष महत्व दिया गया है। दूसरी सब्जियों के साथ लोग सूरन की खरीददारी करते देखे गए।
लक्ष्मी और गणेश पूजन के लिए बने पीले और श्वेत व्यंजन
जौनपुर। दीपावली त्योहार के मौके पर विभिन्न व्यंजनों को बनाने की परंपरा है। पकवान दीपावली पर कमोवेश हर घर में बनाए जाते हैं। पीले व श्वेत रंग के व्यंजनों का खास महत्व माना गया है। लक्ष्मी और गणेश के पूजन के बाद गणेश को प्रिय पीले रंग व लक्ष्मी जी को श्वेत रंग का भोग लगाया जाता है। खीर-लक्ष्मी जी को भोग लगाने के लिए धान के लावा, चूड़ा तथा मखाने की खीर बनाई जाती है। लक्ष्मी और गणेश के पूजन और भोग लगाने के लिए महिलाएं पहले ही कीचन की सफाई कर प्रसाद तैयार कर लेती हैं। उसके बाद दूसरा खाना बनाना जाता है।
दीपावली पर लोगों में उल्साह और हर्ष देखने को मिला। दुकानदारों ने बुधवार को पहले मां लक्ष्मी व गणेश की पूजा की। भक्तों ने पूजा अर्चना कर सुख संमृद्दि की कामना की। देर रात पटाखों की आवाज से शहर से लेकर गांव तक का इलाका गूंजता रहा। घर, खेत-खलिहानों में दीप जलाकर लोगों ने अमावस की काली रात को रोशन कर दिया। घरों के साथ ही बाजारों में व्यापारिक प्रतिष्ठान भी रातभर बिजली की रंग बिरंगी झालरों से झिलमिलाते रहे। घरों को आकर्षक दीपों से सजाने के बाद आतिशबाजी का दौर शुरू हुआ। चौराहों और कस्बो में देर रात तक चहल-पहल रही। प्रदोष काल से पहले ही पूजा की सारी तैयारी पूरी कर ली गई थी। शुभ मुहूर्त आते ही लोगों ने गणेश-लक्ष्मी और कुबेर की पूजा-अर्चना की। गणपति से लोगों ने विघ्नबाधा दूर करने और लक्ष्मी से धन ऐश्वर्य का आशीर्वाद मांगा।
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दीपावली के दिन बच्चों ने पूजन से पहले ही आतिशबाजी करनी शुरू कर दी थी। त्योहार पर देर रात तक शहर में जोरदार आतिशबाजी होती रही। रंग- बिरंगी रोशनी वाले अनार चलाता नजर आ रहा था, तो कोई तेज आवाज वाले बम फोड़ रहा था। एक सप्ताह पहले से ही लोगों ने दीपावली के लिए घरों की सफाई कर सजाने का काम शुरू कर दिया था। दिन में लोगों ने पूजा के सामान, मिठाइयां और पटाखों के साथ लक्ष्मी-गणेश की मिट्टी की प्रतिमाएं खरीदी। खरीददारी के लिए सुबह से लेकर देर शाम तक बाजारें गुलजार रहीं। उधर, शाम होते ही लोगों ने दीप और मोमबत्तियों की रोशनी से घर, आंगन जगमग कर दिया। खेत, खलिहान, व्यापारिक प्रतिष्ठानों को भी बिजली की रंगीन लाइटों से जगमग किया। शाम शुभ मूर्हुत पर घर और दुकानों में गणेश लक्ष्मी की विधि विधान से पूजा की गई। मड़ियाहूं, बदलापुर, मछलीशहर, शाहगंज, केराकत, रामपुर, बरसठी, जलालपुर, नेवढियां, बक्शा, केराकत आदि क्षेत्रों में लोगों ने फुलझड़ियां जलाने के साथ पटाखे छुड़ाए। शाम होते ही पटाखों के छुड़ाने का सिलसिला शुरू हुआ तो देर रात तक चलता रहा। युवकों ने तेज आवाज वाले पटाखे फोड़कर दीपोत्सव की खुशियां मनाई। दीपों की रोशनी से घर का कोना-कोना रोशन हो उठा। ग्रामीण इलाकों में तो कुछ लोगों ने घरों पर सरसों के तेल के दिए जलाए। परंपरा के अनुसार मां लक्ष्मी और गणेश की पूजा करने के बाद देव स्थानों, खेतों, और कृषि यंत्रों की भी पूजा की गई।
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मिठाई के दुकानदारों की रही बल्ले-बल्ले
जौनपुर। दीपावली पर जिले भर में मिठाई का कारोबार जमकर हुआ। जिसके कारण कारोबारियों की चांदी रही। जिले की सभी छोटी बड़ी बाजारों में सुबह 7 बजे से ही मिठाई की दुकानें सज गई थी। इन दुकानों पर सुबह 10 बजते-बजते खरीददारों दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ लग गई। दिनभर लोगों ने जमकर मिठाई की खरीददारी की। उधर, दीपावली का फायदा उठाते हुए दुकानदारों ने भी मिठाई की कीमतों में इजाफा कर दिया था। पिछले साल की अपेक्षा इस साल मिठाईयों की कीमतें बढ़ गई थी। बेनीराम की इमरती पिछले साल जहां 360 रूपसे किलो बिकी थी। इस साल उसकी कीमत 400 रूपये किलो हो गई। इस बार कारोबारियों ने लोगों की सुलभता के लिए मिठाई के आर्कषक गिफ्ट पैक भी तैयार किए थे। खोआ, छेना और ड्राईफ्रूट से बनी मिठाईयों का एक किलोग्राम का गिफ्ट पैक 700 से लेकर 800 रुपये के थे।
लक्ष्मी के स्वागत के लिए घरों में सजाई गई आकर्षक रंगोली
जौनपुर। दीपावली पर्व पर लक्ष्मी के स्वागत के लिए घरों के बाहर आकर्षक रंगोली सजाई गई। घरों के प्रवेश द्वार पर सायंकाल रंगोली सजाई। महिलाओं व युवतियों ने बुरादा और आंटा में रंग मिलाकर कई तरह की आकर्षक आकृतियों को उकेरा। पुराणों में रंगोली बनाकर देवी देवताओं को प्रसन्न करने के महत्व को बताया गया है। मान्यता है कि दीपावली के दिन लक्ष्मी जी उसी के घर में वास करती है जिनका घर पूरी तरह से स्वच्छ होते है। ऐसे में लोगों ने पहले से घरों की साफ सफाई कर लिया था। दीपावली के दिन भी सुबह से साफ सफाई का सिलसिला शुरू हो गया। काफी ताकि मां लक्ष्मी का प्रवेश उनके घर में हो सके। महिलाएं पूरे दिन श्रद्धा भाव से रंगोली बनाने में जुटी रहीं। बच्चों ने घरों के सामने आकर्षक रंगोली बनाकर लक्ष्मी पूजा के लिए घर को तैयार किया।
दीपावली पर बढ़ी माला और फूल की मांग
जौनपुर। दीपावली के दिन शहर से लेकर ग्रामीम इलाकों तक माला और की मांग बढ़ गई। त्यौहार के चलते बाजार में गेंदा और गुलाब की माला के दाम भी बढ़ गए थे। सामान्य दिनों में बीस रूपये में बिकने वाला गेंदा की माला दीपावली के दिन तीस लेकर चालीस रूपये तक बिकी। कुछ लोगों ने तो माला के लिए एक दिन पहले आर्डर दे दिया था। दिपावली के चलते लोग अपनी दुकानों और घरों को सजाने के लिए फूलों की खरीददारी किए। पूजा के लिए भी बाजार में फूलों की काफी मांग रही। दुकानों को सजाने के लिए माला की जमकर खरीददारी की गई। 50 से 200 रुपए की बीच बाजार में फूल बिका। फूल बिक्रेता पप्पू माली की मानें तो इस बार पिछले सालों की अपेक्षा फूलों की मांग अधिक रही। जिसके चलते फूल महंगा रहा। कुछ लोगों ने तो अपने घरों और दुकानों को सजाने के लिए आर्टीफिशल फूलों का सहारा लिया। शहर से लेकर ग्रमीण इलाकों तक बाजारों में माला फूल की दुकानें सज गई थी। सुबह ही दुकानदार अपनी दुकानें सजाकर बैठ गए थे।
दीपावली पर बढ़ी सूरन की कीमत
जौनपुर। दीपावली आते ही सूरन की मांग बढ़ गयी है। त्योहार के मौके पर विभिन्न व्यंजनों के साथ ही परंपरागत सूरन की सब्जी व अन्य पकवान दीपावली पर कमोवेश हर घर में बनाए जाते हैं।
दीपावली के चलते बाजार में सब्जियों की जहां आसमान छू रहे थे वहीं सूरन की कीमत भी बढ़ गई थी। आम दिनों में 30 से 35 रूपये किलो बिकने वाले सूरन की कीमत बढ़कर 60 रूपये हो गई थी। जबकि देशी सूरन की 70 से 80 रूपये रहा। मंडी में तो एक दिन पहले ही सूरन की जमकर खरीददारी हुई। सूरन की सब्जी सूखी व रसेदार दोनों तरह की बनाई जाती है। सब्जी बनाने से पहले सूरन का कसैलापन दूर करने के लिए इमली की पत्ती, नीबू के रस अथवा खटाई के साथ उबाला जाता है। तत्पश्चात छिलका उतारकर टुकड़े काटकर सूखी या रसेदार सब्जी बनायी जाती है। कुछ लोग इसका चोखा भी बनाते हैं। शहरी इलाकों में तो ठेले पर लादकर दुकानदार सूरन बेचते देखे गए। दीपावली के दिन सूरन की सब्जी खाने की परंपरा पहले चली आ रही है। इस दिन हर घर में सूरन की सब्जी बनाई जाती है। बाजार में दो किस्म के सूरन बिके। दिपावली पर देशी सूरन की सब्जी को विशेष महत्व दिया गया है। दूसरी सब्जियों के साथ लोग सूरन की खरीददारी करते देखे गए।
लक्ष्मी और गणेश पूजन के लिए बने पीले और श्वेत व्यंजन
जौनपुर। दीपावली त्योहार के मौके पर विभिन्न व्यंजनों को बनाने की परंपरा है। पकवान दीपावली पर कमोवेश हर घर में बनाए जाते हैं। पीले व श्वेत रंग के व्यंजनों का खास महत्व माना गया है। लक्ष्मी और गणेश के पूजन के बाद गणेश को प्रिय पीले रंग व लक्ष्मी जी को श्वेत रंग का भोग लगाया जाता है। खीर-लक्ष्मी जी को भोग लगाने के लिए धान के लावा, चूड़ा तथा मखाने की खीर बनाई जाती है। लक्ष्मी और गणेश के पूजन और भोग लगाने के लिए महिलाएं पहले ही कीचन की सफाई कर प्रसाद तैयार कर लेती हैं। उसके बाद दूसरा खाना बनाना जाता है।