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रसूले ख़ुदा हजरत मोहम्मद साहब व इमामे हसन
Updated Wed, 07 Nov 2018 12:18 AM IST
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जौनपुर। मुसलमानों के आख़री नबी इस्लाम धर्म के प्रवर्तक रसूले ख़ुदा हजरत मोहम्मद मुस्तफा स. अ. और उनके बड़े नवासे दूसरे इमाम हजरत इमाम हसन अ. स. की शहादत की याद में 26 सफर का जुलूस रात्रि मे हुसैनिया नक़ी फाटक से उठा, जो देर रात संपन्न हुआ। जुलूस मे भारी संख्या में महिला पुरूष व बच्चो ने भाग लिया।
नक़ी फाटक मे मजलिस हुई जिसमें सोजख़्वानी मोहम्मद जाफर ने अपने साथियों के साथ किया। पेशख़्वानी मुफ्ती मेंहदी व हैदर काजमी ने किया। मजलिस को बनारस से आये मौलाना इश्तेयाक़ अली इमानी ने पढा, मौलाना ने बताया कि मोहम्मद साहब ने ख़ुदा के पैग़ाम को पूरी दुनिया तक पहुँचाया। मजलूमों, गु़लामों, औरतों, बेसहारा व यतीमों को उनका हक़ दिलाया। मोहम्मद साहब ने इंसानों को मानवता का पाठ पढ़ाते हुए सच्चाई की राह पर चलने व अमन शान्ति का संदेश दिया। इस्लाम धर्म सबको समानता का अधिकार दिलाने का पैग़ाम देता है। आगे उन्होंने कहा कि अगर इंसान अल्लाह की किताब क़ुरान और मोहब्बते अहलेबैत पर अमल करें तो वो कभी परेशान नहीं हो सकता। हमेशा फलता -फूलता रहेगा बाद खत्म मजलिस शबीहे अलम निकाला गया । उसके बाद नक़ी फाटक के सामने मस्जिद पर एक तक़रीर मौलाना सै. ताबिश नक़वी ने करते हुए रसूले खोदा व इमाम हसन पर हुए मसाएब को पढ़ा तो माहौल ग़मग़ीन हो गया लोग रोने लगे, उसके बाद शबीहे ताबूत निकाला गया। जिसमें शहर की अन्जुमने जुल्फेक़ारिया बड़ी मस्जिद, बज्मे अजा कटघरा, जाफरी मक़्दूमशाहढ़न, असग़रिया पुरानी बाजार, अजादारिया बारादुअरिया, कौसरिया रिजवी खा, आदि अंजुमनो ने नौहा पढ़ती-मातम करती हुई जुलूस की शक्ल मे मल्हनी पड़ाव होते हुए इमाम चौक वक्फ़ बीकानी बीबी डढ़ियाना टोला तक गई। जुलूस पुन: नक़ी फाटक मे आकर संपन्न हुआ। सै. मो. मुस्तफा, शाहिद हुसैन गुड्डु, रजी हैदर जावेद ने आभार जताया। संचालन अब्बास काजमी ने किया। इस अवसर पर सै. मो. हसन नसीम, नजमुल हसन नजमी, कायम, असद, शोएब, अनवारूल हसन, आरिफ हुसैनी, क़मर हसनैन दीपू, कैफी आब्दी, अमीरूल, मोहम्मद हैदर, शारिब, मोहम्मद अब्बास आरिफ, मुफ्ती तबस्सुम, आबिद, तहसीन अब्बास सोनी, दिलावर हुसैन, मिर्जा जेया, जहीर हसन, दानिश काजमी, नजमुल हसन, इसरार हुसैन एडवोकेट आदि लोग उपस्थित रहे।
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नक़ी फाटक मे मजलिस हुई जिसमें सोजख़्वानी मोहम्मद जाफर ने अपने साथियों के साथ किया। पेशख़्वानी मुफ्ती मेंहदी व हैदर काजमी ने किया। मजलिस को बनारस से आये मौलाना इश्तेयाक़ अली इमानी ने पढा, मौलाना ने बताया कि मोहम्मद साहब ने ख़ुदा के पैग़ाम को पूरी दुनिया तक पहुँचाया। मजलूमों, गु़लामों, औरतों, बेसहारा व यतीमों को उनका हक़ दिलाया। मोहम्मद साहब ने इंसानों को मानवता का पाठ पढ़ाते हुए सच्चाई की राह पर चलने व अमन शान्ति का संदेश दिया। इस्लाम धर्म सबको समानता का अधिकार दिलाने का पैग़ाम देता है। आगे उन्होंने कहा कि अगर इंसान अल्लाह की किताब क़ुरान और मोहब्बते अहलेबैत पर अमल करें तो वो कभी परेशान नहीं हो सकता। हमेशा फलता -फूलता रहेगा बाद खत्म मजलिस शबीहे अलम निकाला गया । उसके बाद नक़ी फाटक के सामने मस्जिद पर एक तक़रीर मौलाना सै. ताबिश नक़वी ने करते हुए रसूले खोदा व इमाम हसन पर हुए मसाएब को पढ़ा तो माहौल ग़मग़ीन हो गया लोग रोने लगे, उसके बाद शबीहे ताबूत निकाला गया। जिसमें शहर की अन्जुमने जुल्फेक़ारिया बड़ी मस्जिद, बज्मे अजा कटघरा, जाफरी मक़्दूमशाहढ़न, असग़रिया पुरानी बाजार, अजादारिया बारादुअरिया, कौसरिया रिजवी खा, आदि अंजुमनो ने नौहा पढ़ती-मातम करती हुई जुलूस की शक्ल मे मल्हनी पड़ाव होते हुए इमाम चौक वक्फ़ बीकानी बीबी डढ़ियाना टोला तक गई। जुलूस पुन: नक़ी फाटक मे आकर संपन्न हुआ। सै. मो. मुस्तफा, शाहिद हुसैन गुड्डु, रजी हैदर जावेद ने आभार जताया। संचालन अब्बास काजमी ने किया। इस अवसर पर सै. मो. हसन नसीम, नजमुल हसन नजमी, कायम, असद, शोएब, अनवारूल हसन, आरिफ हुसैनी, क़मर हसनैन दीपू, कैफी आब्दी, अमीरूल, मोहम्मद हैदर, शारिब, मोहम्मद अब्बास आरिफ, मुफ्ती तबस्सुम, आबिद, तहसीन अब्बास सोनी, दिलावर हुसैन, मिर्जा जेया, जहीर हसन, दानिश काजमी, नजमुल हसन, इसरार हुसैन एडवोकेट आदि लोग उपस्थित रहे।
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