{"_id":"5bc77d17bdec2269ac7edec8","slug":"153980031212-jaunpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जब राम की शरण में पहुंच गए भक्त विभीषण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जब राम की शरण में पहुंच गए भक्त विभीषण
Updated Thu, 18 Oct 2018 02:00 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सतहरिया। मुंगराबादशाहपुर के गुड़ाही रामलीला मंच पर बारहवें दिन विभीषण शरणागत लीला को कलाकारों ने दिखाया। रावण दरबार में विभीषण के मुंह से प्रभु श्रीराम के महिमा का बखान सुनते ही प्रभू के जायकारों से लीला मैदान गूंज उठा। प्रस्तुत प्रसंग में जब प्रभु श्रीराम की सेना लंका में पहुंची तो रावण ने विचार विमर्श के लिए सभा का आयोजन किया। प्रभु श्रीराम भक्त विभीषण ने अपने भाई रावण को भगवान राम की शक्ति तथा उनकी महिमा के बारे में बताया। अपना सुझाव दिया कि वह मां सीता को सम्मान के साथ वापस कर भगवान राम से संधि कर लें। इसी में समूचे लंका की भलाई है। किन्तु अहंकारी रावण भाई विभीषण के इस विचार को सुनकर आग बबूला हो गया। कहा कि उन दोनों तपस्वी ने बहन शूर्पणखा की नाक नहीं लंका पति रावण की नाक काटी है। जिसमें इसके लिए प्रतिशोध की भावना नहीं जागी उसे लंका में एक क्षण भी रहने का अधिकार नहीं है। रावण ने भाई विभीषण को लात मारकर लंका से बाहर कर दिया। प्रभु भक्त विभीषण रामादल में जाकर श्रीराम के चरणों में शरणागत हो गए। राम आलोक गुप्ता, लक्ष्मण धर्मेंद्र, सीता शेरू, रावण हनुमान दीन सल्लू, कुम्भकरण सुनील, मेघनाद सुभाष, सुग्रीव दिनेश, जामवंत की भूमिका राकेश ने निभाई। डायरेक्टर लालबहादुर सिंह के कुशल निर्देशन में मंचन चल रहा है। संचालन नगर व्यापार मंडल अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने किया। समिति के पूर्व अध्यक्ष पशुपति नाथ मुन्ना ने भगवान की आरती उतारी।
विज्ञापन