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साधू सुधाकर की अग्नि परीक्षा साधना प्रारंभ
Updated Thu, 11 Oct 2018 11:56 PM IST
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केराकत। तीस वर्ष बाद साधू बनकर घर लौटे बाबा सुधाकर नवरात्र के पहले दिन से ही अपने घोषित कार्यक्रम के तहत अग्नि परीक्षा की साधना में लीन हो गए। अग्नि के घेरे के बीच साधना के लिए बैठ गए है। सुधाकर के चारों ओर बने घेरे पर लकड़ियां जल रही है और लगातार धुंआ निकल रहा है। यह दृश्य लोगों में कौतूहल व जिज्ञासा का केंद्र बना हुआ है। लोग सुधाकर की साधना देखने के लिए पहुंच रहे हैं। साधू सुधाकर इसे अग्नि परीक्षा का नाम दे रहे हैं। उनका दावा है कि वह इस तरह की अग्नि परीक्षा पहले भी दे चुके है। हठयोग साधना के तहत वह 11 दिवसीय अर्धभूमि समाधि भी ले चुके हैं। नवरात्र के प्रथम दिन से शुरू यह साधना 5 दिनों तक चलेगी। नाऊपुर निवासी सुधाकर 30 साल पहले 10 वर्ष की उम्र में घर छोड़ कर चले गए थे। कुछ दिन तक रोजी रोटी के चक्कर में पड़ा रहा फिर उसकी मुलाकात पश्चिम बंगाल के महात्मा श्री 1008 प्रह्लाद मुनि से हुई। फिर क्या था सुधाकर अध्यात्म की ओर मुड़ गए। योग और साधना में लीन रहने लगे। एक सप्ताह पूर्व साधू वेश में अपने गांव नाऊपुर आए। साधु ने अपने घर पर परिचय दिया तो पिता उमेश शुक्ल व माता प्रभावती को पहचानने में देर नहीं लगी। मां बाप व परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। गांव के पास ही सुधाकर ने सड़क किनारे अपनी साधना स्थली बना लिया। अग्नि परीक्षा के लिए अग्नि के घेरे में बैठकर नवरात्रि के पहले दिन से अपनी साधना प्रारम्भ की है।
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