{"_id":"5bbcf4bc867a55286c0272e9","slug":"153911005115-jaunpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"ताड़का बध होते ही राम के जयकारे से गूंजा पंडाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ताड़का बध होते ही राम के जयकारे से गूंजा पंडाल
Updated Wed, 10 Oct 2018 12:08 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सतहरिया। मुंगराबादशाहपुर के गुड़ाही रामलीला मंच पर चौथे दिन मुनि विश्वामित्र के आगमन व ताड़का बध का मंचन कलाकारों द्वारा किया गया।
प्रसंग में मुनि विश्वामित्र का आगमन राजा दशरथ के दरबार में होता है। राजा दशरथ के दरबार में मुनि का भव्य स्वागत होता है। राजा दशरथ ने मुनि से आने का कारण पूछते हैं। मुनि ने राक्षसों के आतंक व राक्षसी मनोवृत्ति के बारे में उन्हें बतलाया। कहा कि इनके भय से मुनियों का हवन, यज्ञ, तपस्या, पूजा पाठ सहित धार्मिक कार्य पूरा नहीं हो पा रहा है। राक्षसों से छुटकारा पाने के लिए जब मुनि ने राजा दशरथ से राम व लक्ष्मण को अपने साथ ले जाने की अनुमति मांगी तो उनके प्राण पखेरू निकलने लगे। राजा ने रुंधे स्वर व दु:खी मन से बोले यह दोनों बड़े सुकुमार तथा मेरे प्राण से भी प्यारे हैं। मुनिवर इन्हें न मांगे। इनके बिना हम एक क्षण भी जीवित नहीं रह सकते है। तब विश्वामित्र ने राजा को समझाया कि विधाता ने इन्हीं के हाथों से राक्षसों का बध लिखा है जो मिट नहीं सकता है। तब राजा दशरथ राजी हुए। विश्वामित्र के साथ वन जाते समय रास्ते में राक्षसी ताड़का राम व लक्ष्मण को खाने के लिए टूट पड़ी। प्रभु के एक ही बाण से ताड़का धराशाई हो गई। उसका बध होते ही प्रभु श्रीराम लखन के जयकारों से पंडाल गूंज उठा। उसके बाद ताड़का के बेटे मारीच व सुबाहु का वध प्रभु ने किया। राक्षसों का संहार होते ही राम भक्त प्रभु भक्ति में डूब गए। डायरेक्टर लालबहादुर सिंह की देखरेख में कलाकारों द्वारा बेहतर प्रदर्शन किया गया। ताड़का की भूमिका धीरज श्रीवास्तव, वशिष्ठ की अमृत गुप्त, विश्वामित्र की चंदन गुप्त, राम की विश्वास गुप्त, लक्ष्मण की सूरज गुप्त, हनुमान की दीन सल्लू, मारीच की अजय गुप्ता, सुबाहु की सुनील मुस्से ने निभाई। रामलीला में हास्य कलाकार की भूमिका में राजीव दालमील वाले रहे। इससे पहले कमेटी के अध्यक्ष पशुपति नाथ मुन्ना, महंत संगमलाल गुप्त, क्रान्ति गुप्त, आकाश गुप्त के संग कमेटी के लोगों ने भगवान की आरती उतार कर कार्यक्रम की शुरुआत की।
विज्ञापन
प्रसंग में मुनि विश्वामित्र का आगमन राजा दशरथ के दरबार में होता है। राजा दशरथ के दरबार में मुनि का भव्य स्वागत होता है। राजा दशरथ ने मुनि से आने का कारण पूछते हैं। मुनि ने राक्षसों के आतंक व राक्षसी मनोवृत्ति के बारे में उन्हें बतलाया। कहा कि इनके भय से मुनियों का हवन, यज्ञ, तपस्या, पूजा पाठ सहित धार्मिक कार्य पूरा नहीं हो पा रहा है। राक्षसों से छुटकारा पाने के लिए जब मुनि ने राजा दशरथ से राम व लक्ष्मण को अपने साथ ले जाने की अनुमति मांगी तो उनके प्राण पखेरू निकलने लगे। राजा ने रुंधे स्वर व दु:खी मन से बोले यह दोनों बड़े सुकुमार तथा मेरे प्राण से भी प्यारे हैं। मुनिवर इन्हें न मांगे। इनके बिना हम एक क्षण भी जीवित नहीं रह सकते है। तब विश्वामित्र ने राजा को समझाया कि विधाता ने इन्हीं के हाथों से राक्षसों का बध लिखा है जो मिट नहीं सकता है। तब राजा दशरथ राजी हुए। विश्वामित्र के साथ वन जाते समय रास्ते में राक्षसी ताड़का राम व लक्ष्मण को खाने के लिए टूट पड़ी। प्रभु के एक ही बाण से ताड़का धराशाई हो गई। उसका बध होते ही प्रभु श्रीराम लखन के जयकारों से पंडाल गूंज उठा। उसके बाद ताड़का के बेटे मारीच व सुबाहु का वध प्रभु ने किया। राक्षसों का संहार होते ही राम भक्त प्रभु भक्ति में डूब गए। डायरेक्टर लालबहादुर सिंह की देखरेख में कलाकारों द्वारा बेहतर प्रदर्शन किया गया। ताड़का की भूमिका धीरज श्रीवास्तव, वशिष्ठ की अमृत गुप्त, विश्वामित्र की चंदन गुप्त, राम की विश्वास गुप्त, लक्ष्मण की सूरज गुप्त, हनुमान की दीन सल्लू, मारीच की अजय गुप्ता, सुबाहु की सुनील मुस्से ने निभाई। रामलीला में हास्य कलाकार की भूमिका में राजीव दालमील वाले रहे। इससे पहले कमेटी के अध्यक्ष पशुपति नाथ मुन्ना, महंत संगमलाल गुप्त, क्रान्ति गुप्त, आकाश गुप्त के संग कमेटी के लोगों ने भगवान की आरती उतार कर कार्यक्रम की शुरुआत की।