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पांच साल में मांगा 2292 करोड़ और मिला 686 करोड़
Updated Tue, 09 Oct 2018 12:05 AM IST
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जौनपुर। हर साल जिले की लंबी चौड़ी योजना बनाई जाती है। जिला योजना में अरबों के बजट को मंजूरी दी जाती है लेकिन धन एक तिहाई ही जारी होता है और वह भी साल के अंत में। ऐसे में कोई काम ठीक से पूरा नहीं हो पा रहा है। बजट की प्रत्याशा में तमाम योजनाएं वर्षों लटकी रहती हैं। शायद ही किसी विभाग को जिला अनुमोदित बजट के सापेक्ष पचास फीसदी मिल पाता हो। पिछले
जिला योजना के बजट में पांच साल के अंतराल में 522 करोड़ की बढ़ोत्तरी हुई है लेकिन कभी पूरा पैसा नहीं मिला। लिहाजा जो भी काम शुरू हुए आधे-अधूरे ही रहे। पांच साल पहले वर्ष 2014 में जिला योजना का आकार 144.78 करोड़ रुपये खा था। इसमें से 43 विभागों को वित्तीय वर्ष के समाप्ति तक 72.39 करोड़ रुपये ही मिले। अनुमोदन के 50 फीसदी ही धन मिल तो काम भी उसी लिहाजा से हुआ। खेलकूद, परिवार कल्याण, आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा व होम्योपैथी, सामान्य छात्रवृत्ति और बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग को फूटी कौड़ी भी नहीं मिली। इस क्षेत्र में कोई काम नहीं हुआ। वर्ष 2015 में 274.54 करोड़ की जिला योजना बनी थी। वित्तीय वर्ष के अंत तक बजट का 54 फीसदी (150.75 करोड़) रुपये जारी हुए। खेलकूद के लिए 50 लाख रुपये का अनुमोदन जिला योजना से किया था लेकिन एक रुपया भी नहीं मिला। पिछड़े वर्ग को छात्रवृत्ति के लिए 8.4 करोड़ की मांग थी लेकिन कोई धन नहीं मिला। अल्पसंख्यक कल्याण, सामान्य छात्रवृत्ति के लिए भी बजट नहीं मिला था। वर्ष 2016 में 625.11 करोड़ की जिला योजना बनी थी, लेकिन वित्तीय वर्ष के अंत तक कुल 44 विभागों को सिर्फ 193.80 करोड़ ही मिल सका था। इस साल भी किसी भी वर्ग के छात्रों की छात्रवृत्ति के लिए धन नहीं मिला था। समाज कल्याण विभाग के लिए 12.10 करोड़ मांगा गया था लेकिन एक भी पैसा नहीं मिला था। इसी साल पर्यटन विकास के लिए 175 लाख का बजट जिला योजना समिति ने मंजूर किया था लेकिन बजट नहीं मिला। वर्ष 2017 में जिला योजना का बजट 625.11 करोड़ से घटकर 623.89 करोड़ हो गया। लेकिन विभिन्न विभागों को कुल 269.32 करोड़ ही मिल पाया था। इस साल भी सेवा योजन, अल्पसंख्यक कल्याण, परिवार कल्याण, उद्यान विभाग, मत्स्य विभाग, सहकारिता, पर्यावरण, शिल्पकार प्रशिक्षण के लिए फूटी कौड़ी भी नहीं मिली थी। अबकी बार वर्ष 2018 के लिए 624.29 करोड़ की जिला योजना बनकर तैयार है। देखना है कि इस बार विभागों को कितना बजट मिल पाता है।
जिला योजना में अपेक्षा के अनुरूप बजट नहीं मिल पाता। जिला योजना समिति का प्रस्ताव शासन को भेज दिया जाता है। जो बजट मिलता है उसे संबंधित विकास योजनओं पर खर्च किया जाता है। बजट का आवंटन शासन स्तर पर होता है।
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गौरव वर्मा
सीडीओ/सचिव जिला योजना समिति
जिला योजना के बजट में पांच साल के अंतराल में 522 करोड़ की बढ़ोत्तरी हुई है लेकिन कभी पूरा पैसा नहीं मिला। लिहाजा जो भी काम शुरू हुए आधे-अधूरे ही रहे। पांच साल पहले वर्ष 2014 में जिला योजना का आकार 144.78 करोड़ रुपये खा था। इसमें से 43 विभागों को वित्तीय वर्ष के समाप्ति तक 72.39 करोड़ रुपये ही मिले। अनुमोदन के 50 फीसदी ही धन मिल तो काम भी उसी लिहाजा से हुआ। खेलकूद, परिवार कल्याण, आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा व होम्योपैथी, सामान्य छात्रवृत्ति और बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग को फूटी कौड़ी भी नहीं मिली। इस क्षेत्र में कोई काम नहीं हुआ। वर्ष 2015 में 274.54 करोड़ की जिला योजना बनी थी। वित्तीय वर्ष के अंत तक बजट का 54 फीसदी (150.75 करोड़) रुपये जारी हुए। खेलकूद के लिए 50 लाख रुपये का अनुमोदन जिला योजना से किया था लेकिन एक रुपया भी नहीं मिला। पिछड़े वर्ग को छात्रवृत्ति के लिए 8.4 करोड़ की मांग थी लेकिन कोई धन नहीं मिला। अल्पसंख्यक कल्याण, सामान्य छात्रवृत्ति के लिए भी बजट नहीं मिला था। वर्ष 2016 में 625.11 करोड़ की जिला योजना बनी थी, लेकिन वित्तीय वर्ष के अंत तक कुल 44 विभागों को सिर्फ 193.80 करोड़ ही मिल सका था। इस साल भी किसी भी वर्ग के छात्रों की छात्रवृत्ति के लिए धन नहीं मिला था। समाज कल्याण विभाग के लिए 12.10 करोड़ मांगा गया था लेकिन एक भी पैसा नहीं मिला था। इसी साल पर्यटन विकास के लिए 175 लाख का बजट जिला योजना समिति ने मंजूर किया था लेकिन बजट नहीं मिला। वर्ष 2017 में जिला योजना का बजट 625.11 करोड़ से घटकर 623.89 करोड़ हो गया। लेकिन विभिन्न विभागों को कुल 269.32 करोड़ ही मिल पाया था। इस साल भी सेवा योजन, अल्पसंख्यक कल्याण, परिवार कल्याण, उद्यान विभाग, मत्स्य विभाग, सहकारिता, पर्यावरण, शिल्पकार प्रशिक्षण के लिए फूटी कौड़ी भी नहीं मिली थी। अबकी बार वर्ष 2018 के लिए 624.29 करोड़ की जिला योजना बनकर तैयार है। देखना है कि इस बार विभागों को कितना बजट मिल पाता है।
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जिला योजना में अपेक्षा के अनुरूप बजट नहीं मिल पाता। जिला योजना समिति का प्रस्ताव शासन को भेज दिया जाता है। जो बजट मिलता है उसे संबंधित विकास योजनओं पर खर्च किया जाता है। बजट का आवंटन शासन स्तर पर होता है।
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गौरव वर्मा
सीडीओ/सचिव जिला योजना समिति