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खुरपका नहीं फूट राट की चपेट में हैं मवेशी
Updated Wed, 26 Sep 2018 01:05 AM IST
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खुटहन। बड़नपुर गांव में पशुओं में नए तरीके की बीमारी फैली हुई है। 18 से ज्यादा मवेशी इस वायरल संक्रमण की चपेट में हैं। यह बीमारी खुरपका रोग से अलग तरह का है। इसमें खुरों में घाव बनने लगए रहे हैं। पशु चिकित्साधिकारी डा. चंद्रभान का कहना है कि यह खुरपका रोग नहीं बल्कि नए तरीके वायरल इंफेक्शन है। इस रोग का अभी तक कोई टीका नहीं बना है।
उन्होंने बताया कि इस बीमारी के नियंत्रण मे काफी वक्त लग रहा है। इससे पीड़ित मवेशियों को कीचड़ से दूर रख कर घाव की सफाई ही इसका उपचार है। अब तक इस रोग की जद में क्षेत्र के लवायन, अहीर खेतार, जमोहरा और बीरी आदि गांवों के सौ से अधिक मवेशी चपेट में आ चुके हैं, जिनका उपचार किया जा चुका है। बड़नपुर गांव मे भी कई किसानों के लगभग 18 से ज्यादा मवेशी पीड़ित चल रहे है। खुरपका मुंहपका रोग की चपेट में आए मवेशी के पहले मुंह मे छाले उसके बाद खुर में भी छाले पड़ने लगते है जबकि नई वायरल बीमारी में मवेशियों के खुर में रिंग टाइप के गहरे घाव बनने लगते है। उनका दावा है कि प्रभावित सभी गावों में मवेशियो को खुरपका, मुंहपका का शत प्रतिशत टीकाकरण गत मार्च माह में किया गया था। एक पखवाड़े पूर्व भी सभी मवेशियो को टीका लगाया जा चुका है। इसके बाद भी यह रोग होना नामुमकिन ही नहीं असंभव है। फिलहाल जितने भी मवेशी इस नये रोग की जद में है। उनका उपचार किया जा रहा है।
172551 पशुओं का हुआ टीकाकरण
जौनपुर। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. विरेन्द्र सिंह ने बताया कि पशुपालन विभाग द्वारा 15 सितम्बर 2018 से संचलित एफएमडी टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत 24 सितम्बर तक 382 ग्राम पंचायतों में कुल 172551 पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है। इसके अंतर्गत जनपद मे आठ लाख नब्बे हजार पशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया है। जिसके लिये 63 टीमें कार्य कर रही है। प्रत्येक टीम में एक पशु चिकित्साधिकारी के साथ दो पशुधन प्रसार अधिकारी एवं दो अन्य सहयोगी लगाये गए हैं। यह अभियान लगातार 45 दिनों तक चलेगा। जिसमें जनपद के गोवंश एवं महिषवंश के सभी पशुओं का टीकाकरण किया जायेगा। उन्होंने बताया कि विकास खण्ड के पशु चिकित्साधिकारी विकास खंड स्तर पर इस कार्य के लिए नोडल अधिकारी होंगे। जनपद स्तर पर नोडल अधिकारी डा. राजेश कुमार उप मुख्य पशुचिकित्साधिकारी को बनाया गया है। उन्होंने बताया कि खुरपका-मुहपका एक विषाणु जनित बीमारी है। जो मुख्य रूप से जुगाली करने वाले पशुओं को प्रभावित करती है। इस बीमारी से संक्रमित पशु को तेज बुखार आता है। खुर व पैर के जोड़ पर और दोनों खुरों के बीच में दाने पड जाते हैं। जीभ व मसूढों में छाले पड जाते हैं। मुह से लार गिरने लगती है। पशु चारा खाना छोंड देता है और लंगडाने लगता है। जिससे पशु की उत्पादकता घट जाती है। इस बीमारी से बचाव हेतु पशुओ का शत-प्रतिशत टीकाकरण आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि इस बीमारी के नियंत्रण मे काफी वक्त लग रहा है। इससे पीड़ित मवेशियों को कीचड़ से दूर रख कर घाव की सफाई ही इसका उपचार है। अब तक इस रोग की जद में क्षेत्र के लवायन, अहीर खेतार, जमोहरा और बीरी आदि गांवों के सौ से अधिक मवेशी चपेट में आ चुके हैं, जिनका उपचार किया जा चुका है। बड़नपुर गांव मे भी कई किसानों के लगभग 18 से ज्यादा मवेशी पीड़ित चल रहे है। खुरपका मुंहपका रोग की चपेट में आए मवेशी के पहले मुंह मे छाले उसके बाद खुर में भी छाले पड़ने लगते है जबकि नई वायरल बीमारी में मवेशियों के खुर में रिंग टाइप के गहरे घाव बनने लगते है। उनका दावा है कि प्रभावित सभी गावों में मवेशियो को खुरपका, मुंहपका का शत प्रतिशत टीकाकरण गत मार्च माह में किया गया था। एक पखवाड़े पूर्व भी सभी मवेशियो को टीका लगाया जा चुका है। इसके बाद भी यह रोग होना नामुमकिन ही नहीं असंभव है। फिलहाल जितने भी मवेशी इस नये रोग की जद में है। उनका उपचार किया जा रहा है।
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172551 पशुओं का हुआ टीकाकरण
जौनपुर। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. विरेन्द्र सिंह ने बताया कि पशुपालन विभाग द्वारा 15 सितम्बर 2018 से संचलित एफएमडी टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत 24 सितम्बर तक 382 ग्राम पंचायतों में कुल 172551 पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है। इसके अंतर्गत जनपद मे आठ लाख नब्बे हजार पशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया है। जिसके लिये 63 टीमें कार्य कर रही है। प्रत्येक टीम में एक पशु चिकित्साधिकारी के साथ दो पशुधन प्रसार अधिकारी एवं दो अन्य सहयोगी लगाये गए हैं। यह अभियान लगातार 45 दिनों तक चलेगा। जिसमें जनपद के गोवंश एवं महिषवंश के सभी पशुओं का टीकाकरण किया जायेगा। उन्होंने बताया कि विकास खण्ड के पशु चिकित्साधिकारी विकास खंड स्तर पर इस कार्य के लिए नोडल अधिकारी होंगे। जनपद स्तर पर नोडल अधिकारी डा. राजेश कुमार उप मुख्य पशुचिकित्साधिकारी को बनाया गया है। उन्होंने बताया कि खुरपका-मुहपका एक विषाणु जनित बीमारी है। जो मुख्य रूप से जुगाली करने वाले पशुओं को प्रभावित करती है। इस बीमारी से संक्रमित पशु को तेज बुखार आता है। खुर व पैर के जोड़ पर और दोनों खुरों के बीच में दाने पड जाते हैं। जीभ व मसूढों में छाले पड जाते हैं। मुह से लार गिरने लगती है। पशु चारा खाना छोंड देता है और लंगडाने लगता है। जिससे पशु की उत्पादकता घट जाती है। इस बीमारी से बचाव हेतु पशुओ का शत-प्रतिशत टीकाकरण आवश्यक है।
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