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शिक्षक देवेन्द्र ने बदल दी विद्यालय की तस्वीर

Tue, 04 Sep 2018 12:12 AM IST
Updated Tue, 04 Sep 2018 12:12 AM IST
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शिक्षक देवेन्द्र ने बदल दी विद्यालय की तस्वीर
बक्शा। सत्रह वर्ष तक सरहद की सुरक्षा करने वाले देवेंद्र कुमार सिंह ने सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद शिक्षा को अपना कैरियर बनाया। उन्होेंने बीटीसी किया और अध्यापक पद पर तैनात हो गए। उन्होंने लगन और परिश्रम की बदौलत मछलीशहर ब्लॉक के अईलहां कटाहित खास में पहचान बनाई। जब उन्होंने विद्यालय में नौकरी शुरू की तो महज 34 बच्चे थे लेकिन आज उनकी संख्या बढ़कर 226 पर पहुंच गई है। इस विद्यालय में छात्रों की संख्या बढ़ने की वजह से आसपास के दो अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों पर ताला लग गया।
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बक्शा विकास खंड के सद्दोपुर गांव निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक राजकिशोर सिंह के पुत्र देवेंद्र सिंह सेना की नौकरी से जेसीओ पद से वर्ष 2011 में सेवानिवृत्त हुए। पिता की प्रेरणा से उन्होंने बीटीसी में दाखिला लिया। वर्ष 2016 में मछलीशहर ब्लॉक के अईलहां कटाहित खास विद्यालय में बतौर सहायक अध्यापक उनकी तैनाती हुई। उस विद्यालय में गिनती के बच्चे थे जबकि बगल के दो अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में छात्र संख्या हर साल बढ़ जाती थी। उन्होंने छात्र संख्या बढ़ाने के लिए प्रयास शुरू किया। प्रधानाध्यापक बांकेलाल पांडेय एवं दयाशंकर यादव ने भी उनके काम में सहयोग किया। परिणाम एक ही सत्र में सामने आ गया। छात्रों की संख्या 226 पहुंच गई। देवेन्द्र ने बताया कि शिक्षक अमित कुमार नाविक ने भी इस काम में सहयोग किया। शिक्षकों ने विद्यालय में गणित, अंग्रेजी और सामान्य जैसे विषय बढ़ाने शुरू कर दिए। स्वच्छता ध्यान देना शुरू किया। नतीजतन ग्रामीणों का विद्यालय पर विश्वास बढ़ा।
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बदलापुर / घनश्यामपुर। शिक्षक कभी रिटायर नहीं होता बल्कि सेवामुक्त होने के बाद समाज के प्रति उसका दायित्व बढ़ जाता है। ऐसा मानना है अवकाश प्राप्त शिक्षिका कमला सिंह का, जो सेवानिवृत्ति के बाद 17 वर्ष से अनवरत पढ़ा रही हैं। बदलापुर ब्लाक के मिरशादपुर निवासी कमला सिंह 18 दिसंबर 1965 को बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक के रूप में नियुक्त हुई थीं। उनकी तैनाती गांव के प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापिका के रूप में हुई। उन्होंने गांव में उल्लेखनीय काम करके अपनी पहचान बनाई। वर्ष 1998 को तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायणन ने उनको राष्ट्रपति सम्मान दिया। 30 जून 2001 को सेवानिवृत्त हो गई। इसके बाद भी वे नियमित विद्यालय आ रही हैं और बच्चों को पढ़ाती हैं। चौथी कक्षा के बच्चों को गणित पढ़ाती हैं। उन्होंने कहा कि अंतिम सांस वह बच्चों को पढ़ाती रहेंगी।
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