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अस्पतालों में नहीं है डेंगू से लडने के इंतजाम
Updated Mon, 27 Aug 2018 12:12 AM IST
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जौनपुर। डेंगू की बीमारी पूर्वांचल में घातक रूप लेती जा रही है। जिले में इस बीमारी के इलाज के पर्याप्त इंतजाम नहीं है। प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में तो इलाज के बंदोबस्त नहीं ही हैं। जिला अस्पताल में 10 बेड का वार्ड बना है लेकिन डेंगू की जांच कराने के लिए नमूना बाहर भेजना पड़ता है। प्लेटलेट्स के भी पर्याप्त इंतजाम जिले में नहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग ने इस साल 41061 लोगों के सैंपल की जांच कराई। उसमें डेंगू का एक भी मरीज नहीं मिला।
बरसात के साथ ही मच्छरों की संख्या में इजाफा हो गया है। मच्छर जनित डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। स्वास्थ्य विभाग ने इन बीमारियों से निपटने के प्रबंध नहीं किए हैं। मलेरिया का इलाज तो संभव भी है लेकिन डेंगू के इलाज का इंतजाम सरकारी अस्पतालों में नहीं है। यहां 10 बेड का डेंगू और मलेरिया वार्ड बना है। उसमें मलेरिया के ही ज्यादा मरीज भर्ती होते हैं। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में प्लेटलेट्स अलग करने की मशीन का स्वीकृति मिल गई है लेकिन उसे स्थापित नहीं किया जा सका है। प्लेटलेट्स डेंगू के इलाज की सबसे जरूरी चीज है, जो उपलब्ध ही नहीं है। सीएचसी और पीएचसी पर तो डेंगू का उपचार संभव ही नहीं है। मजबूरी में मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। डेंगू से बचाव के लिए भी विभाग की ओर से कोई प्रयास नहीं किया गया है। लारवा की तलाश, लोगों को जागरूक करने जैसे उपाय नहीं किए जा रहे हैं।
सहायक मलेलिया अधिकारी हरिश्चंद ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर इस साल 41061 लोगों के रक्त के नमूनों की जांच की गई। इसमें 65 लोगों मलेरिया के पाजीविट मिले जबकि विभाग का दावा है कि डेंगू का एक भी मरीज नहीं मिला। वर्ष 2017 में 72282 सेंपल लेकर जांच कराया गया था, जिसमें 170 मलेरिया के रोगी मिले थे। डेंगू के भी 51 मरीज सामने आए थे। सभी सीएचसी और पीएचसी पर लैब सहायकों को मलेरिया की स्लाइड बनाने को कहा गया है। सीएचसी और पीएचसी को निर्देश दिया गया है कि अपनेे क्षेत्र में ऐसे स्थानों की तलाश करें जहां अधिक समय तक पानी भरा रहता है। उन स्थानों पर सिनेफास दवा का घोल बनवाकर छिड़काव कराएं। हालांकि डेंगू की जांच के प्रबंध नहीं है। डेंगू का संदेह होने पर एलाइजा टेस्ट के लिए नमूना बीएचयू के सर सुंदरलाल चिकित्सालय भेजा जाता है। किसी को डेंगू हो जाए तो उसे प्लेटलेट देना भी संभव नहीं है। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी सैम दास ने बताया कि उनके यहां ब्लड बैंक में सेपरेशन यूनिट नहीं है। ऐसे में प्लेटलेट्स नहीं जारी हो पाते हैं।
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मलेरिया और डेंगू से पीड़ित लोगों के इलाज के लिए जिला अस्पताल में 10 बेड का एक वार्ड है। उसमें मलेरिया पीडितों को भर्ती कर उनका उपचार किया जाता है। सीएचसी और पीएचसी से अपने इलाके में सिनेफास दवा का घोल का छिड़काव कराने को कहा गया है। इसके लिए प्रत्येक सीएचसी और पीएचसी पर 90-90 लीटर सिनेफास दवा उपलब्ध करा दी गई है। साथ सफाई कराने का निर्देश दिया गया है।-डा. बीपी सिंह जिला मलेरिया अधिकारी जौनपुर
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बरसात के साथ ही मच्छरों की संख्या में इजाफा हो गया है। मच्छर जनित डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। स्वास्थ्य विभाग ने इन बीमारियों से निपटने के प्रबंध नहीं किए हैं। मलेरिया का इलाज तो संभव भी है लेकिन डेंगू के इलाज का इंतजाम सरकारी अस्पतालों में नहीं है। यहां 10 बेड का डेंगू और मलेरिया वार्ड बना है। उसमें मलेरिया के ही ज्यादा मरीज भर्ती होते हैं। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में प्लेटलेट्स अलग करने की मशीन का स्वीकृति मिल गई है लेकिन उसे स्थापित नहीं किया जा सका है। प्लेटलेट्स डेंगू के इलाज की सबसे जरूरी चीज है, जो उपलब्ध ही नहीं है। सीएचसी और पीएचसी पर तो डेंगू का उपचार संभव ही नहीं है। मजबूरी में मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। डेंगू से बचाव के लिए भी विभाग की ओर से कोई प्रयास नहीं किया गया है। लारवा की तलाश, लोगों को जागरूक करने जैसे उपाय नहीं किए जा रहे हैं।
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सहायक मलेलिया अधिकारी हरिश्चंद ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर इस साल 41061 लोगों के रक्त के नमूनों की जांच की गई। इसमें 65 लोगों मलेरिया के पाजीविट मिले जबकि विभाग का दावा है कि डेंगू का एक भी मरीज नहीं मिला। वर्ष 2017 में 72282 सेंपल लेकर जांच कराया गया था, जिसमें 170 मलेरिया के रोगी मिले थे। डेंगू के भी 51 मरीज सामने आए थे। सभी सीएचसी और पीएचसी पर लैब सहायकों को मलेरिया की स्लाइड बनाने को कहा गया है। सीएचसी और पीएचसी को निर्देश दिया गया है कि अपनेे क्षेत्र में ऐसे स्थानों की तलाश करें जहां अधिक समय तक पानी भरा रहता है। उन स्थानों पर सिनेफास दवा का घोल बनवाकर छिड़काव कराएं। हालांकि डेंगू की जांच के प्रबंध नहीं है। डेंगू का संदेह होने पर एलाइजा टेस्ट के लिए नमूना बीएचयू के सर सुंदरलाल चिकित्सालय भेजा जाता है। किसी को डेंगू हो जाए तो उसे प्लेटलेट देना भी संभव नहीं है। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी सैम दास ने बताया कि उनके यहां ब्लड बैंक में सेपरेशन यूनिट नहीं है। ऐसे में प्लेटलेट्स नहीं जारी हो पाते हैं।
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मलेरिया और डेंगू से पीड़ित लोगों के इलाज के लिए जिला अस्पताल में 10 बेड का एक वार्ड है। उसमें मलेरिया पीडितों को भर्ती कर उनका उपचार किया जाता है। सीएचसी और पीएचसी से अपने इलाके में सिनेफास दवा का घोल का छिड़काव कराने को कहा गया है। इसके लिए प्रत्येक सीएचसी और पीएचसी पर 90-90 लीटर सिनेफास दवा उपलब्ध करा दी गई है। साथ सफाई कराने का निर्देश दिया गया है।-डा. बीपी सिंह जिला मलेरिया अधिकारी जौनपुर