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संविधान की प्रति जलाने वालों पर शीघ्र कार्यवाई करने की मांग
Updated Sat, 25 Aug 2018 12:40 AM IST
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जौनपुर। संविधान की प्रतियां जलाने और डा भीमराव आंबेडकर के विरुद्ध अपशब्द कहने के विरोध में मूल निवासी संघ द्वारा शुक्रवार को कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि ऐसा करने वालों पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कराया जाना चाहिए। उन्होंने अनुसूचित जाति एवं जनजाति का अपमान रोकने के लिए कड़ा कानून बनाने की मांग की। बाद में राष्ट्रपति को संबोधित पांच सूत्रीय मांग पत्र जिलाधिकारी को सौपा।
वक्ताओं ने कहा कि नौ अगस्त को नई दिल्ली के जंतरमंतर पर कुछ संगठनों व उनके सदस्यों द्वारा देश के संविधान की प्रतियां जलाया गया।इस दौरान डा.भीमराव अंबेडकर को अपशब्द कहते हुए नारेबाजी की थी। इसका वीडियो भी बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया गया है। जिन लोगों द्वारा ऐसा किसा गया है। उनका यह कृत्य राष्ट्र द्रोह की श्रेणी में आता है। इस कृत्य से समाज में अशांति का माहौल बन सकता है, जो कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती है।उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के विरुद्घ सख्त कार्यवाई होनी चाहिए। जिससे इस प्रकार का कृत्य की पुनरावृत्ति नहीं हो पाए। लेकिन अफसोस इस बात का है कि देश के विभिन्न भागों में ऐसा घृणित कार्य करने वालों के विरुद्घ प्राथमिक दर्ज होने के बाद भी अभी तक कोई कार्यवाई नहीं की गई है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भी अभी तक इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। उनके द्वारा इस मामले पर एक शब्द भी नहीं बोला गया। वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रपति को संबोधित दिए गए पत्रक में संविधान की प्रतियां जलाने और डा.भीमराव आंबेडकर के विरुद्घ असंसदीय भाषा का प्रयोग करने वालों के विरुद्घ कठोर कार्यवाई करने की मांग की गई है। धरने को केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य साहेबलाल, अध्यक्ष रमेश गौतम, उपाध्यक्ष पारसनाथ, शिवमूरत राम, सुबेदार, पलटूराम एडवोकेट, बरसातू राम सरोज आदि ने संबोधित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मनराज बौद्घ व संचालन जेएम ने किया। इस अवसर पर राजनाथ यादव एडवोकेट, मुंशीलाल, अंजूलता एडवोकेट, डा.रमाशंकर बौद्ध रमेश बौद्ध आदि उपस्थित रहे।
वक्ताओं ने कहा कि नौ अगस्त को नई दिल्ली के जंतरमंतर पर कुछ संगठनों व उनके सदस्यों द्वारा देश के संविधान की प्रतियां जलाया गया।इस दौरान डा.भीमराव अंबेडकर को अपशब्द कहते हुए नारेबाजी की थी। इसका वीडियो भी बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया गया है। जिन लोगों द्वारा ऐसा किसा गया है। उनका यह कृत्य राष्ट्र द्रोह की श्रेणी में आता है। इस कृत्य से समाज में अशांति का माहौल बन सकता है, जो कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती है।उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के विरुद्घ सख्त कार्यवाई होनी चाहिए। जिससे इस प्रकार का कृत्य की पुनरावृत्ति नहीं हो पाए। लेकिन अफसोस इस बात का है कि देश के विभिन्न भागों में ऐसा घृणित कार्य करने वालों के विरुद्घ प्राथमिक दर्ज होने के बाद भी अभी तक कोई कार्यवाई नहीं की गई है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भी अभी तक इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। उनके द्वारा इस मामले पर एक शब्द भी नहीं बोला गया। वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रपति को संबोधित दिए गए पत्रक में संविधान की प्रतियां जलाने और डा.भीमराव आंबेडकर के विरुद्घ असंसदीय भाषा का प्रयोग करने वालों के विरुद्घ कठोर कार्यवाई करने की मांग की गई है। धरने को केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य साहेबलाल, अध्यक्ष रमेश गौतम, उपाध्यक्ष पारसनाथ, शिवमूरत राम, सुबेदार, पलटूराम एडवोकेट, बरसातू राम सरोज आदि ने संबोधित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मनराज बौद्घ व संचालन जेएम ने किया। इस अवसर पर राजनाथ यादव एडवोकेट, मुंशीलाल, अंजूलता एडवोकेट, डा.रमाशंकर बौद्ध रमेश बौद्ध आदि उपस्थित रहे।
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