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दो विभागों के बीच मे फंसा वरुणा नदी पुल पहुंच मार्ग का निर्माण
Updated Thu, 23 Aug 2018 12:12 AM IST
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मीरगंज। जंघई-जरौना मार्ग से होकर वरुणा नदी पुल पर जाने वाला पहुंच मार्ग दो विभागों के बीच फंस गया है। दोनों विभाग का दावा है की सडक उनके विभाग की नहीं है। फिलहाल पहुंच मार्ग का निर्माण होना संभव नहीं दिख रहा है।
जंघई -जरौना मार्ग से निकल कर सुरियांवा की तरफ जाने वाली सडक पर वरुणा नदी पुल का पहुंच मार्ग गड्ढे में तबदील हो गया है। जिससे दुर्घटना की संभावना बढ गयी है। इस सडक से मछलीशहर, बंधवाबाजार, मीरगंज के लोग सुरियांवा के रास्ते भदोही की दूरी तय करते है। इसकी खबर को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिसके वाद भाजपा नेता गंगापार आईटी प्रभारी आकाश दुबे ने पहले पीब्लूडी से सडक मरम्मत कराने की आनलाईन शिकायत की तो लोक निर्माण विभाग की तरफ से जबाब आया की उक्त सडक जिला पंचायत की है। तब उन्होंने ने इसकी शिकायत जिला पंचायत से तो वहा से भी यह कहा गया की उक्त पहुंच मार्ग का काम उनके विभाग का नहीं है। ऐसे में सवाल यह उठता है की सडक का निर्माण कैसे हो पायेगा। सड़क किस विभाग ने बनाया यह सडक है इसकी जानकारी नहीं हो पा रही है जबकि पुल का निर्माण लोक निर्माण विभाग द्वारा ही कराया गया था। आकाश दुबे का कहना है की ऑनलाइन शिकायत का कोई मतलब नहीं रह गया है। अधिकारी लोगों को सही जानकारी नहीं देते और मामले को टाल मटोल करते है।
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जंघई -जरौना मार्ग से निकल कर सुरियांवा की तरफ जाने वाली सडक पर वरुणा नदी पुल का पहुंच मार्ग गड्ढे में तबदील हो गया है। जिससे दुर्घटना की संभावना बढ गयी है। इस सडक से मछलीशहर, बंधवाबाजार, मीरगंज के लोग सुरियांवा के रास्ते भदोही की दूरी तय करते है। इसकी खबर को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिसके वाद भाजपा नेता गंगापार आईटी प्रभारी आकाश दुबे ने पहले पीब्लूडी से सडक मरम्मत कराने की आनलाईन शिकायत की तो लोक निर्माण विभाग की तरफ से जबाब आया की उक्त सडक जिला पंचायत की है। तब उन्होंने ने इसकी शिकायत जिला पंचायत से तो वहा से भी यह कहा गया की उक्त पहुंच मार्ग का काम उनके विभाग का नहीं है। ऐसे में सवाल यह उठता है की सडक का निर्माण कैसे हो पायेगा। सड़क किस विभाग ने बनाया यह सडक है इसकी जानकारी नहीं हो पा रही है जबकि पुल का निर्माण लोक निर्माण विभाग द्वारा ही कराया गया था। आकाश दुबे का कहना है की ऑनलाइन शिकायत का कोई मतलब नहीं रह गया है। अधिकारी लोगों को सही जानकारी नहीं देते और मामले को टाल मटोल करते है।
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