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चिकित्सकों की कमी से चौपट के कगार पर है स्वास्थ्य व्यवस्था
Updated Sun, 12 Aug 2018 12:08 AM IST
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जौनपुर। जिले में डाक्टरों की कमी के चलते चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गई है। जिला अस्पताल से लेकर सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डाक्टरों की संख्या बेहद कम है। हर महीने प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डेढ़ लाख और जिला मुख्यालय पर 35 से 40 हजार मरीज सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने आते हैं। मगर डाक्टरों की कमी के चलते उन्हें सही चिकित्सकीय सुविधा नहीं मिल पा रही है।
जिले में 22 सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 73 अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इसके अलावा जिला अस्पताल, महिला अस्पताल यहां तैनात डाक्टरों पर गौर करें तो सीएमओ के अधीन 268 डाक्टरों की तुलना में 177 डाक्टर ही तैनात हैं। एक तिहाई से ज्यादा डाक्टर कम हैं। जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में 48 डाक्टर होने चाहिए लेकिन महज 26 ही तैनात हैं। डाक्टरों को सरकार 71 हजार रुपये से दो लाख रुपए प्रतिमाह वेतन देती है। इसके बावजूद तमाम डाक्टर न आकर वाराणसी, इलाहाबाद और जौनपुर में प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं और उन पर कोई रोकटोक नहीं है। तकरीबन 20 से 25 डाक्टर कभी आते ही नहीं हैं। महिला अस्पताल में तकरीबन 9 हजार और जिला अस्पताल में 26 हजार मरीज हर महीने आते हैं। दोनों अस्पतालों दो से ढाई हजार मरीज भर्ती होते हैं मगर यहां चिकित्सकों की संख्या जरूरत के आधी है। ऐसे में जरा सी जटिल बीमारी होने पर तुरंत मरीजों को बाहर रेफर कर दिया जाता है और तमाम गरीब मरीजों के लिए दूसरे शहर जाना संभव नहीं हो पाता है।
दस हजार दीजिए और मत आइए
जौनपुर। सीएमओ के कार्यकाल में तैनात एक लिपिक को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों भ्रष्टाचार निवारण संगठन वाराणसी की टीम ने गिरफ्तार किया था। उसने पूछताछ में उसने बताया था कि अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर न आने वाले डाक्टर 10 हजार रुपये की रिश्वत अफसरों को देते हैं। वर्तमान समय में अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर नहीं आने वाले चिकित्सकों की संख्या बढ़ रही है। सीएमओ की जांच में 8-10 चिकित्सक पकड़े गए हैं, जिसमें से छह का वेतन रोका गया है।
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अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डाक्टरों के नहीं आने की शिकायतें हैं। आकस्मिक जांच कर छह चिकित्सकों का वेतन रोका गया है। जनपद में चिकित्सकों की कमी है। इसके लिए शासन को समय-समय पर पत्र भेजा जाता है। नर्सिंग होम चलाने की कोई शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलने पर कार्रवाई होगी।-डा. रामजी पांडेय, सीएमओ
जिले में 22 सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 73 अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इसके अलावा जिला अस्पताल, महिला अस्पताल यहां तैनात डाक्टरों पर गौर करें तो सीएमओ के अधीन 268 डाक्टरों की तुलना में 177 डाक्टर ही तैनात हैं। एक तिहाई से ज्यादा डाक्टर कम हैं। जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में 48 डाक्टर होने चाहिए लेकिन महज 26 ही तैनात हैं। डाक्टरों को सरकार 71 हजार रुपये से दो लाख रुपए प्रतिमाह वेतन देती है। इसके बावजूद तमाम डाक्टर न आकर वाराणसी, इलाहाबाद और जौनपुर में प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं और उन पर कोई रोकटोक नहीं है। तकरीबन 20 से 25 डाक्टर कभी आते ही नहीं हैं। महिला अस्पताल में तकरीबन 9 हजार और जिला अस्पताल में 26 हजार मरीज हर महीने आते हैं। दोनों अस्पतालों दो से ढाई हजार मरीज भर्ती होते हैं मगर यहां चिकित्सकों की संख्या जरूरत के आधी है। ऐसे में जरा सी जटिल बीमारी होने पर तुरंत मरीजों को बाहर रेफर कर दिया जाता है और तमाम गरीब मरीजों के लिए दूसरे शहर जाना संभव नहीं हो पाता है।
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दस हजार दीजिए और मत आइए
जौनपुर। सीएमओ के कार्यकाल में तैनात एक लिपिक को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों भ्रष्टाचार निवारण संगठन वाराणसी की टीम ने गिरफ्तार किया था। उसने पूछताछ में उसने बताया था कि अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर न आने वाले डाक्टर 10 हजार रुपये की रिश्वत अफसरों को देते हैं। वर्तमान समय में अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर नहीं आने वाले चिकित्सकों की संख्या बढ़ रही है। सीएमओ की जांच में 8-10 चिकित्सक पकड़े गए हैं, जिसमें से छह का वेतन रोका गया है।
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अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डाक्टरों के नहीं आने की शिकायतें हैं। आकस्मिक जांच कर छह चिकित्सकों का वेतन रोका गया है। जनपद में चिकित्सकों की कमी है। इसके लिए शासन को समय-समय पर पत्र भेजा जाता है। नर्सिंग होम चलाने की कोई शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलने पर कार्रवाई होगी।-डा. रामजी पांडेय, सीएमओ