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प्रधानाध्यापक समेत दो शिक्षक निलंबित
Updated Thu, 09 Aug 2018 01:21 AM IST
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जौनपुर। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डा. राजेंद्र सिंह की सख्ती के बाद परिषदीय विद्यालयों में चल रहे फर्जीवाड़े का खुलासा शुरू हो गया है। ड्यूटी किए बिना ही घर बैठे तनख्वाह लेने के मामले में बुधवार को एक प्रधानाध्यापक और एक महिला शिक्षक को निलंबित कर दिया। दोनों मामलों में जांच बैठा दी गई है। महिला शिक्षक ने बक्शा में तैनात रहे तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी रमाकांत से मिलकर अपनी सेवा पुस्तिका ही बदलवा डाली।
बक्शा विकास खंड के पूर्व माध्यमिक विद्यालय दोनई में तैनात सहायक अध्यापक मंजू सिंह को बीएसए ने निलंबित कर दिया। मंजू सिंह पर आरोप है कि वह लंबे समय से स्कूल नहीं जा रही थी। लेकिन घर बैठे वह वेतन ले रही थी। मंजू सिंह की तैनाती 1999 में सिरकोनी विकास खंड के जमैथा प्राथमिक विद्यालय पर हुई थी। बीच में उन्होंने अपना तबादला बक्शा विकास खंड में करा लिया। नियुक्ति के 11 साल बाद उन्होंने सेवा पुस्तिका ही बदलवा ली। जिस समय उनकी सेवा पुस्तिका बदली गई उस वक्त बक्शा में खंड शिक्षा अधिकारी रमाकांत राम थे। तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी की छवि भ्रष्ट अधिकारी की थी। विभागीय सूत्रों की माने तो रमाकांत के कार्यकाल में बनी सेवा पुस्तिका समेत अन्य अभिलेखों की जांच की जाए तो परिषदीय विद्यालयों में कई गंभीर फर्जीवाड़े का खुलासा हो सकता है। दूसरा मामला प्राथमिक विद्यालय बेलावा का है। यहां तैनात प्रधानाध्यापक रायसाहब यादव को भी बीएसए ने निलंबित कर दिया है। आरोप है कि प्रधानाध्यापक ने यहां तैनात शिक्षिका दीपा दुबे जो मई 2017 से अप्रैल 2018 तक स्कूल नहीं आई थी। उन्हें पहले अनुपस्थित किया। बाद में लेनदेन कर उपस्थिति पंजिका ही बदल डाली और नए रजिस्टर पर नौ महीने उपस्थित दिखाकर नौ महीने का पौने चार लाख का एरियर भुगतान के लिए बिल भेज दिया।
बक्शा विकास खंड के पूर्व माध्यमिक विद्यालय दोनई में तैनात सहायक अध्यापक मंजू सिंह को बीएसए ने निलंबित कर दिया। मंजू सिंह पर आरोप है कि वह लंबे समय से स्कूल नहीं जा रही थी। लेकिन घर बैठे वह वेतन ले रही थी। मंजू सिंह की तैनाती 1999 में सिरकोनी विकास खंड के जमैथा प्राथमिक विद्यालय पर हुई थी। बीच में उन्होंने अपना तबादला बक्शा विकास खंड में करा लिया। नियुक्ति के 11 साल बाद उन्होंने सेवा पुस्तिका ही बदलवा ली। जिस समय उनकी सेवा पुस्तिका बदली गई उस वक्त बक्शा में खंड शिक्षा अधिकारी रमाकांत राम थे। तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी की छवि भ्रष्ट अधिकारी की थी। विभागीय सूत्रों की माने तो रमाकांत के कार्यकाल में बनी सेवा पुस्तिका समेत अन्य अभिलेखों की जांच की जाए तो परिषदीय विद्यालयों में कई गंभीर फर्जीवाड़े का खुलासा हो सकता है। दूसरा मामला प्राथमिक विद्यालय बेलावा का है। यहां तैनात प्रधानाध्यापक रायसाहब यादव को भी बीएसए ने निलंबित कर दिया है। आरोप है कि प्रधानाध्यापक ने यहां तैनात शिक्षिका दीपा दुबे जो मई 2017 से अप्रैल 2018 तक स्कूल नहीं आई थी। उन्हें पहले अनुपस्थित किया। बाद में लेनदेन कर उपस्थिति पंजिका ही बदल डाली और नए रजिस्टर पर नौ महीने उपस्थित दिखाकर नौ महीने का पौने चार लाख का एरियर भुगतान के लिए बिल भेज दिया।
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