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संक्रामक बीमारी से अस्पताल में बढ़ी मरीजों की संख्या
Updated Thu, 09 Aug 2018 01:33 AM IST
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जौनपुर। मौसम में आए बदलाव के कारण संक्रामक रोगों की संख्या बढ़ गई है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन मरीजों में संख्या बढ़ गई है। अस्पताल में दवा की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध नहीं होने के कारण काफी परेशानी उठानी पड़ पर रही है। प्रतिदिन करीब 11 से 12 सौ मरीज इलाज के लिए जिला अस्पताल में पहुंच रहे हैं। बुधबार को 1110 मरीज जिला अस्पताल के ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचे जिसके कारण वार्डों में भी दवाब बढ़ गया है।
जिला अस्पताल में ओपीडी के मरीजों की संख्या पर नजर डाली जाए तो सोमवार को 1200 मरीजों की ओपीडी हुई। मंगलवार को 1100 और बुधवार को 1110 मरीजों की ओपीडी हुई। दोपहर दो बजे तक हर विभागों में इलाज के लिए मरीज अपनी बारी का इंतजार करते रहे। ओपीडी के दौरान कुछ गंभीर रोग के पीडित मरीजों को भर्ती किया जाता है। आंकड़ों पर नजर डाला जाए तो प्रतिदिन करीब 50 मरीज वार्ड में भर्ती किए जा रहे हैं। मरीजों की संख्या बढने के कारण वार्ड में दबाव बढ़ गया है। कभी-कभी तो ऐसी स्थिति हो जाती है कि मरीजों को भर्ती करने के लिए बेड खाली नहीं रहता है। जिला अस्पताल में सप्ताह के पहले तीन दिन सोमवार, मंगलवार और बुधवार को ओपीडी में भीड़ अधिक होती है। पहली अगस्त को इलाज के लिए पहुंचे मरीजों में 43 की जांच करने के बाद उन्हें भर्ती किया. दो अगस्त को 42, तीन के 45, चार को 49, पांच को तीस, छह को 55, सात को 45, आठ को सबसे कम 25 मरीज भर्ती किए।
अस्पताल में नहीं जरूरी दवाएं
जौनपुर। जिला अस्पताल में डायरिया, बुखार के अलावा अन्य रोगों के मरीज पहुंच रहे हैं। लेकिन जरूरी दवाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। हालत यह है कि डायरिया और बुखार में उपयोग किए जाने वाले पैरासीटामाल, मेट्रोजिल, सिफ्राजोल आदि दवाएं भी उपलब्ध नहीं हैं।
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दुर्घटना के मरीजों की बढ़ी संख्या
जौनपुर। दुर्घटना के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। अस्पताल में प्रतिदिन 20 से 25 लोग दुर्घटना में घायल होकर जिला अस्पताल में पहुंच रहे हैं। पीेएचसी और सीएचसी में प्राथमिक उपचार के बाद घायलों को जिला अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है। जिसके कारण 24 घंटे की आपातकालीन सेवा चालू रहती है।
जिला अस्पताल में इलाज के लिए आने मरीजों पर पूरा ध्यान रखा जाता है। अस्पताल में कुछ दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। उसके लिए लिखा गया है। अस्पताल में जो दवाएं हों उसकी सूची लगा दी जाती है। ताकि मरीजों के आने पर उसे दवा समय से उपलब्ध कराया जा सके।
डा. एसके पांडेय, सीएमएस जौनपुर
जिला अस्पताल में ओपीडी के मरीजों की संख्या पर नजर डाली जाए तो सोमवार को 1200 मरीजों की ओपीडी हुई। मंगलवार को 1100 और बुधवार को 1110 मरीजों की ओपीडी हुई। दोपहर दो बजे तक हर विभागों में इलाज के लिए मरीज अपनी बारी का इंतजार करते रहे। ओपीडी के दौरान कुछ गंभीर रोग के पीडित मरीजों को भर्ती किया जाता है। आंकड़ों पर नजर डाला जाए तो प्रतिदिन करीब 50 मरीज वार्ड में भर्ती किए जा रहे हैं। मरीजों की संख्या बढने के कारण वार्ड में दबाव बढ़ गया है। कभी-कभी तो ऐसी स्थिति हो जाती है कि मरीजों को भर्ती करने के लिए बेड खाली नहीं रहता है। जिला अस्पताल में सप्ताह के पहले तीन दिन सोमवार, मंगलवार और बुधवार को ओपीडी में भीड़ अधिक होती है। पहली अगस्त को इलाज के लिए पहुंचे मरीजों में 43 की जांच करने के बाद उन्हें भर्ती किया. दो अगस्त को 42, तीन के 45, चार को 49, पांच को तीस, छह को 55, सात को 45, आठ को सबसे कम 25 मरीज भर्ती किए।
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अस्पताल में नहीं जरूरी दवाएं
जौनपुर। जिला अस्पताल में डायरिया, बुखार के अलावा अन्य रोगों के मरीज पहुंच रहे हैं। लेकिन जरूरी दवाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। हालत यह है कि डायरिया और बुखार में उपयोग किए जाने वाले पैरासीटामाल, मेट्रोजिल, सिफ्राजोल आदि दवाएं भी उपलब्ध नहीं हैं।
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दुर्घटना के मरीजों की बढ़ी संख्या
जौनपुर। दुर्घटना के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। अस्पताल में प्रतिदिन 20 से 25 लोग दुर्घटना में घायल होकर जिला अस्पताल में पहुंच रहे हैं। पीेएचसी और सीएचसी में प्राथमिक उपचार के बाद घायलों को जिला अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है। जिसके कारण 24 घंटे की आपातकालीन सेवा चालू रहती है।
जिला अस्पताल में इलाज के लिए आने मरीजों पर पूरा ध्यान रखा जाता है। अस्पताल में कुछ दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। उसके लिए लिखा गया है। अस्पताल में जो दवाएं हों उसकी सूची लगा दी जाती है। ताकि मरीजों के आने पर उसे दवा समय से उपलब्ध कराया जा सके।
डा. एसके पांडेय, सीएमएस जौनपुर