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वन विभाग से होगी 42.2 लाख की वसूली
Updated Thu, 26 Jul 2018 12:08 AM IST
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जौनपुर। पौधरोपण के लिए पिछले वर्ष गड्ढा खोदने के नाम पर वन विभाग द्वारा 42.2 लाख रुपये का गोलमाल का मामला सामने आया है। विभाग ने मनरेगा के धन से चयनित स्थानों के बजाय कहीं और गड्ढा खुदवा कर पैसा खर्च कर दिया गया। इस साल जब इन गड्ढों में पौधरोपण करने के लिए धनराशि की मांग की गई तो मामला खुला। जिलाधिकारी ने विभाग से गड्ढे की खुदाई पर खर्च धनराशि की वसूली करने को कहा है। उपायुक्त मनरेगा ने 24 जुलाई को वन विभाग को वसूली के लिए पत्र भेजा है।
चालू वित्तीय वर्ष में पौधरोपण के लिए वित्त वर्ष 2017-18 में मनरेगा के तहत 51 स्थानों पर गड्ढा खुदाई के लिए वन विभाग को 67 लाख 80 हजार रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई थी। वन विभाग को 27 मार्च को 50 लाख 24 हजार रुपये का आवंटन कर दिया गया। वन विभाग ने पौधरोपण के लिए गड्ढा खुदवाना शुरू किया। विभाग ने पहले से तय 11 तय स्थानों पर तो गड्ढा खोदवाया। पहले से तय स्थानों से इतर 40 अन्य जगहों पर गड्ढे खुदवा दिए गए। इसकी स्वीकृति भी वन विभाग ने नहीं ली और मनमाने तरीके से रकम खर्च कर दी। यह मामला तब खुला जब वन विभाग ने मनरेगा से पौधे लगवाने के लिए रकम की मांग की। इसके बाद उपायुक्त मनरेगा कमलेश कुमार सोनी ने इसकी जानकारी जिलाधिकारी को दी। इस दौरान डीएम ने खर्च की गई 42.2 लाख रुपये वसूलने की सहमति दी। इस पर डीसी मनरेगा ने धन वसूल करने के लिए वन विभाग को पत्र भेजा है।
पौधरोपण के लिए वन विभाग को धन दिया गया था, उसने पहले से निर्धारित 40 स्थानों पर गड्ढा खोदा ही नहीं। विभाग ने दूसरे स्थानों पर गड्ढे खुदवाएं हैं लेकिन यह मनरेगा के नियमों के विरुद्ध है। मनरेगा में जिस कार्य और स्थान के लिए धन आवंटित किया जाता है, उसी स्थान पर काम कराने का प्रावधान है। वन विभाग ने 42.2 लाख रुपये का कार्य तय स्थानों पर न करा कर दूसरे स्थानों पर कराया है। लिहाजा उस धनराशि को वसूल के लिए करने के लिए 24 जुलाई को पत्र भेजा गया है। -कमलेश कुमार सोनी, उपायुक्त मनरेगा
चालू वित्तीय वर्ष में पौधरोपण के लिए वित्त वर्ष 2017-18 में मनरेगा के तहत 51 स्थानों पर गड्ढा खुदाई के लिए वन विभाग को 67 लाख 80 हजार रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई थी। वन विभाग को 27 मार्च को 50 लाख 24 हजार रुपये का आवंटन कर दिया गया। वन विभाग ने पौधरोपण के लिए गड्ढा खुदवाना शुरू किया। विभाग ने पहले से तय 11 तय स्थानों पर तो गड्ढा खोदवाया। पहले से तय स्थानों से इतर 40 अन्य जगहों पर गड्ढे खुदवा दिए गए। इसकी स्वीकृति भी वन विभाग ने नहीं ली और मनमाने तरीके से रकम खर्च कर दी। यह मामला तब खुला जब वन विभाग ने मनरेगा से पौधे लगवाने के लिए रकम की मांग की। इसके बाद उपायुक्त मनरेगा कमलेश कुमार सोनी ने इसकी जानकारी जिलाधिकारी को दी। इस दौरान डीएम ने खर्च की गई 42.2 लाख रुपये वसूलने की सहमति दी। इस पर डीसी मनरेगा ने धन वसूल करने के लिए वन विभाग को पत्र भेजा है।
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पौधरोपण के लिए वन विभाग को धन दिया गया था, उसने पहले से निर्धारित 40 स्थानों पर गड्ढा खोदा ही नहीं। विभाग ने दूसरे स्थानों पर गड्ढे खुदवाएं हैं लेकिन यह मनरेगा के नियमों के विरुद्ध है। मनरेगा में जिस कार्य और स्थान के लिए धन आवंटित किया जाता है, उसी स्थान पर काम कराने का प्रावधान है। वन विभाग ने 42.2 लाख रुपये का कार्य तय स्थानों पर न करा कर दूसरे स्थानों पर कराया है। लिहाजा उस धनराशि को वसूल के लिए करने के लिए 24 जुलाई को पत्र भेजा गया है। -कमलेश कुमार सोनी, उपायुक्त मनरेगा
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