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कलेक्ट्रेट अधिवक्ता समिति चुनाव को लेकर माहौल गरमाया, गुटबाजी शुरू
Updated Thu, 19 Jul 2018 12:53 AM IST
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डीएम से मिलने पहुंचे वकील
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जौनपुर। कलेक्ट्रेट अधिवक्ता समिति के चुनाव को लेकर माहौल गरमा गया है। जहां अध्यक्ष विजय प्रताप सिंह ने गुरुवार को न्यायिक कार्य से विरत रहकर डीएम से वार्ता की। वहीं दूसरे गुट के अधिवक्ता भी डीएम से मिले और उन्होंने कहा कि अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त हो गया है। ऐसे में उनकी बातों को मानने का कोई मतलब नहीं है।
कलेक्ट्रेट अधिवक्ता समिति के अध्यक्ष विजय प्रताप सिंह का कार्यकाल 30 जून को समाप्त हो गया। बावजूद इसके चुनाव की घोषणा नहीं हो पाई। इसके पीछे चाहे जो कारण हो लेकिन अध्यक्ष विजय प्रताप सिंह का कहना है कि जो लोग हल्ला कर रहे हैं। उन्हें बार काउंसिल ने वेरिफिकेशन के दौरान सदस्य नहीं बनाया है। ऐसे में बार में तय हुआ था कि इन्हें मताधिकार से वंचित न किया जाए और जब तक ये सदस्य नहीं बन जाते हैं तब तक चुनाव न कराया जाए। भले ही चुनाव में विलंब हो। सबको सदस्य बनना चाहिए। उधर दूसरे गुट के अधिवक्ताओं का कहना है कि विजय प्रताप सिंह अध्यक्ष पद पर कब्जा कर लिए हैं। उन्हें 30 जून के बाद अध्यक्ष रहने का कोई अधिकार नहीं है और न ही कोई निर्णय ले सकते हैं। वैसे इस मामले को लेकर मंगलवार को बार की बैठक हुई जिसमें सर्वसम्मति से चुनाव कराने का निर्णय लिया गया है। अध्यक्ष विजय प्रताप सिंह ने चुनाव अधिकारी सुरेंद्र बहादुर सिंह को घोषित किया है लेकिन उनका दूसरा गुट विरोध कर रहा है। उनका कहना है कि जब अध्यक्ष रहे ही नहीं तो चुनाव अधिकारी घोषित करने का कोई अधिकार नहीं है। यह बात बार की बैठक में तय हो चुकी है। जो भी हो डीएम से बुधवार को अध्यक्ष विरोधी गुट के अधिवक्ता जीवन शंकर श्रीवास्तव, जमादार सिंह, वीरेंद्र श्रीवास्तव, रविंद्र नारायण सिंह, जयंती प्रसाद मिश्र, जगत नरायन तिवारी, हर्ष कुमार पांडेय आदि डीएम से मिले। उन्होंने कहा कि विजय प्रताप अध्यक्ष नहीं हैं। उनका कार्यकाल समाप्त हो चुका है। डीएम ने अधिवक्ताओं से संघ का संविधान मुहैया कराने को कहा है।
वादकारियों का ध्यान रखें अधिवक्ता
जौनपुर। कलेक्ट्रेट अधिवक्ता समिति के अध्यक्ष विजय प्रताप सिंह डीएम अरविंद मलप्पा बंगारी से अधिवक्ताओं के साथ मिले। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता न्यायिक कार्य से बुधवार को विरत रहने का निर्णय लिए हैं। इस बात पर डीएम ने कहा कि हड़ताल की वजह से वादकारियों को दिक्कत होती है। ऐसा प्रयास हो कि कम से कम हड़ताल हो जिससे वादकारियों को परेशान न होना पड़े।
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जो वोटर नहीं हैं, वहीं हल्ला कर रहे हैं। उन्हें ही वोटर बनाने के लिए चुनाव में विलंब हुआ। इसका निर्णय बैठक में लिया गया था और तय हुआ था कि जब तक सदस्य न बन जाएं तब तक चुनाव स्थगित रहेगा। हमने 16 जुलाई को चुनाव अधिकारी सुरेंद्र बहादुर सिंह को बना दिया है। चुनाव कब होगा यह निर्णय वह लेंगे। मैं अभी भी अध्यक्ष हूं। बुधवार को न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया था।
विजय प्रताप सिंह
अध्यक्ष
कलेक्ट्रेट अधिवक्ता समिति
विजय प्रताप सिंह अब कलेक्ट्रेट अधिवक्ता समिति के अध्यक्ष संविधान के अनुसार नहीं हैं। उनका कार्यकाल 30 जून को समाप्त हो चुका है। अनुशासन समिति के चेयरमैन ने पूरा अधिकार अपने हाथ में ले लिया है। 16 जुलाई को विजय प्रताप ने चुनाव अधिकारी घोषित किया था। 17 जुलाई को अधिवक्ताओं की हुई बैठक में इसे निरस्त कर उनसे सदस्यों की सूची मांगी गई है। चुनाव अब अनुशासन समिति कराएगी। वहीं चुनाव अधिकारी भी घोषित करेगी।
जयंती प्रसाद मिश्र
पूर्व महामंत्री
कलेक्ट्रेट अधिवक्ता समिति
कलेक्ट्रेट अधिवक्ता समिति के अध्यक्ष विजय प्रताप सिंह का कार्यकाल 30 जून को समाप्त हो गया। बावजूद इसके चुनाव की घोषणा नहीं हो पाई। इसके पीछे चाहे जो कारण हो लेकिन अध्यक्ष विजय प्रताप सिंह का कहना है कि जो लोग हल्ला कर रहे हैं। उन्हें बार काउंसिल ने वेरिफिकेशन के दौरान सदस्य नहीं बनाया है। ऐसे में बार में तय हुआ था कि इन्हें मताधिकार से वंचित न किया जाए और जब तक ये सदस्य नहीं बन जाते हैं तब तक चुनाव न कराया जाए। भले ही चुनाव में विलंब हो। सबको सदस्य बनना चाहिए। उधर दूसरे गुट के अधिवक्ताओं का कहना है कि विजय प्रताप सिंह अध्यक्ष पद पर कब्जा कर लिए हैं। उन्हें 30 जून के बाद अध्यक्ष रहने का कोई अधिकार नहीं है और न ही कोई निर्णय ले सकते हैं। वैसे इस मामले को लेकर मंगलवार को बार की बैठक हुई जिसमें सर्वसम्मति से चुनाव कराने का निर्णय लिया गया है। अध्यक्ष विजय प्रताप सिंह ने चुनाव अधिकारी सुरेंद्र बहादुर सिंह को घोषित किया है लेकिन उनका दूसरा गुट विरोध कर रहा है। उनका कहना है कि जब अध्यक्ष रहे ही नहीं तो चुनाव अधिकारी घोषित करने का कोई अधिकार नहीं है। यह बात बार की बैठक में तय हो चुकी है। जो भी हो डीएम से बुधवार को अध्यक्ष विरोधी गुट के अधिवक्ता जीवन शंकर श्रीवास्तव, जमादार सिंह, वीरेंद्र श्रीवास्तव, रविंद्र नारायण सिंह, जयंती प्रसाद मिश्र, जगत नरायन तिवारी, हर्ष कुमार पांडेय आदि डीएम से मिले। उन्होंने कहा कि विजय प्रताप अध्यक्ष नहीं हैं। उनका कार्यकाल समाप्त हो चुका है। डीएम ने अधिवक्ताओं से संघ का संविधान मुहैया कराने को कहा है।
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वादकारियों का ध्यान रखें अधिवक्ता
जौनपुर। कलेक्ट्रेट अधिवक्ता समिति के अध्यक्ष विजय प्रताप सिंह डीएम अरविंद मलप्पा बंगारी से अधिवक्ताओं के साथ मिले। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता न्यायिक कार्य से बुधवार को विरत रहने का निर्णय लिए हैं। इस बात पर डीएम ने कहा कि हड़ताल की वजह से वादकारियों को दिक्कत होती है। ऐसा प्रयास हो कि कम से कम हड़ताल हो जिससे वादकारियों को परेशान न होना पड़े।
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जो वोटर नहीं हैं, वहीं हल्ला कर रहे हैं। उन्हें ही वोटर बनाने के लिए चुनाव में विलंब हुआ। इसका निर्णय बैठक में लिया गया था और तय हुआ था कि जब तक सदस्य न बन जाएं तब तक चुनाव स्थगित रहेगा। हमने 16 जुलाई को चुनाव अधिकारी सुरेंद्र बहादुर सिंह को बना दिया है। चुनाव कब होगा यह निर्णय वह लेंगे। मैं अभी भी अध्यक्ष हूं। बुधवार को न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया था।
विजय प्रताप सिंह
अध्यक्ष
कलेक्ट्रेट अधिवक्ता समिति
विजय प्रताप सिंह अब कलेक्ट्रेट अधिवक्ता समिति के अध्यक्ष संविधान के अनुसार नहीं हैं। उनका कार्यकाल 30 जून को समाप्त हो चुका है। अनुशासन समिति के चेयरमैन ने पूरा अधिकार अपने हाथ में ले लिया है। 16 जुलाई को विजय प्रताप ने चुनाव अधिकारी घोषित किया था। 17 जुलाई को अधिवक्ताओं की हुई बैठक में इसे निरस्त कर उनसे सदस्यों की सूची मांगी गई है। चुनाव अब अनुशासन समिति कराएगी। वहीं चुनाव अधिकारी भी घोषित करेगी।
जयंती प्रसाद मिश्र
पूर्व महामंत्री
कलेक्ट्रेट अधिवक्ता समिति