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मास्टर प्लान और डीआईओएस कार्यालय में डीएम का छापा
Updated Tue, 17 Jul 2018 12:11 AM IST
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डीएम को समस्या बताते लोग
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जौनपुर। जिलाधिकारी अरविंद मलप्पा बंगारी ने सोमवार को दोपहर में मास्टर प्लान और डीआईओएस कार्यालय में औचक निरीक्षण किया। मास्टर प्लान में नक्शा पास कराने के लिए वर्ष 2016 से ही डंप आवेदनों को देख जिलाधिकारी ने जेई को फटकार लगाई। जबकि डीआईओएस कार्यालय में जिला विद्यालय निरीक्षक से लेकर वित्त एंव लेखाधिकारी समेत कोई बाबू कार्यालय में मौजूद नहीं था।
जिलाधिकारी दोपहर करीब 12:30 बजे कलेक्ट्रेट में स्थित मास्टर प्लान कार्यालय में पहुंचे। यहां मौजूद अवर अभियंता रामनरेश वर्मा से नक्शा पास कराने से संबंधित आवेदनों और रजिस्टर की जांच की। पता चला कि कार्यालय में नक्शा पास कराने के लिए वर्ष 2016 से आवेदन अभी लंबित हैं। जिलाधिकारी ने इसकी वजह पूछी तो जेई कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। जिलाधिकारी को शिकायत मिली थी कि मास्टर प्लान का जेई अपना मोबाइल नंबर किसी को नहीं देता। डीएम को भी कभी बात करनी होती है तो सम्पर्क नहीं हो पाता। इस संबंध में डीएम ने जेई से मोबाइल के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि उनके पास मोबाइल नहीं है। इसपर जिलाधिकारी भड़क उठे। उन्होंने कहा कि आधार चेक करा दूंगा पता चल जाएगा कि कितने मोबाइल हैं। नौकरी कर रहे हो मोबाइल रखना ही होगा। जिलाधिकारी ने नक्शा पास कराने के लिए लंबिंत आवेदनों का 15 दिन के अंदर निस्तारण कर रिपोर्ट देने को कहा है। जिलाधिकारी यहां से सीधे डीआईओएस कार्यालय पहुंच गए। पता चला कि जिला विद्यालय निरीक्षक हाईकोर्ट गए हैं। वित्त एवं लेखाधिकारी के बारे में बताया गया कि वह वाराणसी में किसी ट्रेनिंग में शामिल होने गए हैं। कार्यालय में कोई भी बाबू नहीं था। लिपिकों के बारे में भी बताया गया कि वे ट्रेनिंग में गए हैं। कार्यालय में चपरासी और गार्ड थे। कुछ विद्यालयों के लिपिक और शिक्षक भी आए थे। जिलाधिकारी ने गेट को बंद करवा दिया। कहा कि अंदर के लोग अंदर रहें और बाहर के लोग बाहर और खुद जिला विद्यालय निरीक्षक के कार्यालय में बैठ गए। उन्होंने सीसीटीवी में देखा कि गार्ड लोगों को अंदर से बाहर कर रहा है। इसपर जिलाधिकारी ने होमगार्ड को बुलवाया और डाट पिलाई। कहा कि मेरे कहने पर भी कोई असर नहीं रहा। इसपर होमगार्ड ने कहा कि उसने किसी को भी अंदर बाहर नहीं कराया है। इसपर जिलाधिकारी सीसीटीवी फुटेज को रीवर्स करना चाहे तो पता चला कोड किसी को पता नहीं था। उन्होंने एक महीने तक दोनों होमगार्डों को कहीं भी ड्यूटी न लगाने का निर्देश होमगार्ड कमांडेंट को दिया। जिलाधिकारी बाहर निकले तो करीब 15 लोगों की भीड़ जमा थी। सब शिक्षक थे। वे मूल्यांकन का पैसा लेने आए थे। मूल्यांकन का इतने दिन बकाया होने की वजह जानने के लिए उन्होंने संबंधित बाबू से फोन पर बात की। तत्काल भुगतान का निर्देश दिया।
जिलाधिकारी दोपहर करीब 12:30 बजे कलेक्ट्रेट में स्थित मास्टर प्लान कार्यालय में पहुंचे। यहां मौजूद अवर अभियंता रामनरेश वर्मा से नक्शा पास कराने से संबंधित आवेदनों और रजिस्टर की जांच की। पता चला कि कार्यालय में नक्शा पास कराने के लिए वर्ष 2016 से आवेदन अभी लंबित हैं। जिलाधिकारी ने इसकी वजह पूछी तो जेई कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। जिलाधिकारी को शिकायत मिली थी कि मास्टर प्लान का जेई अपना मोबाइल नंबर किसी को नहीं देता। डीएम को भी कभी बात करनी होती है तो सम्पर्क नहीं हो पाता। इस संबंध में डीएम ने जेई से मोबाइल के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि उनके पास मोबाइल नहीं है। इसपर जिलाधिकारी भड़क उठे। उन्होंने कहा कि आधार चेक करा दूंगा पता चल जाएगा कि कितने मोबाइल हैं। नौकरी कर रहे हो मोबाइल रखना ही होगा। जिलाधिकारी ने नक्शा पास कराने के लिए लंबिंत आवेदनों का 15 दिन के अंदर निस्तारण कर रिपोर्ट देने को कहा है। जिलाधिकारी यहां से सीधे डीआईओएस कार्यालय पहुंच गए। पता चला कि जिला विद्यालय निरीक्षक हाईकोर्ट गए हैं। वित्त एवं लेखाधिकारी के बारे में बताया गया कि वह वाराणसी में किसी ट्रेनिंग में शामिल होने गए हैं। कार्यालय में कोई भी बाबू नहीं था। लिपिकों के बारे में भी बताया गया कि वे ट्रेनिंग में गए हैं। कार्यालय में चपरासी और गार्ड थे। कुछ विद्यालयों के लिपिक और शिक्षक भी आए थे। जिलाधिकारी ने गेट को बंद करवा दिया। कहा कि अंदर के लोग अंदर रहें और बाहर के लोग बाहर और खुद जिला विद्यालय निरीक्षक के कार्यालय में बैठ गए। उन्होंने सीसीटीवी में देखा कि गार्ड लोगों को अंदर से बाहर कर रहा है। इसपर जिलाधिकारी ने होमगार्ड को बुलवाया और डाट पिलाई। कहा कि मेरे कहने पर भी कोई असर नहीं रहा। इसपर होमगार्ड ने कहा कि उसने किसी को भी अंदर बाहर नहीं कराया है। इसपर जिलाधिकारी सीसीटीवी फुटेज को रीवर्स करना चाहे तो पता चला कोड किसी को पता नहीं था। उन्होंने एक महीने तक दोनों होमगार्डों को कहीं भी ड्यूटी न लगाने का निर्देश होमगार्ड कमांडेंट को दिया। जिलाधिकारी बाहर निकले तो करीब 15 लोगों की भीड़ जमा थी। सब शिक्षक थे। वे मूल्यांकन का पैसा लेने आए थे। मूल्यांकन का इतने दिन बकाया होने की वजह जानने के लिए उन्होंने संबंधित बाबू से फोन पर बात की। तत्काल भुगतान का निर्देश दिया।
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