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अपहरण व कूटरचना में दो को तीन वर्ष की सजा, मिली जमानत

Fri, 06 Jul 2018 11:52 PM IST
Updated Fri, 06 Jul 2018 11:52 PM IST
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अपहरण व कूटरचना में दो को तीन वर्ष की सजा, मिली जमानत

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जौनपुर। सिकरारा थाने के भगीरथपुर की दसवीं की छात्रा हैप्पी मौर्य के अपहरण और हत्या के मामले में दो लोगों को तीन साल की सजा सुनाई गई है। अपर सत्र न्यायाधीश एसटीएफ प्रथम ने अपहरण में सहयोगी सुशीला (आंगनबाड़ी कार्यकर्ता) एवं सिमरन नाम से मृतका की फर्जी टीसी तैयार करने वाले तहसीन खान तीन वर्ष कारावास व बीस-बीस हजार रुपए जुर्माना लगाया लगाया है। दोनों महिला आरोपियों को कोर्ट ने जमानत भी दे दी।
अभियोजन के अनुसार 19 जुलाई 2012 को सुबह 9:30 बजे स्कूल गई कक्षा 10 की छात्रा हैप्पी मौर्या का अपहरण हो गया था। उसके भाई प्रदीप मौर्य ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। बाद में छह लाख रुपये की फिरौती मांगी गई। फोन करने वाला भगीरथपुर का सत्यप्रकाश मौर्य था। थाने और अफसरों से शिकायत करने पर सुनवाई नहीं हुूई तो हाईकोर्ट की शरण लेने पड़ी। उच्च न्यायालय ने पुलिस अधीक्षक को जंच करने का आदेश दिया। जांच में पता चला कि गवाहों ने बताया कि हैप्पी को सत्यप्रकाश व उसी मां सुशीला के साथ बाइक से जाते दिखे थे। 16 मार्च 2013 को नैनीताल पुलिस वादी के घर आई। फोटो से वादी ने हैप्पी मौर्य व सत्यप्रकाश की पहचान की। पुलिस ने बताया कि 8 सितंबर 2013 की रात पंजाब होटल नैनीताल उत्तराखंड में हैप्पी मौर्या की उसके सलवार से गला कसकर हत्या कर दी गई। उसके शव को इस्लामिया कमेटी तल्लीताल द्वारा दफन कर दिया गया था। उप जिला मजिस्ट्रेट नैनीताल के आदेश पर शव को निकालकर पोस्टमार्टम कराया गया।
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विवेचना में सामने आया कि सत्यप्रकाश ने सुशीला व अन्य आरोपियों के सहयोग से हैप्पी का अपहरण किया। उसका नाम बदलकर सिमरन रखा तथा फर्जी प्रमाणपत्र बनाकर लखनऊ में गर्ल्स इंटर कॉलेज में नाम लिखवाया और हॉस्टल में दाखिला करवाया। तहसीन बानो ने हैप्पी की फर्जी टीसी तैयार कराई थी। सत्यप्रकाश ने अपना नाम आसिफ खान रख लिया था। सत्यप्रकाश, हैप्पी मौर्या को लेकर पंजाब होटल में इन्हीं नामों से ठहरा था। बाद में उसका दुष्कर्म कर सलवार से गला कस कर उसकी हत्या कर दी और शव छोड़कर भाग गया। सत्यप्रकाश के मोबाइल की कॉल डिटेल से तहसीन बानो व शाइस्ता बानो का नाम प्रकाश में आया। कोर्ट में 14 गवाह परीक्षित कराए गए। विचारण के दौरान आरोपी सत्यप्रकाश कोर्ट में गैरहाजिर हो गया। वह हाजिर नहीं हुआ तो कोर्ट ने उसकी पत्रावली अलग कर मामले की सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया। शाइस्ता को कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया।
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