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गूजर ताल से शुरू नहीं हो पाया मत्स्य बीजों का वितरण
Updated Fri, 06 Jul 2018 12:24 AM IST
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खेतासराय (जौनपुर)। खुदौली स्थित प्रसिद्ध गूजर ताल में मत्स्य बीजों का वितरण शुरू नहीं हो पाया है। मत्स्य पालक बीज नहीं मिलने से निराश होकर वापस लौट रहे हैं। विभागीय अधिकारी इसके पीछे कार्ययोजना की मंजूरी विलंब और मानसूनी की बेरुखी वजह बता रहे हैं।
खेतासराय क्षेत्र के गुजरताल में 989 बीघा जल क्षेत्र और 10 बीघा मत्स्य उत्पादन क्षेत्र है। जल क्षेत्र को मत्स्य पालन के लिए पट्टे पर दिया जाता है। जबकि उत्पादन क्षेत्र में हैचरी और मत्स्य बीजों के संचय के लिए तालाब है। यहां की हैचरी विभाग ने घाटा दिखाकर 2005-2006 में इसे बंद कर दिया था। इसके बाद, यहां के हैचरी तालाबों में सिर्फ मत्स्य बीजों का संचय कर मत्स्य पालकों को बेचा जाता है। गुजरताल के क्षेत्रफल के लिहाज से पूरे प्रदेश में पहला स्थान होने के बाद भी प्रशासनिक एवं विभागीय उपेक्षा का शिकार है। विभाग का यह ताल अब उजड़ा चमन हो चुका है। ताल क्षेत्र में लगे हजारों पेड़ औने-पौने दाम में नीलाम कर दिए गए। मत्स्य उत्पादन के लिए बनी हैचरी में लगे उपकरण जंग खा चुके हैं। वर्तमान सीजन में अभी तक मत्स्य संचय और बिक्री के लिए कार्ययोजना मंजूर होकर धन आवंटित नहीं हो सका है। मत्स्य संचय के लिए बने एक दर्जन तालाबों में अभी सिर्फ एक तालाब में सोलर नलकूप के जरिए पानी भरा जा सका है। शेष तालाब अभी भी सूखे पड़े हैं।
विभागीय अधिकारियों के स्थानांतरण एवं मानसूनी बरसात की कमी की वजह से मत्स्य तालाबों की तैयारी में थोड़ा विलंब हुआ है। कार्ययोजना की मंजूरी प्रक्रिया चल रही है। शीघ्र ही तालाबों में मत्स्य बीजों के संचय के लिए भी आवश्यक तैयारी कर ली गई है। गुजरताल ताल से जुलाई के तीसरे सप्ताह से मत्स्य बीज मिलने शुरू हो जाएंगे। मत्स्य पलकों को यह बीज 110 रुपये प्रति हजार की दर से दिए जाएंगे। - सुदामा लाल शर्मा, प्रभारी गुजर ताल
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खेतासराय क्षेत्र के गुजरताल में 989 बीघा जल क्षेत्र और 10 बीघा मत्स्य उत्पादन क्षेत्र है। जल क्षेत्र को मत्स्य पालन के लिए पट्टे पर दिया जाता है। जबकि उत्पादन क्षेत्र में हैचरी और मत्स्य बीजों के संचय के लिए तालाब है। यहां की हैचरी विभाग ने घाटा दिखाकर 2005-2006 में इसे बंद कर दिया था। इसके बाद, यहां के हैचरी तालाबों में सिर्फ मत्स्य बीजों का संचय कर मत्स्य पालकों को बेचा जाता है। गुजरताल के क्षेत्रफल के लिहाज से पूरे प्रदेश में पहला स्थान होने के बाद भी प्रशासनिक एवं विभागीय उपेक्षा का शिकार है। विभाग का यह ताल अब उजड़ा चमन हो चुका है। ताल क्षेत्र में लगे हजारों पेड़ औने-पौने दाम में नीलाम कर दिए गए। मत्स्य उत्पादन के लिए बनी हैचरी में लगे उपकरण जंग खा चुके हैं। वर्तमान सीजन में अभी तक मत्स्य संचय और बिक्री के लिए कार्ययोजना मंजूर होकर धन आवंटित नहीं हो सका है। मत्स्य संचय के लिए बने एक दर्जन तालाबों में अभी सिर्फ एक तालाब में सोलर नलकूप के जरिए पानी भरा जा सका है। शेष तालाब अभी भी सूखे पड़े हैं।
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विभागीय अधिकारियों के स्थानांतरण एवं मानसूनी बरसात की कमी की वजह से मत्स्य तालाबों की तैयारी में थोड़ा विलंब हुआ है। कार्ययोजना की मंजूरी प्रक्रिया चल रही है। शीघ्र ही तालाबों में मत्स्य बीजों के संचय के लिए भी आवश्यक तैयारी कर ली गई है। गुजरताल ताल से जुलाई के तीसरे सप्ताह से मत्स्य बीज मिलने शुरू हो जाएंगे। मत्स्य पलकों को यह बीज 110 रुपये प्रति हजार की दर से दिए जाएंगे। - सुदामा लाल शर्मा, प्रभारी गुजर ताल
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